Deputy Chief Minister : सदन में विपक्ष के सवालों में उलझे मंत्री क्या सवाल था और क्याें जवाब नहीं दे पाए उपमुख्यमंत्री ?

Deputy Chief Minister : सदन में विपक्ष के सवालों में उलझे मंत्री क्या सवाल था और क्याें जवाब नहीं दे पाए उपमुख्यमंत्री

Deputy Chief Minister : सदन में विपक्ष के सवालों में उलझे मंत्री क्या सवाल था और क्याें जवाब नहीं दे पाए उपमुख्यमंत्री
Deputy Chief Minister : सदन में विपक्ष के सवालों में उलझे मंत्री क्या सवाल था और क्याें जवाब नहीं दे पाए उपमुख्यमंत्री

विधानसभा संवाददाता। जयपुर

  • राजस्थानविधानसभा में बुधवार को विपक्ष के सवालों पर मंत्री इस कदर उलझे कि सदन में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। बार-बार पुराने जवाब को ही दोहराते रहे। हालत यह बनी कि उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा विधायक मनीष यादव के इस सवाल का जवाब नहीं दे सके कि शुल्क लेने के बाद विश्वविद्यालयों द्वारा कुल कितने छात्रों को शैक्षणिक विमर्श दिया गया। इस बीच नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और विधायक मनीष यादव ने आरोप लगाया कि एक सवाल के सरकार की ओर से दो तरह के जवाब दिए जा रहे हैं।
  • कौन सा जवाब सही है, यह भी नहीं बता पा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा यह भी नहीं बता सके कि छात्रों से मनमाने ढंग से वसूला गया शुल्क कब तक उन्हें लौटा दिया जाएगा।
    हालांकि इससे पहले उन्होंने यह तो बताया कि स्वयंपाठी छात्रों से विश्वविद्यालयों द्वारा 1000 रुपए प्रति छात्र विमर्श शुल्क लिया जा रहा है। शुल्क की राशि विश्वविद्यालय अपने एक्ट के तहत खुद तय करते हैं।
Deputy Chief Minister : सदन में विपक्ष के सवालों में उलझे मंत्री क्या सवाल था और क्याें जवाब नहीं दे पाए उपमुख्यमंत्री
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क्योंकि वे स्वतंत्र निकाय हैं

  • इसलिए उनके मामले में राज्य सरकार की कोई दखलंदाजी नहीं रहती है। विश्वविद्यालय छात्रों से एक्ट के तहत विभिन्न शुल्क वसूलने के लिए स्वतंत्र हैं। विधायक मनीष यादव ने अपने मूल प्रश्न में जानना चाहा था कि क्या यह सही है कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों द्वारा स्वयंपाठी (प्राइवेट) छात्रों से प्रति छात्र 1000 रुपए विमर्श शुल्क वसूला जा रहा है। यह किस आदेश, नियम अथवा अधिसूचना के तहत है। इसके बदले छात्रों को दी जाने वाली निर्धारित सुविधाएं क्या हैं।
  • प्रत्येक विश्वविद्यालय में यह शुल्क लागू होने की तिथि से दिसंबर,2025 तक वर्षवार एवं विश्वविद्यालयवार विमर्श शुल्क के रूप में कुल कितनी राशि एकत्रित की गई है। इसमें कितनी राशि विश्वविद्यालयों ने अपने पास रखी और कितनी राशि कॉलेजों को विमर्श कार्य के लिए दी गई है। यादव ने अपने मूल प्रश्न में यह भी जानना चाहा था कि उक्त शुल्क का विश्वविद्यालयों द्वारा क्या दुुरुपयोग किया गया है। अगर हां तो क्या सरकार इसकी जांच करवाने औऱ उत्तरदायित्व तय करने के साथ ही इस शुल्क को समाप्त करने की मंशा रखती है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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