CSA Kanpur : कानपुर के सीएसए में लहलहा उठीं मोटे अनाज की 9 फसलें, किसानों की आमदनी होगी दुगनी

इस शोध कार्य को लेकर सीएसए विवि की सहायक प्रोफेसर डॉ. श्वेता यादव ने बताया कि करीब दो साल पहले विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश शासन से मिलेट्स रिवाइवल प्रोजेक्ट मिला था. इस प्रोजेक्ट के तहत नौ प्रकार की मोटे अनाज वाली फसलें- रागी, कंगनी, कोदो, सांवा, चीना, कुतकी, ज्वार, बाजरा और ब्राउनटॉप के जर्मप्लाज्म मंगाकर खेत में लगाए गए. परिणाम हैरान करने वाले थे. उदाहरण के तौर पर, रागी की फसल ने सिर्फ 60 दिनों में 8 से 10 लाइनें दे दीं जबकि सामान्यत: इसमें ज्यादा समय लगता है. सांवा में भी कम समय में बेहतर उत्पादन मिला.
कुछ दिन पहले राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही भी सीएसए विश्वविद्यालय पहुंचे और इन फसलों को खेत में देखा. उन्होंने कुलपति डॉ. आनंद सिंह और टीम की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि इन फसलों की खेती प्रदेश के सभी जिलों में शुरू कराई जानी चाहिए. उनका कहना था कि मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ने से किसानों को तो फायदा होगा ही, साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
डॉ. श्वेता ने बताया कि यह शोध केवल किसानों तक बीज पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका एक बड़ा मकसद छात्रों को प्रैक्टिकल नॉलेज देना भी है. विश्वविद्यालय के जेनेटिक्स विभाग के पांच छात्रों ने इन प्रजातियों को तैयार करने और उनकी देखरेख में अहम भूमिका निभाई. छात्रों को रिसर्च के साथ-साथ प्रयोगात्मक जानकारी भी मिली, जिससे भविष्य में वे और बेहतर तकनीक किसानों तक पहुंचा सकेंगे.

शोधकर्ताओं ने बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक्रीसेट और आईआईएमआर हैदराबाद से बीज लाए गए थे. जब इन्हें सीएसए के खेतों में लगाया गया तो नतीजे उम्मीद से कहीं ज्यादा अच्छे निकले. सामान्य तौर पर जो फसलें 90 दिनों में तैयार होती थीं, वे 60 दिनों में ही पक गईं. अब सरकार की योजना है कि अगले एक साल के भीतर इन प्रजातियों को आधिकारिक तौर पर रिलीज किया जाए ताकि किसानों को इनके बीज मिल सकें.
इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत जिन नौ फसलों की खेती की गई, उनमें ज्वार (सोरगम), बाजरा (पर्ल मिलेट), रागी (फिंगर मिलेट), कंगनी (फॉक्सटेल मिलेट), कुतकी (लिटिल मिलेट), सांवा (बार्नयार्ड मिलेट), चीना (प्रोसो मिलेट), कोदो मिलेट और ब्राउनटॉप मिलेट शामिल हैं. ये सभी प्रजातियां पोषण से भरपूर हैं और भारत ही नहीं, विदेशों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है
सीएसए विवि के इस शोध से यूपी के किसानों के लिए नई संभावनाएं खुल रही हैं. मोटे अनाज की खेती से उन्हें न केवल बाजार में अच्छी कीमत मिलेगी बल्कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी बढ़ती मांग का सीधा फायदा भी होगा. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आने वाले वर्षों में इन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर शुरू हुई तो यह किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक ठोस कदम साबित होगा
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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