Unity creation message : श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था के नववर्ष कवि सम्मेलन ने दिया एकता सृजन संदेश

नववर्ष के शुभ अवसर पर साहित्य, संस्कृति और सृजन की त्रिवेणी को साकार करते हुए श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्या धाम के तत्वाधान में एक भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, एकता और सकारात्मक सोच का भी सशक्त संदेश लेकर आया। “नया वर्ष लाया नया संदेशा” की भावना को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम ने उपस्थित श्रोताओं और साहित्यप्रेमियों के मन को गहराई से स्पर्श किया।
श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्याधाम, अंबेडकरनगर इकाई द्वारा नए वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस विशाल अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रख्यात कवि, कवयित्रियां, गीतकार, ग़ज़लकार और शायरों ने भाग लिया। कार्यक्रम स्थल पर साहित्यिक वातावरण, भावनाओं की गरिमा और शब्दों की शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंच को देश के जाने-माने वरिष्ठ कवि अशोक गोयल “चक्रवर्ती” ने कार्यक्रमाध्यक्ष के रूप में सुशोभित किया, जबकि राष्ट्रीय प्रभारी कवयित्री बीना गोयल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत भक्तिमय वातावरण में हुई। वरिष्ठ गीतकार सुनीलानन्द ने वीणावादिनी माँ सरस्वती की सुंदर वंदना प्रस्तुत कर काव्य संध्या का शुभारंभ किया। उनकी वाणी से निकले मधुर शब्दों ने श्रोताओं को एक आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की और पूरे सभागार को साहित्यिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद मंच पर एक के बाद एक रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का पाठ कर समा बांध दिया।
कवि सम्मेलन का संचालन सुप्रसिद्ध कवि रामवृक्ष बहादुरपुरी ने किया, जिनकी सधी हुई शैली, सहज संवाद और साहित्यिक समझ ने पूरे कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की। संचालन के दौरान उन्होंने कवियों का परिचय भी प्रभावशाली ढंग से कराया, जिससे श्रोताओं को रचनाकारों की पृष्ठभूमि और रचनात्मक यात्रा से परिचित होने का अवसर मिला।
कार्यक्रमाध्यक्ष वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार अशोक गोयल “चक्रवर्ती” ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में साहित्य की सामाजिक भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कविता केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति है। उन्होंने नए वर्ष में साहित्यकारों से आग्रह किया कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव, एकता और मानवीय मूल्यों को और अधिक मजबूत करें। उनके विचारों ने उपस्थित कवियों और श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
इस अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में भाग लेने वाले साहित्यकारों ने अपनी विविध विधाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। डॉ. अम्बे कुमारी (बोधगया, बिहार) ने अपनी संवेदनशील कविताओं से सामाजिक यथार्थ को उजागर किया। राजस्थान से आए वरिष्ठ गीतकार सुनीलानन्द ने अपने गीतों में भारतीय संस्कृति और परंपरा की सुगंध बिखेरी। हरियाणा से डॉ. ऋचा शर्मा श्रेष्ठा की कविताओं में नारी चेतना और आत्मविश्वास की झलक स्पष्ट दिखाई दी।

हिमाचल प्रदेश से पधारे डॉ. पी.सी. कौंडल ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रकृति, जीवन और दर्शन को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। कवयित्री सपना अग्रवाल और गाजियाबाद से आईं कवयित्री सुनीता छाबड़ा ने अपनी सशक्त अभिव्यक्ति से श्रोताओं को भावुक कर दिया। कवयित्री वीना गोयल की रचनाओं में सामाजिक सरोकार और सकारात्मक दृष्टिकोण का सुंदर समावेश देखने को मिला।
कवि तुलाराम निर्वाण ने अपनी ओजस्वी रचनाओं से सभागार में ऊर्जा का संचार किया, वहीं राजस्थान से आए हास्य एवं व्यंग्य कवि ओम प्रकाश कुंतल ने अपनी व्यंग्यात्मक प्रस्तुतियों से श्रोताओं को हँसी से लोटपोट कर दिया। उनकी रचनाओं में हास्य के साथ-साथ सामाजिक कटाक्ष भी मौजूद था, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान एक बात स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई कि साहित्य आज भी समाज को जोड़ने और दिशा देने की क्षमता रखता है। कवियों ने अपने शब्दों के माध्यम से यह संदेश दिया कि नए वर्ष में हमें पुराने वैमनस्य भूलकर एकता, प्रेम और भाईचारे के साथ आगे बढ़ना चाहिए। कविताओं में राष्ट्रप्रेम, मानवीय संवेदनाएं, सामाजिक जिम्मेदारी और आशा का स्वर प्रमुखता से सुनाई दिया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यक्रमाध्यक्ष अशोक गोयल “चक्रवर्ती” और संचालक रामवृक्ष बहादुरपुरी ने सभी उपस्थित साहित्यकारों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से साहित्य को नई ऊर्जा मिलती है और नई पीढ़ी को रचनात्मक सोच की प्रेरणा मिलती है। धन्यवाद ज्ञापन के साथ इस भव्य काव्य संध्या का समापन किया गया।
कुल मिलाकर, श्रीराम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्या धाम के तत्वाधान में आयोजित यह नववर्ष काव्य संध्या एक यादगार साहित्यिक आयोजन साबित हुई। इसने न केवल नए वर्ष का स्वागत साहित्यिक गरिमा के साथ किया, बल्कि समाज को एक सकारात्मक, सृजनात्मक और एकजुट संदेश भी दिया, जो लंबे समय तक लोगों के मन में गूंजता रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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