Until nation building : एक गाँव – एक ईमानदार गाँव से राष्ट्र निर्माण तक ?

Until nation building : एक गाँव – एक ईमानदार गाँव से राष्ट्र निर्माण तक

Until nation building : एक गाँव – एक ईमानदार गाँव से राष्ट्र निर्माण तक ?
Until nation building : एक गाँव – एक ईमानदार गाँव से राष्ट्र निर्माण तक ?
“भारत की आत्मा गाँवों में बसती है” —
  • यह केवल एक भावुक कथन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की ठोस सच्चाई है। भारत की लगभग 65% जनसंख्या गाँवों में निवास करती है, लेकिन क्या कभी हमने गाँवों की उस आत्मा की पीड़ा को समझा है? क्या हमने यह जानने का प्रयास किया है कि आखिर उस आत्मा को सबसे गहरा आघात कौन पहुंचाता है? इसका उत्तर है — भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और सामाजिक उदासीनता।
  • जब शहरी भारत स्मार्ट शहरों, ए.आई., स्टार्टअप्स और ग्लोबल इनोवेशन की चर्चा करता है, तब ग्रामीण भारत अब भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा होता है। राशन की कालाबाज़ारी, विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपेक्षा और प्रशासनिक लापरवाही आज भी गाँवों के कड़वे यथार्थ हैं। इन्हीं गहराइयों में एक रोशनी की किरण बनकर उभरी है नियोधि फाउंडेशन की “एक गाँव – एक ईमानदार” योजना। यह कोई सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि समाज के भीतर से उपजा एक नैतिक आंदोलन है, जो व्यवस्था को भीतर से बदलने का संकल्प रखता है।
यह योजना इसलिए अत्यंत आवश्यक है
  • क्योंकि सरकारें नीतियाँ बदल सकती हैं, बजट आवंटित कर सकती हैं, लेकिन समाज का नैतिक चरित्र केवल जागरूक और जिम्मेदार नागरिकों द्वारा ही परिवर्तित हो सकता है। “एक गाँव – एक ईमानदार” योजना का उद्देश्य सत्ता या तंत्र का विरोध करना नहीं है, बल्कि यह जनता और शासन के बीच एक नैतिक सेतु का निर्माण करना है। जब प्रत्येक गाँव में कम से कम एक ऐसा नागरिक खड़ा हो जो भय, लोभ और दबाव से परे रहकर सत्य, न्याय और ईमानदारी की आवाज़ बने, तब पूरी व्यवस्था में स्वतः एक सकारात्मक परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। और जब यह प्रक्रिया एक गाँव में नहीं, बल्कि सैकड़ों गाँवों में एक साथ आरंभ होती है, तो यह केवल एक पहल नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बन जाती है।
  • इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सादगी, सच्चाई और स्थायित्व है। यह किसी राजनीतिक प्रचार या भारीभरकम बजट पर नहीं, बल्कि ज़मीनी सच्चाई और मूल्यों पर आधारित है। इसमें न भाषणबाज़ी है, न दिखावा — बल्कि प्रत्यक्ष कार्यान्वयन है। इस योजना के अंतर्गत हर गाँव में एक प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता है जो गाँव की मूलभूत समस्याओं को चिन्हित करता है, सरकारी योजनाओं की जानकारी ग्रामवासियों तक पहुँचाता है, और शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी करता है। यह प्रतिनिधि गाँव में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामाजिक सहभागिता की भावना को पुनः जाग्रत करता है।
    Until nation building : एक गाँव – एक ईमानदार गाँव से राष्ट्र निर्माण तक ?
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“एक गाँव – एक ईमानदार”
  • योजना का दृष्टिकोण टकराव नहीं, संवाद है। यह बदलाव की शुरुआत समाज के भीतर मूल्यों के पुनर्निर्माण से करती है, न कि सड़क पर आक्रोशपूर्ण प्रदर्शनों से। यह आंदोलन मानता है कि व्यवस्था से भिड़े बिना भी व्यवस्था में परिवर्तन संभव है — बशर्ते बदलाव का बीज ईमानदारी और नागरिक उत्तरदायित्व की ज़मीन पर बोया जाए। योजना के अंतर्गत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करने के लिए तकनीक का सक्रिय रूप से उपयोग किया जाता है — जैसे व्हाट्सएप ग्रुप, वॉइस नोट्स, ज़ूम मीटिंग्स आदि के माध्यम से नियमित संवाद और मार्गदर्शन दिया जाता है। और यह प्रतिनिधि अकेले नहीं होते, बल्कि नियोधि फाउंडेशन और नियोधि मीडिया संघ की संगठित शक्ति उनके पीछे खड़ी रहती है।
  • यह प्रतिनिधि न केवल गाँव का निगरानीकर्ता होता है, बल्कि वह अपने आचरण, संकल्प और निष्ठा से गाँव के लिए एक जीवंत उदाहरण बन जाता है। जब स्कूल का प्रधानाचार्य, स्वास्थ्य केंद्र का कर्मचारी, या राशन डीलर यह जानता है कि कोई उन्हें देख रहा है, और वह देखने वाला केवल कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संगठित मंच का प्रतिनिधि है — तब स्वाभाविक रूप से अनुशासन और जवाबदेही का भाव उत्पन्न होता है।
“एक गाँव – एक ईमानदार”
  • योजना हमें सिखाती है कि परिवर्तन केवल विचारों से नहीं आता, बल्कि सक्रिय भूमिका निभाने से आता है। यह योजना आम नागरिक को असाधारण बना देती है — क्योंकि वह बदलाव का वाहक बनता है, केवल दर्शक नहीं। यह आंदोलन राजनीति से परे जाकर समाज के उस हिस्से को सशक्त करता है, जो अक्सर उपेक्षित और अनसुना रह जाता है।
  • अब बारी आपकी है। यदि आप चाहते हैं कि आपके गाँव में भी जवाबदेही, पारदर्शिता और ईमानदारी की रोशनी फैले — या यदि आप स्वयं इस आंदोलन का हिस्सा बनकर अपने गाँव के लिए एक बदलाव के वाहक बनना चाहते हैं — तो निःसंकोच नियोधि फाउंडेशन से जुड़िए। यह कोई संगठन मात्र नहीं, बल्कि एक सामाजिक चेतना है, एक नैतिक पुनर्जागरण की यात्रा है। क्योंकि जब गाँव बदलेगा, तभी भारत बदलेगा। और भारत तभी बदलेगा, जब हर गाँव में ईमानदारी जीवंत होगी।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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