CSA Kanpur :कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी ?

CSA Kanpur : कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी

CSA Kanpur :कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी ?
CSA Kanpur :कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी ?
कानपुर: किसानों की आय बढ़ाने और खेती के लिए नए विकल्प देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. कानपुर के चंद्रशेखर आज़ाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के फार्मिंग एरिया में मोटे अनाज की नौ फसलें लहलहाने लगी हैं. वैज्ञानिकों और छात्रों ने जब इन फसलों को खेत में अच्छी पैदावार के साथ देखा तो उनकी मेहनत रंग लाने लगी. खास बात यह रही कि कुछ प्रजातियों में सामान्य समय से पहले ही बेहतरीन उत्पादन दिखाई दिया. अब उत्तर प्रदेश सरकार की योजना है कि इन फसलों को प्रदेशभर के किसानों तक पहुंचाया जाए ताकि उनकी खेती शुरू हो सके. इससे किसानों को न केवल नया विकल्प मिलेगा बल्कि मोटे अनाज की बढ़ती विदेशी मांग को देखते हुए उन्हें अतिरिक्त आय भी हो सकेगी.
मिलेट्स रिवाइवल प्रोजेक्ट से शुरू हुआ सफर
इस शोध कार्य को लेकर सीएसए विवि की सहायक प्रोफेसर डॉ. श्वेता यादव ने बताया कि करीब दो साल पहले विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश शासन से मिलेट्स रिवाइवल प्रोजेक्ट मिला था. इस प्रोजेक्ट के तहत नौ प्रकार की मोटे अनाज वाली फसलें- रागी, कंगनी, कोदो, सांवा, चीना, कुतकी, ज्वार, बाजरा और ब्राउनटॉप के जर्मप्लाज्म मंगाकर खेत में लगाए गए. परिणाम हैरान करने वाले थे. उदाहरण के तौर पर, रागी की फसल ने सिर्फ 60 दिनों में 8 से 10 लाइनें दे दीं जबकि सामान्यत: इसमें ज्यादा समय लगता है. सांवा में भी कम समय में बेहतर उत्पादन मिला.

वैज्ञानिकों ने पाया कि इन सभी मोटे अनाज में पोषक तत्वों की मात्रा काफी अधिक है. प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स से भरपूर ये अनाज न केवल सेहत के लिए फायदेमंद हैं बल्कि बदलते मौसम में भी आसानी से उग जाते हैं. डॉ. श्वेता ने बताया कि वैसे तो प्रोजेक्ट 2027 तक चलना है, लेकिन शुरुआती नतीजे इतने अच्छे आए हैं कि उनकी जानकारी तुरंत शासन को दी गई. आने वाले दिनों में किसानों तक इनके बीज पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.
कृषि मंत्री ने किया निरीक्षण
कुछ दिन पहले राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी सीएसए विश्वविद्यालय पहुंचे और इन फसलों को खेत में देखा. उन्होंने कुलपति डॉ. आनंद सिंह और टीम की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि इन फसलों की खेती प्रदेश के सभी जिलों में शुरू कराई जानी चाहिए. उनका कहना था कि मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ने से किसानों को तो फायदा होगा ही, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.

डॉ. श्वेता ने बताया कि यह शोध केवल किसानों तक बीज पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा मकसद छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज देना भी है. विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स विभाग के पांच छात्रों ने इन प्रजातियों को तैयार करने और उनकी देखरेख में अहम भूमिका निभाई. छात्रों को रिसर्च के साथ-साथ प्रयोगात्मक जानकारी भी मिली, जिससे भविष्य में वे और बेहतर तकनीक किसानों तक पहुंचा सकेंगे.

CSA Kanpur :कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी ?
CSA Kanpur :कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी ?
एक साल में किसानों तक पहुंचेंगे बीज
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक्रीसेट और आईआईएमआर हैदराबाद से बीज लाए गए थे. जब इन्हें सीएसए के खेतों में लगाया गया तो नतीजे उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छे निकले. सामान्य तौर पर जो फसलें 90 दिनों में तैयार होती थीं, वे 60 दिनों में ही पक गईं. अब सरकार की योजना है कि अगले एक साल के भीतर इन प्रजातियों को आधिकारिक तौर पर रिलीज किया जाए ताकि किसानों को इनके बीज मिल सकें.

यह कदम किसानों के लिए बड़ी राहत साबित होगा क्योंकि मोटे अनाज की खेती आसान है. इन पर कीटों का प्रकोप कम होता है और यह कम पानी में भी उग जाते हैं. खासतौर पर छोटे और सीमांत किसान जिनके पास संसाधन सीमित होते हैं. उनके लिए यह फसलें बेहतर विकल्प बन सकती हैं.
कौन-कौन सी फसलें लगाई गईं
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत जिन नौ फसलों की खेती की गई, उनमें ज्वार (सोरगम), बाजरा (पर्ल मिलेट), रागी (फिंगर मिलेट), कंगनी (फॉक्सटेल मिलेट), कुतकी (लिटिल मिलेट), सांवा (बार्नयार्ड मिलेट), चीना (प्रोसो मिलेट), कोदो मिलेट और ब्राउनटॉप मिलेट शामिल हैं. ये सभी प्रजातियां पोषण से भरपूर हैं और भारत ही नहीं, विदेशों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है
.किसानों की आय में होगा इजाफा
सीएसए विवि के इस शोध से यूपी के किसानों के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं. मोटे अनाज की खेती से उन्हें न केवल बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी बढ़ती मांग का सीधा फायदा भी होगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आने वाले वर्षों में इन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर शुरू हुई तो यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगा

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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