Bus collision : तमिलनाडु में बस टक्कर से 11 मौतें, कुर्नूल में बस आग हादसे में 20 यात्री मृत

तमिलनाडु के शिवगंगा जिले में रविवार दोपहर हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। तिरुपत्तूर के पास दो बसों की आमने-सामने की टक्कर में 11 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए। मरने वालों में 8 महिलाएँ, 2 बच्चे और एक पुरुष शामिल हैं। इस हादसे ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे प्रदेश को एक बार फिर सड़क सुरक्षा, परिवहन व्यवस्था और ड्राइवरों की सावधानी को लेकर गंभीर चिंतन के लिए बाध्य कर दिया है। शिवगंगा के एसपी शिवा प्रसाद के अनुसार घायलों में कई की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है और उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम लगातार इलाज में जुटी है।
मौके से मिले वीडियो और तस्वीरों में हादसे की भयावहता साफ झलक रही है। स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की दोनों बसें तेज रफ्तार में थीं और ड्राइवर साइड से भीषण तरीके से भिड़ गईं। टक्कर इतनी तेज थी कि बसों का आगे का हिस्सा पूरी तरह पिचक गया और सीटें भी एक-दूसरे में धंस गईं। स्थानीय लोगों ने बताया कि टक्कर की आवाज कई मीटर दूर तक सुनाई दी और देखते ही देखते सड़क पर चीख-पुकार मच गई। बसों के मलबे में शव बुरी तरह फंस गए थे, जिन्हें निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। उन्होंने बस की खिड़कियाँ और शीशे तोड़कर अंदर फंसे यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश की। कई यात्रियों की हालत गंभीर थी, जिन्हें लोगों ने अपनी गाड़ियों और एंबुलेंसों की मदद से अस्पताल पहुँचाया। हादसे के बाद सड़क पर लंबा जाम लग गया, जिसे पुलिस ने काफी प्रयासों के बाद नियंत्रित किया। दुर्घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि जिस तरह बसों का सामने वाला हिस्सा पूरी तरह खत्म हो चुका था, उससे टक्कर की तीव्रता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
यह हादसा राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या की ओर भी इशारा करता है। तेज रफ्तार, लापरवाही और ओवरटेक की जल्दबाज़ी अक्सर ऐसे भयावह हादसों का कारण बनती है। परिवहन विभाग समय-समय पर चेतावनी जारी करता है, लेकिन उसके बावजूद सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन न करने की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।
इस बीच, आंध्र प्रदेश के कुर्नूल से भी एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। चिन्नाटेकुर के पास रविवार सुबह लगभग 3:30 बजे एक प्राइवेट बस में अचानक आग लग गई। बस हैदराबाद से बेंगलुरु जा रही थी और जब वह NH-44 से गुजर रही थी, तब सामने से आ रही एक बाइक उससे टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक बस के नीचे घुस गई और उसका ईंधन टैंक फट गया। इससे बस में पलभर में आग फैल गई। आग इतनी तेजी से भड़की कि यात्रियों को बाहर निकलने का समय भी नहीं मिला और लगभग 20 लोग जिंदा जलकर मौत के मुंह में समा गए।

घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि बस में आग लगते ही यात्रियों में भगदड़ मच गई। कई लोग खिड़कियों को तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश करते रहे, लेकिन लपटों ने इतनी तेजी पकड़ ली कि किसी को बचने का मौका ही नहीं मिला। कई यात्री धुएँ के कारण बेहोश हो गए और वहीँ पर जान गंवा बैठे। पुलिस और दमकल विभाग को मौके पर पहुँचने में समय लग गया, और जब तक आग पर काबू पाया गया, तब तक बस पूरी तरह खाक हो चुकी थी।
कुर्नूल में हुई इस दुर्घटना ने बस सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। क्या बस में फायर एक्सटिंग्विशर मौजूद था? क्या इमरजेंसी एग्ज़िट सही तरह से कार्य कर रहे थे? क्या बस की फिटनेस और रख-रखाव की जांच ठीक से की गई थी? ऐसे कई सवालों के जवाब अभी मिलने बाकी हैं, लेकिन यह हादसा यह दर्शाता है कि रात के समय हाईवे पर भारी वाहन और दोपहिया वाहनों की टक्कर से कितनी भयावह स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत में सड़क सुरक्षा अभी भी एक चुनौती है। आंकड़ों के अनुसार, देश में हर वर्ष हजारों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं और कई हजार लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। सरकार की ओर से सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं, ट्रैफिक नियम सख्त किए गए हैं, जुर्माने बढ़ाए गए हैं, लेकिन जब तक ड्राइवर स्वयं सतर्क और जिम्मेदार नहीं बनेंगे, तब तक दुर्घटनाएँ कम होना मुश्किल है।
तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के इन हादसों के बाद स्थानीय प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। विशेषज्ञ टीम यह पता लगाएगी कि बसों की टक्कर किन परिस्थितियों में हुई, क्या सड़क की स्थिति सुरक्षित थी, क्या बसों की स्पीड लिमिट का पालन किया जा रहा था या फिर चालक की लापरवाही इसका कारण बनी। इसके साथ ही कुर्नूल की बस आग की घटना में यह भी जांच होगी कि क्या बस में सुरक्षा उपकरण मौजूद थे और क्या चालक ने तेज गति से बस चलाई थी।
पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, और घायलों के इलाज के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था की गई है। दोनों घटनाओं ने कई परिवारों को हमेशा के लिए गहरे दुख में डूबो दिया है। मौत का यह मंजर न केवल भयावह था, बल्कि सड़क सुरक्षा के प्रति गंभीर चेतावनी भी है।
अंततः, चाहे तमिलनाडु की बस टक्कर हो या आंध्र प्रदेश की बस में लगी आग—दोनों घटनाएँ सड़क सुरक्षा की अनदेखी के विनाशकारी परिणामों की याद दिलाती हैं। देश को ऐसे हादसों से बचाने के लिए आवश्यक है कि चालक जिम्मेदारी से वाहन चलाएँ, प्रशासन सड़क सुरक्षा नियमों का कठोरता से पालन कराए, और वाहन मालिक सुरक्षा उपकरण व रख-रखाव को प्राथमिकता दें। तभी सड़कें सुरक्षित बन सकेंगी और ऐसे दिल दहला देने वाले हादसों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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