Due to the cold wave : यूपी में शीतलहर के कारण 29 दिसंबर से 1 जनवरी तक सभी स्कूल बंद रहे

उत्तर प्रदेश में बढ़ती ठंड और शीतलहर के मद्देनजर राज्य सरकार ने छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। लखनऊ सहित राज्य के सभी जिलों में शीतलहर की संभावना को देखते हुए सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को 29 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक बंद रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। यह आदेश नर्सरी से लेकर बारहवीं कक्षा तक के सभी विद्यालयों पर लागू होगा। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को ठंड के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाना और उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।
इस संबंध में जिला अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी विद्यालय इस अवधि में बंद रहेंगे और किसी भी कारणवश छात्रों को स्कूल बुलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि इस अवधि में किसी भी प्रकार की गतिविधियां आयोजित न की जाएं, ताकि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह कदम विशेष रूप से शीतलहर के समय स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं जैसे सर्दी, खाँसी, बुखार और अन्य शीतजनित रोगों के फैलाव को रोकने के लिए उठाया गया है।
राज्य सरकार ने सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे माता-पिता और छात्रों को इस निर्णय के बारे में समय पर सूचित करें। साथ ही, इस दौरान स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की गतिविधियों के लिए अनुमति न दी जाए और शिक्षकों और कर्मचारियों को भी आवश्यक निर्देश दिए जाएं। जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के मद्देनजर लिया गया है और सभी स्कूल प्रशासन को इसका पालन करना अनिवार्य है।
विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ठंड अधिक प्रभाव डालती है और बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन की सुविधा सीमित होती है, यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण है। कई बच्चों को स्कूल आने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है, और सर्द मौसम में यह यात्रा स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकती है। ऐसे में स्कूल बंद रहने से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और माता-पिता की चिंता कम होती है।
इसके अलावा, यह कदम शिक्षक और स्कूल स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। शीतलहर के समय लंबे समय तक बाहर रहने या यात्रा करने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। स्कूल बंद रहने से सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को सुरक्षित रखने में भी मदद मिलेगी।
शीतलहर को देखते हुए जिला प्रशासन ने कई अन्य उपाय भी सुझाए हैं। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे रैन बसेरों, अलाव और कंबल की व्यवस्था सुनिश्चित करें ताकि जिन बच्चों और नागरिकों को घर में पर्याप्त गर्मी नहीं मिल पा रही है, उन्हें राहत पहुंचाई जा सके। प्रशासन ने यह भी कहा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि लोग ठंड के दौरान सावधान रहें और सुरक्षित रहें।
इस निर्णय का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बच्चों की पढ़ाई और शैक्षिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव को कम से कम रखा जाए। शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि स्कूल बंद रहने की अवधि के दौरान छात्रों को घर पर पढ़ाई के लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहायता प्रदान की जाए। डिजिटल माध्यमों, ऑनलाइन क्लासेज और होमवर्क के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई में पीछे न होने दिया जाएगा।

सामाजिक दृष्टि से भी यह कदम आवश्यक है। शीतलहर के दौरान बच्चों को घर में रहना और सुरक्षित रहना उनके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। ठंड में लंबे समय तक बाहर रहने से बच्चों में सर्दी-जुकाम, निमोनिया और अन्य शीतजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए सरकार ने समय रहते यह निर्णय लिया है।
इस दौरान माता-पिता को भी सलाह दी गई है कि वे बच्चों को गर्म कपड़े पहनाएं, पर्याप्त पौष्टिक भोजन दें और उन्हें ठंड के समय बाहर खेलने या यात्रा करने से रोकें। सरकारी और निजी विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे इस विषय में माता-पिता और समुदाय को जागरूक करने के लिए संदेश और नोटिस जारी करें।
उत्तर प्रदेश में शीतलहर और सर्द मौसम के दौरान इस प्रकार के कदम लेने का लक्ष्य केवल शैक्षिक गतिविधियों को रोकना नहीं है, बल्कि बच्चों, शिक्षकों और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार ने इस दिशा में हर संभव उपाय किए हैं और जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे स्थिति की निगरानी करें और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त उपाय करें।
इसके अलावा, शीतलहर के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने भी विशेष अलर्ट जारी किया है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ठंड के कारण होने वाली बीमारियों के लिए तैयारी रखें। शिशु, बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना आवश्यक है।
इस पूरे निर्णय से यह संदेश भी मिलता है कि सरकार बच्चों और नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में समन्वित प्रयासों के माध्यम से ठंड के दौरान किसी भी प्रकार की आपात स्थिति से निपटना आसान होता है।
अंततः, यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की जिम्मेदार और सतर्क प्रशासनिक नीति का उदाहरण है। स्कूलों को 29 दिसंबर से 1 जनवरी तक बंद करने का निर्णय छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक था। इस निर्णय के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि बच्चों को शीतलहर से सुरक्षा मिले, माता-पिता और स्कूल प्रशासन समय पर सतर्क रहें और ठंड के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
इस प्रकार, राज्य सरकार का यह निर्णय बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा की निरंतरता और प्रशासनिक सतर्कता का एक समग्र उदाहरण प्रस्तुत करता है। ठंड के दौरान सभी जनपदों में स्कूल बंद रखने, कंबल और अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने और रैन बसेरों में सुविधाएं उपलब्ध कराने के उपाय राज्य के नागरिकों के लिए राहत और सुरक्षा की गारंटी हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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