The soldier was injured in the encounter : जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ सोनार में ऑपरेशन त्राशी-1 जारी, मुठभेड़ में जवान घायल, 3 एयरलिफ्

जम्मू‑कश्मीर: किश्तवाड़ में आतंकी मुठभेड़, जवान घायल
रविवार, 18 जनवरी 2026 को जम्मू‑कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच गंभीर मुठभेड़ की खबर मिली है। यह मुठभेड़ सोनार इलाके में हुई, जो क्षेत्र के ऊपरी वनाच्छादित क्षेत्रों में स्थित है। अधिकारियों के अनुसार यह मुठभेड़ “ऑपरेशन त्राशी‑1” के तहत चलाए जा रहे तलाशी अभियान के दौरान शुरू हुई, जिसमें आतंकियों के होने के इन्पुट मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी और तलाशी शुरू की थी।
⚔️ मुठभेड़ कैसे शुरू हुई?
सुरक्षा बलों ने स्थानीय खुफिया इनपुट के आधार पर सोनार क्षेत्र में कोर्डन और सर्च ऑपरेशन (CASO) शुरू किया। जैसे ही तलाशी दल आतंकियों के संभावित ठिकानों के करीब पहुँचा, उसी समय आतंकवादियों ने पहले फायरिंग की और फिर ग्रेनेड हमला भी किया, जिससे गोलीबारी शुरू हो गई। सुरक्षा बलों ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया।
मुठभेड़ की इस शुरुआत के पीछे माना जाता है कि आतंकवादी पाकिस्तान स्थित जैश‑ए‑मोहम्मद (JeM) से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि इस बात पर नहीं हुई है कि वहां कितने आतंकी सक्रिय हैं।
🪖 जवानों की हालत: घायल और एयरलिफ्ट
घंटों चली मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों के कई जवान घायल हुए। अलग‑अलग समाचार रिपोर्टों में कुल 7 से 8 जवानों के घायल होने की जानकारी मिली है, जिनमें से औपचारिक सूत्रों ने 3 घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर उधमपुर स्थित आर्मी बेस अस्पताल ले जाने की पुष्टी की है।
घायलों को प्राथमिक रूप से मौके पर प्रदान किए गए प्राथमिक चिकित्सा के बाद उच्च चिकित्सा सहायता के लिए तुरंत स्थानांतरित किया गया। गंभीर रूप से घायल जवानों को हेलीकॉप्टर के जरिए निकटतम सैन्य अस्पताल तक पहुँचाया गया, ताकि उनका इलाज अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
हालांकि वर्तमान रिपोर्ट यह पुष्टि नहीं करती कि घायल जवानों में से किसी की स्थिति गंभीर है या नहीं, परंतु एयरलिफ्ट की प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि कुछ घायलों की हालत को संजीदा माना गया।
🪪 ऑपरेशन त्राशी‑1: लंबा अभियान
इस मुठभेड़ को सेना ने “ऑपरेशन त्राशी‑1” नाम दिया है, जिसे जम्मू स्थित व्हाइट नाइट कोर और जम्मू‑कश्मीर पुलिस के संयुक्त प्रयास से चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य इलाके में सक्रिय आतंकियों को ढूँढकर खत्म करना और नागरिकों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ऑपरेशन में सेना के अतिरिक्त बलों के साथ सीआरपीएफ (CRPF) और स्थानीय पुलिस भी शामिल हैं, और पूरे इलाके में ड्रोन निगरानी, स्निफर डॉग्स (घूँघट डॉग्स) तथा तकनीकी साधनों का उपयोग किया जा रहा है। यह रणनीति आतंकियों को घेरने और उनकी हरकतों को सीमित करने के लिए लागू की गई है।

📍 अन्य रणनीतिक तत्व
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ड्रोन और ऊँचे निगरानी उपकरण क्षेत्र में सक्रिय हैं ताकि आतंकियों की चालों पर नजर रखी जा सके।
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स्निफर डॉग्स को मुठभेड़ के संभावित नुक्कड़ और जंगल के मार्गों में घुसने के लिए लगाया गया है।
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सुरक्षा बलों ने इलाके के घने जंगल और ऊपरी पठारों में आतंकियों के भागने के रास्तों को सील करने के लिए अतिरिक्त जवान तैनात किए हैं।
ये सभी उपाय यह संकेत देते हैं कि ऑपरेशन अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और सुरक्षा बल आतंकियों के ठिकानों के खिलाफ दबाव बनाए हुए हैं।
⚠️ पिछले एनकाउंटरों का संदर्भ
जम्मू‑कश्मीर में इस तरह की घटनाएँ पहले भी सामने आई हैं, और इस साल 2026 की शुरुआत में भी कई मुठभेड़ हो चुकी हैं, जिनमें सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच संघर्ष जारी रहा है। यह सिलसिला गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व के पहले और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जबकि सीमा सुरक्षा और आतंकी हलकों के गतिविधियों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
🏞️ क्षेत्रगत चुनौतियाँ और सुरक्षा समीक्षा
किश्तवाड़ का इलाका वनाच्छादित पहाड़ी और दुर्गम है, जो आतंकियों के लिए संभावित पनाह‑स्थलों का काम कर सकता है। ऐसी भौगोलिक संरचना सुरक्षा बलों के लिए कठिन चुनौतियाँ पैदा करती है।
विश्लेषकों का मानना है कि
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घने जंगलों में आतंकी ढेरों की मौजूदगी को रोकना,
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स्थानीय खुफिया तंत्र को और मजबूत करना,
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सीमा में गश्त बढ़ाना,
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और स्थानीय सुरक्षा नेटवर्क को और प्रभावी बनाना,
जैसी रणनीतियाँ आतंकवादी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए आवश्यक हैं।
🧭 स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका
सुरक्षा बलों के अलावा स्थानीय प्रशासन, नागरिक प्रशासन, और जम्मू‑कश्मीर पुलिस भी ऑपरेशन में शामिल हैं। यह समन्वय आतंकियों के खिलाफ समग्र दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
हालांकि व्यापक जानकारी अभी सामने नहीं आई कि इन आतंकियों का लक्ष्य क्या था या वे किस स्तर पर सक्रिय थे, परंतु यह स्पष्ट है कि यह अभियान आतंकवाद‑रोकथाम की दिशा में लंबी और जटिल कोशिशों का हिस्सा है।
🧠 निष्कर्ष
जम्मू‑कश्मीर के किश्तवाड़ में Sunday (18 January) से जारी मुठभेड़ ‘ऑपरेशन त्राशी‑1’ के तहत एक गंभीर आतंकवादी संघर्ष के रूप में सामने आया है। इसमें सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच घंटों तक फायरिंग रही, जिसके फलस्वरूप कई जवान घायल हुए और लाखों सुरक्षा संसाधनों को मोर्चे पर लगाया गया।
कम से कम 3 गंभीर रूप से घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर अस्पताल भेजा गया, जबकि ऑपरेशन अभी भी जारी है और आतंकियों की तलाश और निवारण के लिए तकनीकी और सामरिक मदद अतिरिक्त रूप से जारी है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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