Mourning spread in the village: बाजपुरा में गोमती नदी घाट पर दर्दनाक हादसा: नहाने गए 13 वर्षीय अंकित की डूबने से मौत, गांव में पसरा मातम

उत्तर प्रदेश के बाजपुरा गांव में मंगलवार की सुबह एक हृदयविदारक हादसा सामने आया, जिसने पूरे इलाके को शोक में डूबो दिया। गोमती नदी के घाट पर नहाने गए 13 वर्षीय बालक अंकित निषाद की डूबने से मौत हो गई। अंकित गांव के ही निवासी जगदीश निषाद का पुत्र था। मासूम अंकित अपनी निष्कपट मुस्कान और चंचल स्वभाव के लिए पूरे मोहल्ले में जाना जाता था, लेकिन किसे पता था कि सुबह का एक साधारण स्नान उसकी जिंदगी का अंतिम पल साबित होगा। यह हादसा सुबह करीब 10 बजे हुआ, जब अंकित अपने तीन दोस्तों के साथ गोमती नदी के घाट पर नहाने गया था। सभी बच्चे रोज़ की तरह उत्साह में पानी में कूदे और खेलने लगे, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह खुशी चीख-पुकार में बदल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नदी का जलस्तर पिछले कुछ दिनों से बढ़ा हुआ था। बच्चे जब किनारे के पास नहा रहे थे, तभी अंकित खेल-खेल में थोड़ा आगे चला गया। अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। आसपास के बच्चों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन वे स्वयं छोटे होने के कारण सफल नहीं हो सके। घबराए हुए दोस्तों ने तुरंत गांव के लोगों को आवाज़ लगाई और दौड़कर सूचना दी। कुछ ग्रामीण मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक अंकित का कोई पता नहीं चल पाया था। नदी का बहाव तेज़ था और पानी की गहराई अनुमान से कहीं अधिक थी।
सूचना मिलते ही एकलव्य गोताखोर सेना के सचिव सियाराम निषाद को घटना की जानकारी दी गई। उन्होंने बिना समय गंवाए अपनी टीम के साथ घटनास्थल की ओर रुख किया। गोताखोरों ने मौके पर पहुंचकर खोजबीन शुरू की। इस बीच असंद्रा थाना पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच गई और राहत-बचाव कार्य का निरीक्षण करने लगी। स्थानीय लोगों की भीड़ नदी किनारे जमा हो गई थी, सभी की निगाहें इस उम्मीद में टिकी थीं कि शायद अंकित सुरक्षित मिल जाए। लगभग आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गोताखोरों ने अंकित का शव पानी से बाहर निकाला। उसे तुरंत किनारे लाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अंकित के शव को देखकर गांव में मातम छा गया। उसकी मां और परिजन का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि चंचल और हंसमुख अंकित अब इस दुनिया में नहीं रहा। गांव की महिलाओं ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि अंकित पढ़ाई में अच्छा था और हर समय मुस्कुराता रहता था। स्कूल के शिक्षक और उसके सहपाठी भी इस घटना से गहरे सदमे में हैं। गांव के लोगों ने प्रशासन से अपील की कि नदी के घाट पर सुरक्षा के उचित प्रबंध किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं दोबारा न हों।

पुलिस ने मौके का मुआयना किया और पंचनामा भरकर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह दुर्घटना का मामला प्रतीत होता है और इसमें किसी प्रकार की साजिश या लापरवाही के साक्ष्य नहीं मिले हैं। हालांकि, पुलिस ने एहतियात के तौर पर बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय प्रशासन ने परिजनों को हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया है। साथ ही ग्राम पंचायत के माध्यम से मृतक के परिवार को आर्थिक मदद दिए जाने की सिफारिश की जा रही है।
गोताखोर टीम के सचिव सियाराम निषाद ने बताया कि गोमती नदी के इस हिस्से में कई स्थानों पर गहराई अचानक बढ़ जाती है, जिससे इस तरह की दुर्घटनाएं अक्सर हो जाती हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि बिना जानकार व्यक्ति की मौजूदगी के नदी में नहाने न जाएं, खासकर बच्चे और किशोर। मानसून के बाद नदी का प्रवाह तेज़ होता है, जिससे पानी deceptively शांत दिखाई देता है लेकिन नीचे गहराई और खिंचाव बहुत अधिक होता है।
हादसे के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। अंकित के घर पर लोगों का तांता लगा हुआ है। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहा है, लेकिन मां-बाप की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। पिता जगदीश निषाद ने कहा, “अंकित सुबह कह रहा था कि जल्दी आऊंगा, दोस्तों के साथ थोड़ा नहा लूंगा। किसे पता था कि वो लौटकर कभी नहीं आएगा।” गांव के बुजुर्गों ने बताया कि पहले भी यहां ऐसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन अब तक नदी घाट पर कोई स्थायी चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई।
स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद उस घाट पर अस्थायी चेतावनी बोर्ड लगवाया है और लोगों से नदी के किनारे नहाने या खेलने से परहेज़ करने की अपील की है। समाजसेवियों ने सुझाव दिया है कि ग्राम पंचायत और ब्लॉक प्रशासन मिलकर यहां सुरक्षा के लिए जाल, रस्सियां और गहराई के संकेतक लगाए, ताकि भविष्य में किसी की जान न जाए।
यह हादसा एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि छोटी सी लापरवाही कैसे किसी परिवार की खुशियों को छीन सकती है। अंकित की असामयिक मृत्यु ने न केवल उसके माता-पिता बल्कि पूरे समुदाय को झकझोर दिया है। अब हर कोई यही दुआ कर रहा है कि ऐसी घटना दोबारा न हो और सरकार ग्रामीण इलाकों में नदी घाटों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करे। मासूम अंकित की यादें गांव के हर दिल में हमेशा जीवित रहेंगी — एक मुस्कुराता चेहरा, जो पलभर में इस दुनिया को अलविदा कह गया, पीछे छोड़ गया आंखों में आंसू और दिलों में टीस की गहरी लकीर।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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