Will get new strength : भारत में राफेल निर्माण को लेकर मैक्रों का समर्थन, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती ?

Will get new strength : भारत में राफेल निर्माण को लेकर मैक्रों का समर्थन, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

Will get new strength : भारत में राफेल निर्माण को लेकर मैक्रों का समर्थन, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
Will get new strength : भारत में राफेल निर्माण को लेकर मैक्रों का समर्थन, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संकेत तब मिला जब इमैनुएल मैक्रों ने भारत के राफेल सौदे का पूर्ण समर्थन करते हुए सभी आलोचनाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राफेल समझौता न केवल भारत की रक्षा क्षमता को सुदृढ़ करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। मैक्रों का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन्नत तकनीकी सहयोग पर भी जोर दे रहा है।

राफेल लड़ाकू विमान, जिसे फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी Dassault Aviation द्वारा विकसित किया गया है, आधुनिक बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों में अग्रणी माना जाता है। यह विमान अत्याधुनिक रडार प्रणाली, लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता, उन्नत एवियोनिक्स और मल्टी-रोल ऑपरेशन की विशेषताओं से लैस है। भारतीय वायुसेना पहले ही राफेल विमानों को अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है, जिससे उसकी मारक क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

मैक्रों ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभर रहा है और उसे अपनी सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप सर्वोत्तम रक्षा उपकरण चुनने का पूर्ण अधिकार है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि फ्रांस भारत को केवल हथियार बेचने वाला देश नहीं, बल्कि एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार मानता है। राफेल सौदा इसी दीर्घकालिक विश्वास और सहयोग का प्रतीक है।

“मेक इन इंडिया” पहल के तहत भारत में राफेल के निर्माण या असेंबली की संभावनाएं दोनों देशों के सहयोग को और गहरा कर सकती हैं। यदि राफेल से जुड़ी तकनीक और उत्पादन प्रक्रियाएं भारत में स्थापित होती हैं, तो इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देश में रोजगार सृजन, कौशल विकास और उच्च तकनीकी अवसंरचना के विस्तार को भी गति मिलेगी। भारत पहले से ही स्वदेशी रक्षा उत्पादन में वृद्धि के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर काम कर रहा है।

Will get new strength : भारत में राफेल निर्माण को लेकर मैक्रों का समर्थन, रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई मजबूती
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राफेल सौदे को लेकर अतीत में राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर कुछ आलोचनाएं भी हुई थीं। किंतु फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इन आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह सौदा पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हुआ है और इसका उद्देश्य केवल भारत की सुरक्षा को सशक्त करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा सहयोग को राजनीतिक विवादों से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह दोनों देशों की साझा सुरक्षा और स्थिरता से जुड़ा विषय है।

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग केवल राफेल तक सीमित नहीं है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में भी सक्रिय सहयोग करते रहे हैं। फ्रांस हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी सामरिक उपस्थिति के कारण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार है। ऐसे में राफेल जैसे उन्नत प्लेटफॉर्म का सहयोग व्यापक रणनीतिक समीकरण का हिस्सा है।

राफेल की विशेषताओं पर नजर डालें तो यह विमान हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों प्रकार के मिशनों में सक्षम है। इसकी स्कैल्प और मेटेओर जैसी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियां इसे क्षेत्रीय संतुलन में एक महत्वपूर्ण कारक बनाती हैं। भारतीय वायुसेना के लिए यह विमान सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया और उच्च सटीकता वाले हमलों की क्षमता प्रदान करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल की तैनाती से भारत की वायु शक्ति में गुणात्मक बढ़त मिली है।

यदि भविष्य में भारत में राफेल या उससे जुड़े घटकों का निर्माण शुरू होता है, तो यह रक्षा क्षेत्र में तकनीकी हस्तांतरण (टेक्नोलॉजी ट्रांसफर) के नए अध्याय की शुरुआत होगी। इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल होने का अवसर मिलेगा। साथ ही, घरेलू उद्योगों को उच्च गुणवत्ता मानकों और अनुसंधान क्षमता विकसित करने का अवसर प्राप्त होगा।

मैक्रों का यह समर्थन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। यूरोप और एशिया में सुरक्षा चुनौतियां बढ़ रही हैं, और ऐसे में विश्वसनीय साझेदारियों का महत्व और भी बढ़ जाता है। फ्रांस और भारत के बीच रक्षा सहयोग दोनों देशों के साझा हितों और मूल्यों पर आधारित है, जिसमें लोकतंत्र, संप्रभुता और क्षेत्रीय स्थिरता प्रमुख हैं।

समग्र रूप से देखा जाए तो मैक्रों द्वारा राफेल सौदे का समर्थन भारत-फ्रांस संबंधों में विश्वास और सहयोग की निरंतरता को दर्शाता है। यह न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि व्यापक रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग के लिए भी सकारात्मक संकेत है। यदि राफेल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठते हैं, तो यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगा और दोनों देशों की साझेदारी को दीर्घकालिक आधार देगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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