Saudi Arabia : संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में रमजान अलग-अलग दिन शुरू हो सकता है

खाड़ी क्षेत्र के दो प्रमुख और प्रभावशाली देश —
- संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब — इस वर्ष रमजान की शुरुआत को लेकर अलग-अलग रुख अपना सकते हैं। दोनों देशों की भौगोलिक सीमाएं आपस में जुड़ी हैं, सांस्कृतिक और धार्मिक आधार भी काफी हद तक समान हैं, लेकिन चांद दिखने के मुद्दे पर मतभेद की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। यह स्थिति केवल धार्मिक कैलेंडर तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति और कूटनीतिक संबंधों की पृष्ठभूमि में भी देखी जा रही है।
- संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख खगोलविदों (एस्ट्रोनॉमर्स) ने संकेत दिया है कि मंगलवार, 17 फरवरी को चांद दिखाई देने की संभावना अत्यंत कम है। वैज्ञानिक गणनाओं और खगोलीय मानकों के आधार पर उनका कहना है कि उस दिन चंद्र दर्शन संभव नहीं होगा। ऐसे में यूएई में रमजान की शुरुआत एक दिन बाद, यानी 18 फरवरी से होने की संभावना जताई जा रही है। यूएई पिछले कुछ वर्षों से चांद देखने के पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक खगोलीय गणनाओं को भी महत्व देता रहा है।
- दूसरी ओर, सऊदी अरब में स्थिति कुछ अलग हो सकती है। सऊदी अरब की चांद देखने की परंपरा लंबे समय से धार्मिक गवाहियों (शहादत) पर आधारित रही है। यदि 17 फरवरी की शाम को वहां चांद दिखने की पुष्टि हो जाती है, तो रमजान की शुरुआत उसी दिन से घोषित की जा सकती है। अतीत में भी कई बार ऐसा हुआ है जब सऊदी अरब ने चांद दिखने का ऐलान किया, जबकि वैज्ञानिकों और खगोलविदों का मानना था कि उस दिन चंद्र दर्शन संभव नहीं था।
- इस विषय पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया, विशेष रूप से Middle East Eye ने रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें कहा गया है कि इस बार यूएई परंपरा से हटकर सऊदी अरब से एक दिन बाद रमजान शुरू कर सकता है। वर्षों से यह देखा गया है कि खाड़ी क्षेत्र के अधिकांश देश सऊदी अरब की घोषणा का अनुसरण करते रहे हैं, क्योंकि इस्लाम के पवित्र स्थलों — मक्का और मदीना — के कारण सऊदी अरब को धार्मिक नेतृत्व की स्थिति प्राप्त है। हालांकि, यूएई द्वारा वैज्ञानिक आधार पर अलग निर्णय लेना क्षेत्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि
- यह मतभेद केवल चांद देखने की तकनीकी या धार्मिक प्रक्रिया का मामला नहीं है। हालिया महीनों में यूएई और सऊदी अरब के बीच कुछ नीतिगत और रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद उभरकर सामने आए हैं। तेल उत्पादन, क्षेत्रीय प्रभाव, यमन और अन्य भू-राजनीतिक विषयों को लेकर दोनों देशों के बीच सूक्ष्म प्रतिस्पर्धा देखी गई है। ऐसे में रमजान की शुरुआत को लेकर अलग-अलग निर्णय को कुछ विश्लेषक व्यापक कूटनीतिक समीकरणों से भी जोड़कर देख रहे हैं।
- हालांकि, दोनों देशों की आधिकारिक संस्थाओं की ओर से इसे धार्मिक प्रक्रिया का हिस्सा ही बताया जाता है। सऊदी अरब में चांद देखने की जिम्मेदारी विशेष धार्मिक समितियों और अदालतों पर होती है, जो आम नागरिकों से प्राप्त गवाहियों के आधार पर निर्णय लेती हैं। वहीं यूएई में खगोल विज्ञान के विशेषज्ञों की राय को अधिक महत्व दिया जाता है और आधुनिक तकनीक, दूरबीनों तथा वैज्ञानिक डेटा का उपयोग किया जाता है।
- हर साल रमजान की शुरुआत को लेकर दुनिया के विभिन्न मुस्लिम देशों में भिन्नता देखी जाती है। इसका मुख्य कारण इस्लामी कैलेंडर का चंद्र आधारित होना है। चांद के वास्तविक दर्शन, स्थानीय मौसम, भौगोलिक स्थिति और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर अलग-अलग देशों में रमजान एक या दो दिन के अंतर से शुरू हो सकता है। लेकिन जब दो पड़ोसी और करीबी देश अलग-अलग दिन से रमजान शुरू करें, तो यह स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बन जाता है।
- धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो इस्लाम में चांद देखने का सिद्धांत स्थानीय गवाही पर आधारित है। कई इस्लामी विद्वानों का मानना है कि प्रत्येक देश को अपने क्षेत्र में चांद देखने के आधार पर निर्णय लेने का अधिकार है। वहीं कुछ अन्य विद्वान वैश्विक स्तर पर एकरूपता की वकालत करते हैं, ताकि पूरी उम्मत एक साथ रोजा शुरू और समाप्त कर सके।
- यूएई और सऊदी अरब के बीच संभावित अलग-अलग तिथियों से रमजान की शुरुआत होने की स्थिति से खाड़ी क्षेत्र में सामाजिक और धार्मिक चर्चा तेज हो सकती है। हालांकि दोनों देशों के नागरिकों के लिए यह धार्मिक पालन का विषय है, न कि राजनीतिक टकराव का। फिर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और नेतृत्व की छवि से जोड़कर देखा जा रहा है।
- अंततः यह स्पष्ट है कि रमजान की शुरुआत की आधिकारिक घोषणा संबंधित देशों की चांद देखने वाली समितियों द्वारा की जाएगी। जब तक आधिकारिक ऐलान नहीं होता, तब तक अटकलों का दौर जारी रह सकता है। चाहे रमजान एक ही दिन से शुरू हो या अलग-अलग, यह महीना आत्मसंयम, इबादत, दान और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक है, जो मुस्लिम समुदाय को एकजुट करने का कार्य करता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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