Historical text : वाजपेयी के नेतृत्व में लिखी गई थी ऐतिहासिक इबारत, राजस्थान की तपती रेत पर धमाके की गूंज से दुनिया थी हैरान

Historical text : वाजपेयी के नेतृत्व में लिखी गई थी ऐतिहासिक इबारत, राजस्थान की तपती रेत पर धमाके की गूंज से दुनिया थी हैरान ?
राजस्थान के पोखरण में 11 मई 1998 को एक नई इबारत लिखी गई.
- भारत ने वो साहसिक कदम उठाया, जिसकी कल्पना तो वर्षों से थी. उस दिन दोपहर के ठीक 3 बजकर 45 मिनट पर भारत ने परमाणु परीक्षण करते हुए पहला बम फोड़ दिया था. इस परीक्षण ने भारत को परमाणु प्रतिरोध (Nuclear deterrence) दिया. रेगिस्तान की तपती रेत के नीचे इतिहास करवट ले रहा था और भारत ने दुनिया को स्पष्ट संदेश दिया कि हम अपनी सुरक्षा के लिए किसी पर निर्भर नहीं है. संदेश था कि भारत किसी भी आक्रामकता का माकूल जवाब देने में सक्षम है. यह सबकुछ हुआ तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में, जब भारत ने सामरिक आत्मनिर्भरता की नई इबारत गढ़ी.
यह परमाणु परीक्षण आसान नहीं था.
- बिना किसी विदेशी सहयोग और अंतरराष्ट्रीय दवाब के अलावा खास तौर पर अमेरिका की कड़ी निगरानी भी थी. बावजूद इसके भारत ने परमाणु परीक्षण को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. क्योंकि परमाणु संपन्न राष्ट्र उन देश हमेशा उन राष्ट्रों पर पैनी नजर रखते थे, जिनके पास परमाणु हथियार नहीं थे. भारत भी इस लिस्ट में शामिल था. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व क्षमता में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की.

जब ऐन वक्त पर रोकना पड़ा था टेस्ट
- वाजपेयी ने 1998 के परमाणु परीक्षण के वक्त आलोचना और दवाब भी झेला. एक बार परीक्षण करने के लिए गड्ढा तक खोदा जा चुका था और सुरंग तैयार हो चुकी थी. यहां तक कि परीक्षण की तारीख भी तय हो गई थी, लेकिन विदेशी दवाब के चलते ऐन वक्त पर परीक्षण रद्द कर दिया गया था. 13 दिनों तक प्रधानमंत्री रहने के दौरान, उन्हें एहसास हुआ कि इतने जरूरी टेस्ट को अच्छे से करने के लिए ज्यादा समय नहीं है. जब वे 18 मार्च 1998 को सत्ता में वापस आए तो उन्होंने वैज्ञानिकों को इसके लिए हरी झंडी दे दी.
नरसिम्हा राव ने वाजपेयी से कहा था- सामग्री तैयार है
- 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार 13 पार्टियों की मिली-जुली सरकार थी. शपथ ग्रहण के कुछ दिनों बाद पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से एक मुलाकात की और कहा था कि सामग्री तैयार है, आप आगे बढ़ सकते हैं. संसद में अपनी ताकत दिखाने के लगभग पखवाड़े के बाद ही वाजपेयी ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम और डॉ. राजगोपाला चिदंबरम को बुलाकर तैयारी शुरू करने के निर्देश दिए थे. एपीजे अब्दुल कलाम ने सलाह दी थी कि परीक्षण बुद्ध पूर्णिमा के दिन किया जाए, जो 11 मई 1998 को पड़ रही थी
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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