Quack : गुप्त रोगों के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित कर चांदी काटते फर्जी डॉक्टर के नाम पर निम हकीम ?

Quack : गुप्त रोगों के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित कर चांदी काटते फर्जी डॉक्टर के नाम पर निम हकीम

Quack : गुप्त रोगों के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित कर चांदी काटते फर्जी डॉक्टर के नाम पर निम हकीम ?
Quack : गुप्त रोगों के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित कर चांदी काटते फर्जी डॉक्टर के नाम पर निम हकीम ?
आखिर संबंधित विभाग क्यों नहीं करता इनके खिलाफ कोई कार्रवाई..!
  • करोड़ों रुपए खर्च करके बनते हैं असली डॉक्टर,फिर बिन पढ़े लिखे यह निम हकीमों की कैसे खुल जाती क्लीनिक तंबू जैसी दुकाने..!!हमारे यहां डाक्टरों को भगवान कहा जाता है, क्योंकि व नाजुक परिस्थिति में भी हमारा जीवन बचा लाते हैं। भारतीय डाक्टरों से जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि पूरी दुनिया में हमारे डाक्टरों की योग्यता का डंका बजता है व विकसित देशों के नामीगिरामी अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और दुनिया भर से मरीज अच्छे इलाज की चाह में भारत आते हैं।लेकिन इसका एक दूसरा चेहरा भी है। किसी भी शहर में निकल जाइए, सड़क किनारे दीवारों पर ‘गुप्तरोग का शर्तिया इलाज’ वाले विज्ञापन और गली मोहल्लों में क्लीनिक व तंबू वाले अस्पताल जरूर मिलेंगे। इन दुकानों व तंबुओं के बाहर पोस्टरों पर तरह-तरह की शक्ति बढ़ाने और खो गई शक्तियों को पाने के रामबाण इलाज का दावा किया गया होता है। इनके लिए अन्य नाम है ‘झोलाछाप डाक्टर’।
  • अंग्रेजी में उन्हें ‘क्वैक’ कहा जाता है। इनसे जुड़ा मुहावरा ‘नीम-हकीम खतरा-ए-जान’ भी आपके ध्यान में आया होगा।दरअसल, हमारे यहां सेहत को लेकर तो कमोबेश जागरूकता पाई जाती है, लेकिन कई बार लगता है कि इस मसले को ज्यादातर लोग टुकड़ों में बांट कर देखते हैं। मसलन, समाज में लोग कुछ बीमारियों को लेकर डाक्टर के पास जाने से हिचकते हैं, दाएं-बाएं हल खोजते हैं। कोई देख न रहा हो, किसी को पता न चल जाए, चुपचाप इलाज हो जाए,इसी संकोच का दोहन किया जाता है नीम-हकीमों द्वारा संचालित तथाकथित क्लीनिकों में।जबकि यौन-स्वास्थ्य भी हमारी समूची सेहत का ही एक जरूरी हिस्सा है।
    Quack : गुप्त रोगों के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित कर चांदी काटते फर्जी डॉक्टर के नाम पर निम हकीम ?
    Quack : गुप्त रोगों के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित कर चांदी काटते फर्जी डॉक्टर के नाम पर निम हकीम ?

    यौन अंग भी शरीर के सामान्य हिस्से ही हैं। यह विषय भी जीवन का नैसर्गिक और स्वस्थ भाग हैं, पर भारतीय समाज में इससे जुड़ी बातों को गलत चीज की तरह बरता जाता है। यौन रोगों को लेकर काल्पनिक डर बना दिए गए हैं और इन्हें लेकर बड़ी गोपनीयता अमल में लाई जाती है।

  • इससे संबंधित रोगों को ‘गुप्त रोग’ का नाम देना दिग्भ्रमित करना है। गोपनीयता के चलते लोगों को सही और जरूरी जानकारी नहीं मिलती। यह अभाव गलतफहमियों को जन्म देता है।नीम-हकीम और बाबा कहे जाने वाले लोग आम जन के बीच इसी अज्ञानता, भ्रांतियां और इसके इलाज के नाम पर अनेक अंधविश्वासों का फायदा उठाते हैं। वे शारीरिक विकास की सामान्य दशाओं को भी बीमारी बता कर लोगों को ठगते हैं। शोध कहते हैं कि बीमारी समझी जाने वाली अनेक समस्याओं का हल केवल उचित शिक्षा या सही मार्गदर्शन होता है। हमारे यहां मन और यौन से जुड़े रोगों को लेकर खुली सोच या सहानुभूतिपूर्ण मानसिकता नहीं है। इनके पीड़ितों को हेय या जुगुप्सा की नजर से देखा जाता है।इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि वे ‘झोलाछाप डाक्टरों’ का आसान शिकार हो जाता हैं। लेकिन वही संबंधित विभाग भी इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है अगर कोई आरटीआई के माध्यम से भी जानकारी करें तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता और ना ही कोई कार्रवाई की जाती।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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