Criminals escape, system fails : भारत में वेश्यावृत्ति गैरकानूनी, लेकिन कानून कमजोर; अपराधी बचते, व्यवस्था विफ

मानवता का अभिशाप : कोठों की वैश्यावृत्ति
- भारत एक लोकतांत्रिक देश है और लोगों के अनुसार विश्व का सर्वश्रेष्ठ संविधान भारत का है।
इस लोकतांत्रिक देश में इतनी लाचार और लचर कानून व्यवस्था है जो अपराधों को समाप्त ही नहीं कर पाती और यहां लोकतंत्र से चुनकर ऐसे नेता आते हैं जो शायद अपराधों को समाप्त करने वाली इच्छा शक्ति लेकर ही नहीं आते हैं क्योंकि शायद कहीं ना कहीं उनके पीछे भी अपराध जुड़े होते हैं। - देश के लगभग हर नागरिक को पता है कि भारत में वेश्यावृत्ति कानूनी रूप से वेद नहीं है यह गलत है पुलिस है प्रशासन है पूरा सिस्टम है लेकिन फिर भी लगभग भारत के हर बड़े शहर में वेश्यावृत्ति वाले कोठी प्रचलन में हैं। यूं तो अपनी अपनी जाति के बड़े-बड़े नेताओं का नाम लेकर हम लोग खुश हो जाते हैं लेकिन सही बात तो यह है कि वह सारे के सारे निकममे नालायक और धूर्त हैं। जो पूरे भारत में हो रहे इतने बड़े अमानवीय कार्य को आज तक बंद नहीं करा पाए।
- कठोर कानून बने और जो कोठा का संचालक हो दोष सिद्ध होने पर उसे फांसी हो फिर शायद यह गंदगी दिखाई नहीं देगी। लेकिन भारत की कानून प्रक्रिया इतनी महान है जो वर्षों में भी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाती जिला कोर्ट से हाई कोर्ट हाई कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट और कई मामलों में देखा गया है, तब तक आरोपी अपना पूरा जीवन व्यतीत कर जाते हैं।
कहाँ से आती हैं, कोठों पर लड़कियां
- कोठे ऊपर यह छोटी बच्चियाँ कई स्रोतों से आती हैं कई बार इनके झूठे प्रेमी इन्हें कोठों पर बेच जाते हैं तो कई बार कोठों के दलाल अपहरण करके लाते हैं तो कई बार गरीबी से तंग आकर मां-बाप ही इन्हें बेच देते हैं।
कोठों का नारकीय जीवन
- इन देह व्यापार के कोठों पर लाने के बाद यदि कम उम्र की बच्ची ये काम करने से मना करती है तो उसे भूखा रखा जाता है, उसके साथ मारपीट की जाती है, जबरन उसके साथ कई लोगों से शारीरिक संबंध बनवा जाते हैं उसकी शारीरिक और मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित कर दिया जाता है कि वह हर यातना झेलने के लिए तैयार हो जाती है क्योंकि उसका अंतिम संघर्ष केवल जीवन जीना रह जाता है।
आधुनिक वैश्या और कोठे वाली वेश्या में अंतर
- आधुनिक वेश्याएं जिनमें छात्राएं और घरेलू महिलाएं भी शामिल हैं, जो पैसे कमाने के लिए वैश्यावृत्ति करती हैं, यह समानांतर अपना दैनिक जीवन जीती हैं विवाह करती हैं, बच्चे उत्पन्न करती हैं और अंत में मर जाती है लेकिन कोठे वाली वेश्याएं जिनके जीवन में कभी विवाह नहीं होता केवल यातनाएं, पीड़ा और सिर्फ पीड़ा होती है।
- कोठों पर कम उम्र की बच्चियों को जबरन हार्मोन के इंजेक्शन लगाकर बड़ा बनाया जाता है, प्रतिदिन 10 से 20 पुरुष उनके साथ संभोग करते हैं । उन्हें कोई प्रोटेक्शन प्रयोग करने नहीं दिया जाता जब वह गर्भवती हो जाती हैं तो बच्चे को जन्म देने की एक महीने बाद उनसे उनका बच्चा छीन लिया जाता है , फिर उन्हें अपने बच्चों से एक बार मिलने के लिए 200 से ₹500 देने पड़ते हैं , लेकिन फिर भी वह अपने बच्चों को ना तो गले लगा सकती हैं ना दूध पिला सकती हैं उल्टा उन्हें दूध सुखाने की दवा दी जाती है । सोचिए जरा उस माँ के विषय में जो अपने बच्चों को छाती से नहीं लग पाती है ना दूध पिला पाती है कितनी पीड़ा होती होगी । इस प्रकार 30 वर्ष की आयु आते-आते इस कोठे की वैश्यावृत्ति के किसी काम की नहीं रहती इसके बाद उनके पास दो विकल्प होते हैं पहले या तो वह कोठा छोड़ कर चली जाए जो हो नहीं पाता दूसरी स्थिति में वह स्वयं अन्य लड़कियों को फंसा कर लाती है अथवा कोटा पर काम करने वाली लड़कियों के कपड़े आदि धोकर ₹5 ₹10 लेकर पूरे घर में ₹50 कमा लेती है जिससे वह दरिद्रता का जीवन जीते हुए केवल खाना खा सके।

वैश्यावृत्ति रोकने को कभी आगे आए राजनेता ?
