Democracy awareness : लोकतंत्र जागरूकता का अनोखा संदेश शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित और बच्चों की देशभक्ति से सजी अनूठी पहल ?

Democracy awareness : लोकतंत्र जागरूकता का अनोखा संदेश शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित और बच्चों की देशभक्ति से सजी अनूठी पहल

Democracy awareness : लोकतंत्र जागरूकता का अनोखा संदेश शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित और बच्चों की देशभक्ति से सजी अनूठी पहल ?
Democracy awareness : लोकतंत्र जागरूकता का अनोखा संदेश शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित और बच्चों की देशभक्ति से सजी अनूठी पहल ?

उच्च प्राथमिक विद्यालय सिठमरा, डेरापुर, कानपुर देहात (उ.प्र.) के राज्य अध्यापक अवार्डी एवं सहायक अध्यापक नवीन कुमार दीक्षित हमेशा से शिक्षा को केवल पाठ्यपुस्तकों की सीमाओं में नहीं बांधते, बल्कि बच्चों के भीतर छिपी राष्ट्रभक्ति, जिम्मेदारी और जागरूक नागरिक बनने की भावना को भी प्रज्ज्वलित करते हैं। उनकी शिक्षण शैली में नवाचार, संस्कृति और समर्पण का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। यही कारण है कि उनके विद्यालय के बच्चे किसी भी सामाजिक अभियान में पूरे उत्साह के साथ भाग लेते हैं।

नवीन कुमार दीक्षित कहते हैं—
“बच्चे भी मेरे साथ राष्ट्र भक्ति निभाते हैं,
लोकतंत्र के लिए कुछ करके दिखाते हैं।”

यह पंक्तियाँ सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि उनके कार्यों का वास्तविक परिचय हैं। लोकतंत्र की मजबूती नागरिकों की जागरूकता से होती है, और इस मिशन में बच्चों की भागीदारी एक नई दिशा प्रदान करती है।

इसी भावना के तहत विद्यालय में एक अनोखा अभियान चलाया गया—मतदाता जागरूकता रंग-बिरंगी पतंगों के माध्यम से।
लोकतंत्र पर आधारित संदेशों को बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी रंगीन पतंगों पर लिखा और उन्हें आसमान में उड़ाया। इन पतंगों पर लिखा हर वाक्य जन-जागरूकता का एक संदेश बनकर लोगों की निगाहों में आया। बच्चे जब मैदान में इकट्ठा होकर पतंग उड़ाते, तो वह दृश्य न केवल मन को आनंदित करता, बल्कि यह भी दिखाता कि आने वाली पीढ़ी लोकतंत्र के मूल्य समझ रही है और उन्हें दिल से अपनाने के लिए तैयार है।

बच्चों की ओर से बेहद मासूम और प्रेरक पंक्तियाँ सुनने को मिलीं—

“SIR का कार्य प्रगति पर है सर,
आप भी कंप्लीट फॉर्म लाएं सर।”

यह बाल-निवेदन एक सरल लेकिन प्रभावशाली संदेश लिए हुए है कि मतदाता जागरूकता केवल वयस्कों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरी समाज की चेतना का हिस्सा है। बच्चे भले मतदान न कर पाते हों, लेकिन अपनी बातों से वे वयस्कों को उनका कर्तव्य याद दिलाते रहते हैं।

Democracy awareness : लोकतंत्र जागरूकता का अनोखा संदेश शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित और बच्चों की देशभक्ति से सजी अनूठी पहल ?
Democracy awareness : लोकतंत्र जागरूकता का अनोखा संदेश शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित और बच्चों की देशभक्ति से सजी अनूठी पहल ?

इसी प्रेरणा के साथ बच्चों की दूसरी पंक्तियाँ भी पूरे समाज को सोचने पर मजबूर करती हैं—

“लोकतंत्र मजबूत बनाएं सर,
अपना दायित्व निभाएं सर।”

ये छोटी-छोटी आवाजें लोकतंत्र की असल ताकत हैं—सहभागिता, जिम्मेदारी और जागरूकता। जब बच्चे इतने सरल और स्पष्ट तरीके से समाज को दिशा देने की कोशिश करें, तो बड़े भी निश्चित रूप से प्रेरित होते हैं।

नवीन कुमार दीक्षित ने इस गतिविधि को केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने बच्चों को समझाया कि लोकतंत्र सिर्फ वोट देने भर का नाम नहीं है, बल्कि यह एक जीवन शैली है—जहाँ हर नागरिक समाज, राष्ट्र और भविष्य के प्रति जागरूक होता है। बच्चों ने पूरे मन से सीखा कि मतदान एक अधिकार ही नहीं, बल्कि सबसे बड़ा दायित्व भी है।

मतदाता जागरूकता अभियान को पतंगों से जोड़ने के पीछे एक गहरा संदेश छिपा था। पतंग ऊँचाई पर उड़ती है, ठीक उसी प्रकार लोकतंत्र को भी तभी ऊँचाई मिलती है जब हम अपनी सोच और समझ को ऊपर उठाते हैं। रंग-बिरंगी पतंगें विविधता का प्रतीक थीं—संस्कृति, समाज, भाषा, विचार—सब कुछ अलग होते हुए भी एक डोर से बंधे हुए। यह डोर लोकतंत्र की ही तरह सबको जोड़कर रखती है।

नवीन कुमार दीक्षित ने बच्चों को समझाया कि जिस तरह पतंग आसमान में उड़ने के लिए सही दिशा, तकनीक और धैर्य की मांग करती है, उसी तरह लोकतंत्र को भी ईमानदारी, कर्तव्यपरायणता और जागरूक नागरिकों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र की रक्षा केवल सैनिकों का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक पोस्टर बनाए, नारे लिखे और गीत भी प्रस्तुत किए। पूरे विद्यालय में एक उत्सव जैसा माहौल बना रहा। अनेक अभिभावक भी इस कार्यक्रम का साक्षी बने। उन्होंने देखा कि कैसे उनका बच्चा केवल शिक्षा ही नहीं ले रहा, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रक्रिया से भी गुजर रहा है।

शिक्षक नवीन कुमार दीक्षित की यह पहल केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक प्रेरक संदेश है कि लोकतंत्र की सुरक्षा बच्चों के मन में बचपन से ही रोपित की जानी चाहिए। आज जो बच्चा लोकतंत्र के बारे में सीख रहा है, वही कल एक जागरूक मतदाता बनेगा, और वह मतदाता देश के भविष्य का निर्णायक होगा।

विद्यालय की यह गतिविधि अन्य शिक्षकों और विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। बच्चों के माध्यम से दिया गया संदेश वयस्कों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुँचता है क्योंकि बच्चों की आवाज में मासूमियत के साथ सच्चाई भी होती है।

अंत में, यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि नवीन कुमार दीक्षित का यह प्रयास केवल विद्यालय तक सीमित नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र को नई दिशा देने वाला आंदोलन बन चुका है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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