Bharadwaj suspended : नाबालिग महिला शूटर से यौन शोषण का आरोप, राष्ट्रीय पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज निलंबि

भारतीय खेल जगत को शर्मसार करने वाला एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली 17 वर्षीय महिला निशानेबाज ने राष्ट्रीय पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज पर यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी कोच के विरुद्ध POCSO अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। वहीं भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने तत्काल प्रभाव से अंकुश भारद्वाज को निलंबित कर दिया है।
यह मामला सामने आते ही खेल जगत में हड़कंप मच गया है। जिस कोच पर देश के युवा खिलाड़ियों को सुरक्षित वातावरण, अनुशासन और खेल के मूल्यों की शिक्षा देने की जिम्मेदारी थी, उसी पर नाबालिग खिलाड़ी के शोषण का आरोप लगना बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है।
क्या है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता एक 17 वर्षीय राष्ट्रीय स्तर की महिला पिस्टल शूटर है, जो प्रशिक्षण के दौरान राष्ट्रीय पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज के संपर्क में आई थी। आरोप है कि कोच ने अपने पद और भरोसे का दुरुपयोग करते हुए नाबालिग खिलाड़ी का यौन शोषण किया। पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए यह मामला POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) Act के अंतर्गत दर्ज किया गया है, जो कि एक सख्त कानून है। इस कानून के तहत दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कठोर सजा का प्रावधान है।
NRAI की त्वरित कार्रवाई
मामले के प्रकाश में आते ही भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने त्वरित कदम उठाते हुए राष्ट्रीय पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। NRAI ने अपने बयान में कहा कि वह खिलाड़ियों की सुरक्षा, गरिमा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है और इस तरह के आरोपों को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और सच्चाई सामने नहीं आ जाती, तब तक आरोपी कोच किसी भी प्रकार की कोचिंग, प्रशिक्षण या आधिकारिक गतिविधियों में शामिल नहीं रहेंगे। साथ ही, NRAI ने जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग देने की बात कही है।

खेल जगत में आक्रोश
इस घटना के बाद खेल जगत में गुस्से और चिंता का माहौल है। कई पूर्व खिलाड़ियों, कोचों और खेल विशेषज्ञों ने इस मामले को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों का खेल प्रणाली पर भरोसा कमजोर होता है। सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं और दोषी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं।
महिला खिलाड़ियों से जुड़े संगठनों और बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने कहा है कि यह घटना दर्शाती है कि खेल संस्थानों में आंतरिक निगरानी तंत्र और शिकायत निवारण प्रणाली को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की कि सभी खेल संघों में POSH और POCSO से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम अनिवार्य किए जाएं।
पीड़िता की सुरक्षा और काउंसलिंग की मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में केवल आरोपी पर कार्रवाई ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़िता की मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। महिला अधिकार संगठनों ने मांग की है कि पीड़िता को गोपनीयता, काउंसलिंग और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सके।
POCSO मामलों में पीड़ित की पहचान उजागर करना कानूनन अपराध है, इसलिए प्रशासन और मीडिया से भी संवेदनशीलता बरतने की अपील की जा रही है।
खेल संस्थानों पर उठे सवाल
यह मामला एक बार फिर भारतीय खेल व्यवस्था में कोच-खिलाड़ी संबंधों, पावर बैलेंस और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर युवा और नाबालिग खिलाड़ी अपने करियर के डर से या दबाव में शिकायत दर्ज नहीं करा पाते। ऐसे में खेल संस्थानों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाएं।
कुछ लोगों ने मांग की है कि सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कोचों का समय-समय पर मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन और आचरण ऑडिट किया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
कानून अपना काम करेगा
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामला गंभीर है और सभी तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। पीड़िता के बयान, उपलब्ध साक्ष्य और अन्य पहलुओं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। POCSO कानून के तहत मामले को फास्ट ट्रैक आधार पर निपटाने का भी प्रावधान है।
निष्कर्ष
राष्ट्रीय पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज पर लगे यौन शोषण के आरोप न केवल एक व्यक्ति पर सवाल खड़े करते हैं, बल्कि पूरे खेल तंत्र की जवाबदेही को भी सामने लाते हैं। यह घटना एक चेतावनी है कि खेल के नाम पर किसी भी प्रकार का शोषण स्वीकार्य नहीं है। खिलाड़ियों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकार सर्वोपरि हैं और दोषी चाहे कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो, उसे कानून के अनुसार सजा मिलनी चाहिए।
अब सभी की निगाहें जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं, ताकि पीड़िता को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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