- क्या अपने भारत के कभी किसी बड़े राजनेता को यह कहते हुए सुना है कि यह कोठी मानवता का अभिशाप है यहां महिलाओं का शोषण होता है मैं इन्हें बंद करवा दूंगा ? मैं दावा करता हूं कभी नहीं सुना होगा।
भारत में जवाहरलाल नेहरू जो प्रथम प्रधानमंत्री थे उनके बाद लाल बहादुर शास्त्री , इंदिरा गाँधी, राजीव गाँधी, अटल बिहारी, मन मोहन सिंह, और अब नरेंद्र मोदी इनके अलावा कई और लोग प्रधानमंत्री रहे लेकिन संसद भवन से मात्र तीन-चार किलोमीटर की दूरी पर जीबी रोड पर जहां प्रतिदिन हजारों लड़कियों का दिन में कई बार शोषण होता है उनको नरक से मुक्ति नहीं दिला पाए ना कानून बना पाए यह सत्य है और यह सत्य प्रत्येक नागरिक को स्वीकार करना पड़ेगा। - जब भारत में वेश्यावृत्ति कानूनी रूप से अवैध है तो फिर क्यों यह कोठे चल रहे हैं ? कब यह बंद होंगे? जहां लाखों महिलाएं देश में शोषण का शिकार हो रही हैं क्यों नहीं बंद कर पा रहे सारे नेता ना इसके खिलाफ कोई आवाज उठाता है चाहे बीजेपी के नेताओं कांग्रेस के हूं सपा के हो या बसपा के किसी भी पार्टी का नेता कभी इस काम के खिलाफ आवाज नहीं उठाता।
- अपने उत्तर प्रदेश में
उत्तर प्रदेश में
ब्राह्मण कुलभूषण गोविंद बल्लभ पंत, हेमवती नंदन बहुगुणा,धरतीपुत्र मुलायम सिंह यादव,क्षत्रिय कुलभूषण ठा० राजनाथ सिंह
दलितों की मसीहा आयरन लेडी बहन मायावती
हिंदू हृदय सम्राट बाबूजी कल्याण सिंह
युवा हृदय सम्राट अखिलेश यादव जी
और अब महंत योगी आदित्यनाथ जी
,शायद ही रोक पाएंगे। उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति चल रहा है लेकिन लखनऊ, कानपुर, आगरा, बनारस, मेरठ और लगभग हर शहर में कोठे हैं, उत्तर प्रदेश के जिन शहरों में कोठे चल रहे हैं उनको कोई नहीं बंद करवा पा रहा।
प्रशासन और पुलिस – वैश्यावृत्ति रोकने में कितनी सफल ?
- प्रशासन और पुलिस वेश्यावृत्ति रोकने में अगर सफल होता तो महत्व संसद से तीन किलोमीटर की दूरी पर जीबी रोड के कोठों से लेकर कोलकाता के सोनागाछी, मुंबई के कमाठी बाजार और भारत के दक्षिण तक के सभी कोठे बंद हो जाते ।
कठोर कानून और हो पुनर्वास की व्यवस्था
- कोठा संचालन करने वाले लोगों पर आजीवन कारावास या मृत्युदंड की व्यवस्था होनी चाहिए साथ ही साथ वहां रह रही महिलाओं के पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए। कोठे की शिकायत के लिए गुमनाम शिकायत की व्यवस्था होनी चाहिए और किसी थाना क्षेत्र में कोठा संचालित होने पर या वेश्यावृत्ति होने पर थाना अध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की व्यवस्था प्रभावी रूप से होनी चाहिए जब तक यह सामान्य रूप से प्रभावित नहीं होगी तब तक यह सब नहीं रुकेगा।
पुनर्वास इसलिए आवश्यक है क्योंकि फिर अगली पीढ़ी तक वेश्यावृत्ति नहीं जाएगी।
- और शहर में गली-गली में जो स्पा सेंटर खुल रहे हैं उनके लिए भी नियम होना चाहिए यहां क्रॉस जेंडर मसाज बंद होनी चाहिए। पुरुष है तो वह पुरुष ही मालिश कराएगा महिला है तो महिला से और यहां कैमरे का नियम भी online होना चाहिए जिससे लोग देख सके यहां कौन आ रहा है कौन जा रहा है तभी यह समाज की गंदगी साफ होगी।
- (यह लेख विश्वस्त एवं प्रमाणित सूत्रों से प्राप्त जानकारीयों के आधार पर लिखा गया है)
पवन चतुर्वेदी
जिलाध्यक्ष
प्रोग्रेसिव जर्नलिस्ट्स
एसोसिएशन
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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