Big change : लखनऊ उत्तर प्रदेश में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को जल्द मिलेंगे फाइबर सिलेंडर, सुरक्षा और सुविधा में बड़ा बदलाव

उत्तर प्रदेश के लाखों घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। राज्य में पारंपरिक लोहे के एलपीजी सिलेंडरों की जगह अब चरणबद्ध तरीके से फाइबर गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाने की तैयारी की जा रही है। ये नए सिलेंडर वजन में लगभग आधे होंगे, जिससे इन्हें उठाना और एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना बेहद आसान हो जाएगा। इसके साथ ही इनमें आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक और उन्नत सुरक्षा मानक शामिल किए जाएंगे, जिससे न केवल चोरी पर लगाम लगेगी बल्कि गैस रिसाव और विस्फोट की संभावना भी बेहद कम हो जाएगी।
वर्तमान में घरेलू उपयोग के लिए जो 14.2 किलोग्राम का एलपीजी सिलेंडर दिया जाता है, उसका कुल वजन (भरे हुए सिलेंडर का) लगभग 29 से 31 किलोग्राम तक होता है। इसे उठाना विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कठिन होता है। फाइबर सिलेंडर वजन में काफी हल्के होंगे, जिससे उपभोक्ताओं को रोजमर्रा की जिंदगी में सुविधा मिलेगी। हल्के वजन के कारण इनका परिवहन भी आसान होगा, जिससे गैस एजेंसियों को वितरण में सहूलियत मिलेगी।
फाइबर गैस सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडरों की तुलना में आधुनिक कंपोजिट सामग्री से तैयार किए जाते हैं। इनकी बाहरी परत मजबूत फाइबर और रेज़िन से बनी होती है, जबकि अंदर विशेष लाइनिंग होती है जो गैस को सुरक्षित रखती है। यह सामग्री जंग-रोधी होती है, जिससे सिलेंडर की आयु अधिक होती है और लंबे समय तक उपयोग में रहने पर भी इसकी गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती। लोहे के सिलेंडर समय के साथ जंग खा सकते हैं, जिससे उनकी मजबूती कम हो सकती है, लेकिन फाइबर सिलेंडर में यह समस्या नहीं होगी।
इन सिलेंडरों की एक बड़ी विशेषता यह भी होगी कि इनमें ट्रैकिंग तकनीक लगाई जाएगी। प्रत्येक सिलेंडर में एक विशेष क्यूआर कोड या आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) चिप लगी होगी, जिससे उसकी लोकेशन और स्थिति की निगरानी की जा सकेगी। इससे सिलेंडर की चोरी, कालाबाजारी या अवैध भंडारण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। गैस एजेंसियां और संबंधित विभाग यह पता लगा सकेंगे कि कौन-सा सिलेंडर किस उपभोक्ता को जारी किया गया है और वह वर्तमान में कहां है

सुरक्षा के लिहाज से भी ये सिलेंडर काफी उन्नत होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार फाइबर सिलेंडर में विस्फोट की संभावना पारंपरिक सिलेंडरों की तुलना में बेहद कम होती है। यदि किसी कारणवश आग लग भी जाए तो ये सिलेंडर फटने की बजाय नियंत्रित तरीके से गैस रिलीज करते हैं, जिससे बड़े हादसे की आशंका घट जाती है। इसके अलावा इनका पारदर्शी या अर्ध-पारदर्शी डिजाइन उपभोक्ताओं को गैस का स्तर देखने में भी मदद करेगा। इससे यह अंदाजा लगाना आसान होगा कि सिलेंडर में कितनी गैस शेष है और कब नया सिलेंडर बुक करना चाहिए।
राज्य सरकार और तेल विपणन कंपनियों का उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों को मजबूत करना है। हाल के वर्षों में गैस सिलेंडर से जुड़े कुछ हादसों ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि ऐसे मामले बहुत कम होते हैं, फिर भी सरकार किसी भी संभावित जोखिम को कम करने के लिए नई तकनीक अपनाने पर जोर दे रही है। फाइबर सिलेंडर इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि शुरुआत में इन सिलेंडरों को चुनिंदा शहरों और जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तार किया जाएगा। उपभोक्ताओं को पुराने सिलेंडर के बदले नए फाइबर सिलेंडर दिए जाएंगे। कीमत और सुरक्षा जमा राशि को लेकर अभी अंतिम निर्णय की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा।
परिवहन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भी यह बदलाव सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। हल्के सिलेंडर होने से डिलीवरी कर्मियों को कम शारीरिक मेहनत करनी पड़ेगी और एक वाहन में अधिक संख्या में सिलेंडर ले जाना संभव हो सकेगा। इससे समय और ईंधन की बचत होगी, जो पर्यावरण के लिए भी लाभकारी सिद्ध हो सकती है।
घरेलू उपभोक्ताओं के अलावा होटल, ढाबा और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी इस बदलाव से लाभान्वित हो सकते हैं। हालांकि व्यावसायिक सिलेंडरों के लिए अलग मानक लागू होंगे, लेकिन भविष्य में वहां भी कंपोजिट सिलेंडर का उपयोग बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी और गैस वितरण प्रणाली में सुधार होगा। उपभोक्ताओं को समय पर और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। फाइबर गैस सिलेंडर इसी दिशा में एक आधुनिक और प्रभावी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में फाइबर गैस सिलेंडर की शुरुआत घरेलू रसोई गैस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। हल्का वजन, बेहतर सुरक्षा, ट्रैकिंग तकनीक और उपयोग में सुविधा जैसे लाभ इसे पारंपरिक सिलेंडरों से अलग और अधिक उन्नत बनाते हैं। आने वाले समय में यह कदम राज्य के लाखों परिवारों के लिए रसोई गैस उपयोग को और अधिक सुरक्षित, सरल और भरोसेमंद बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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