They took a dip of faith : लखनऊ एवं प्रयागराज में बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं का पुण्य स्नान: लाखों ने आस्था की डुबकी लगाई ?

They took a dip of faith : लखनऊ एवं प्रयागराज में बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं का पुण्य स्नान: लाखों ने आस्था की डुबकी लगाई

They took a dip of faith : लखनऊ एवं प्रयागराज में बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं का पुण्य स्नान: लाखों ने आस्था की डुबकी लगाई
They took a dip of faith : लखनऊ एवं प्रयागराज में बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं का पुण्य स्नान: लाखों ने आस्था की डुबकी लगाई

उत्तर प्रदेश। बसंत पंचमी का पावन पर्व इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण रहा। उत्तर भारत में बही पंचमी का दिन वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। यह दिन माँ सरस्वती की पूजा और पवित्र स्नान के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

लखनऊ और प्रयागराज में इस वर्ष बसंत पंचमी पर श्रद्धालुओं की संख्या पहले से कहीं अधिक रही। प्रयागराज में माघ मेला क्षेत्र में दोपहर 12 बजे तक करीब 2 करोड़ 10 लाख श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान हर श्रद्धालु ने न केवल अपने पापों से मुक्ति की कामना की, बल्कि अपने परिवार और समाज की खुशहाली और समृद्धि की भी प्रार्थना की।

प्रयागराज का माघ मेला: श्रद्धा और व्यवस्थापन का अद्भुत मिश्रण

प्रयागराज का माघ मेला हमेशा से ही उत्तर भारत के सबसे बड़े धार्मिक मेलों में गिना जाता है। बसंत पंचमी के अवसर पर मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा और व्यवस्थापन के उपाय किए। इस बार भी सुरक्षा बलों, पुलिस और स्वयंसेवकों की मदद से मेला क्षेत्र में प्रवेश और निकास के मार्गों को नियंत्रित किया गया।

मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खाद्य एवं पेयजल की व्यवस्था, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र और शौचालय जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं। इसके साथ ही भीड़ नियंत्रण के लिए बारिकिंग, फ्लैगमार्क और मार्गदर्शक लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंचने में मदद मिली।

आस्था और धर्म का मेल

बसंत पंचमी का दिन विशेष रूप से सरस्वती पूजन और पवित्र स्नान के लिए जाना जाता है। श्रद्धालु सुबह से ही अपने परिवार और मित्रों के साथ संगम क्षेत्र और अन्य पवित्र घाटों की ओर निकलते हैं। प्रयागराज में संगम क्षेत्र का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यहाँ गंगा, यमुना और अर्धनारीश्वर (सरस्वती) नदियों का संगम होता है। इस पवित्र संगम में स्नान करने से माना जाता है कि सभी पाप धुल जाते हैं और जीवन में सफलता और समृद्धि आती है।

लखनऊ में भी कई घाटों और मंदिरों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ घाटों पर पहुंचे और माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना की। बच्चों ने शिक्षा और विद्या की कामना के लिए सरस्वती वंदना की, तो बड़े बुजुर्ग अपने जीवन के सुख-शांति और स्वास्थ्य की प्रार्थना कर रहे थे।

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प्रशासनिक तैयारी और सुरक्षा

बसंत पंचमी और माघ मेला के दौरान प्रशासन की तैयारी हर साल किसी चुनौती से कम नहीं होती। इस वर्ष भी राज्य प्रशासन, स्थानीय पुलिस और नगर निगम ने मिलकर हर संभव इंतजाम किए।

  1. भीड़ नियंत्रण: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास के मार्गों को अलग-अलग जोन में बांटा गया।

  2. आपातकालीन सेवाएँ: प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की तैनाती हर प्रमुख घाट और मेला क्षेत्र में की गई।

  3. सुविधा केंद्र: भोजन, पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का प्रबंध सुनिश्चित किया गया।

  4. स्वच्छता अभियान: मेला क्षेत्र में स्वच्छता और कचरा प्रबंधन के लिए नगर निगम के विशेष कर्मचारी और स्वयंसेवक तैनात किए गए।

सुरक्षा बलों ने भीड़ में किसी भी प्रकार की अनुचित घटना या आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष तैयारियाँ की। इसके साथ ही ड्रोन कैमरा निगरानी और सीसीटीवी निगरानी के माध्यम से मेला क्षेत्र पर नजर रखी गई।

श्रद्धालुओं का अनुभव

श्रद्धालुओं ने इस अवसर को बेहद पवित्र और यादगार बताया। हर व्यक्ति ने अपने जीवन के पापों से मुक्ति और भविष्य की खुशहाली की कामना की। लोगों ने घाटों पर दीप जलाए, फूल चढ़ाए और माँ सरस्वती के मंत्रों का उच्चारण किया।

एक श्रद्धालु ने कहा, “स्नान के समय संगम क्षेत्र की शांति और पवित्रता को महसूस करना अद्भुत अनुभव है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।”

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी हिस्सा है। इसे वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व है, जो समृद्धि, ज्ञान और उर्जा का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु पीले वस्त्र पहनकर माँ सरस्वती की पूजा करते हैं।

इसके अलावा, इस दिन कई स्थानों पर काव्य, संगीत और लोकनृत्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। ये आयोजन भारतीय संस्कृति और लोकधार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं।

निष्कर्ष

इस वर्ष की बसंत पंचमी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में धार्मिक आस्था और श्रद्धा की महत्ता को उजागर किया। लखनऊ और प्रयागराज में लाखों श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के माध्यम से अपनी आस्था और भक्ति प्रदर्शित की।

प्रयागराज माघ मेला क्षेत्र में दोपहर 12 बजे तक करीब 2 करोड़ 10 लाख श्रद्धालुओं द्वारा डुबकी लगाना इस बात का प्रमाण है कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन आज भी समाज में जीवंत है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की तत्परता, सुविधाओं की उपलब्धता और श्रद्धालुओं की अनुशासनप्रिय प्रवृत्ति ने इस पर्व को सफल और यादगार बनाया।

बसंत पंचमी का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक भी है। यह दिन हमें आस्था, श्रद्धा और परंपरा के महत्व की याद दिलाता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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