A direct threat to security : उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में अनुभवहीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा

लखनऊ —
- उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) में अनुभवहीन भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारियों की टेम्पररी डेपुटेशन अब सिर्फ बिजली विभाग की समस्या नहीं रही— बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी है। ये अधिकारी सामान्य प्रशासन के लिए ट्रेण्ड हुए हैं, लेकिन UPPCL जैसे जटिल तकनीकी विभाग (ट्रांसमिशन, वितरण, फॉल्ट मेंटेनेंस, स्मार्ट मीटर, सेफ्टी प्रोटोकॉल) में उनकी अनुभवहीनता ने पूरे तंत्र को अराजकता में धकेल दिया है।
- नवंबर 2025 से लागू वर्टिकल/फेसलेस व्यवस्था का दावा था पारदर्शिता और तेज सेवा, लेकिन हकीकत उलटी है: छोटे-छोटे काम MD/अध्यक्ष स्तर तक पहुंच जाते हैं, फील्ड में कोई जिम्मेदार नहीं, फॉल्ट सही करने,स्थाई विच्छेदन (PD) आदि कार्यों में महीनों की देरी होगी। जनवरी 2026 तक 13,210+ शिकायतें लंबित , नए कनेक्शन/बिलिंग/पी डी आदि कार्यों हेतु उपभोक्ता चारों जोनो (गोमती नगर, सेंट्रल, अमौसी, जानकीपुरम) में भटकते रहते हैं। गोमती नगर जोन में P D के 137 आवेदनों में सिर्फ 37 निपटे—बाकी फंसे हुए।
- पुरानी LESA व्यवस्था में एक मुख्य अभियंता (CE Level-1) के अधीन 10 अधीक्षण अभियंता (SE), उनके नीचे 35+ एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE),70+ उपखण्ड अधिकारी (SDO),150+ जूनियर इंजीनियर (JE) और फील्ड टीम से निर्णय, लोकल स्तर पर तेज होते थे तब मीटिंग्स कम, दुर्घटनाएं कम, ज्ञान व अनुभव हस्तांतरित होता था। लेकिन अब अनुभवहीन IAS टेम्पररी डेपुटेशन पर प्रबंध निदेशक/अध्यक्ष बनकर VC/मीटिंग्स में दिन बर्बाद करते हैं, फील्ड ठप है। 2004 सुप्रीम कोर्ट एफिडेविट और मेमोरेंडम ऑफ आर्टिकल्स में स्पष्ट है
- —IAS की उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में पोस्टिंग टेम्पररी है, परमानेंट नहीं; मुख्य अभियंता से ही डायरेक्टर/ प्रबंध निदेशक / चेयरमैन बनने की व्यवस्था है। फिर भी IAS कब्जा जमाए हुए हैं, अनुभवहीनता से सिस्टम सूख रहा है, संविदा पर निर्भरता बढ़ रही है, और लंबे समय से जूनियर इंजीनियरों/लाइनमैन/कुली आदि की भर्ती नहीं होने से जड़ें कमजोर हो रही हैं

A direct threat to security : उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन में अनुभवहीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा
अब असली खतरा सामने है: उत्तर प्रदेश रक्षा सामग्री निर्माण का प्रमुख हब बन चुका है।
- 6 नोड्स (लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़, चित्रकूट) में ₹34,000 करोड़+ निवेश हो चुका है (रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, 9 जनवरी 2026)। ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री (लखनऊ), टैंक, मिसाइल, ड्रोन उत्पादन तेजी से चल रहा है। 2025-26 का लक्ष्य: USD 25 बिलियन प्रोडक्शन और USD 5 बिलियन एक्सपोर्ट। लेकिन अगर बिजली कटौती, फॉल्ट में देरी या स्थाई विच्छेदन के कार्यों में देरी जारी रहा , तो उत्पादन रुक जाएगा , उत्पादन लक्ष्य प्राप्त नहीं होंगे, कॉन्ट्रैक्ट्स कैंसल होंगे, निर्यात प्रभावित होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा व साख दांव पर लग जाएगी। समय पर रक्षा उपकरण न पहुंचे तो देश की ताकत कमजोर होगी।
- इन सभी कार्यकलापों से लगता है कि यह सब निजीकरण की साजिश जैसा है वैसे पुरानी LESA को खत्म कर जड़ें सूखाने की साज़िश रची गई हैं, ताकि ऊर्जा विभाग के कर्मचारी और अभियंताओं का मनोबल टूटे और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अनुभवहीन अधिकारियों को इस विभाग को उद्योगपति मित्रों के हाथों बेच कर अपना स्वार्थ सिद्ध किया जा सके ।
- वैसे 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे है और यह साजिश सफल हो जाती है यानी गर्मीयों तक अगर सिस्टम बैठ गया और उपभोक्ता गर्मी में अंधेरे में रहेते है तो विपक्षी दलों को इसका पूरा फायदा मिलेगा और दूसरी तरफ प्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री के प्रयासों से खड़ा किया गया रक्षा सामग्री निर्माण हब अगर इन नीतियों के कारण ठप पड़ जाता है तो इन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अनुभवहीन नेतृत्व का कुछ भी नहीं बिगड़ेगा बहुत ज्यादा एक विभाग से दूसरे विभाग में स्थानांतरण हो जाएगा लेकिन सरकार की बदनामी होगी, विपक्षी दल इस स्थिति का पूरा फायदा उठाएंगे और सरकार चुनाव हार सकती है और ठीकरा बिजली विभाग पर फोड़ा जाएगा ।
- जबकि असली जिम्मेदार अनुभवहीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का नेतृत्व और स्वार्थी व्यवस्था है। इस स्थिति से बचने के लिए सरकार को अनुभवी इंजीनियर्स को प्रमोट करना चाहिए, निचले स्तर पर भर्तीया निकालनी चाहिए ।इन्जीनियरों ,जूनियर इंजीनियरों ,लाइनमैन , कुली आदि की भर्तीया तुरंत शुरू करनी चाहिए संविदा कर्मियों को स्थायी बनाएंपुरानी LESA जैसी लोकल व्यवस्था बहाल करें वरना इस व्यवस्था से तो जनता के साथ साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को भी नुकसान होने की पूरी संभावना है। खैरयुद्ध अभी शेष है। आनन्द संपादक और चन्द्रशेखर सिंह प्रबंध संपादक समय का उपभोकता राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र, लखनऊ
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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