Police action : प्रदेश प्रभारी प्रदीप शर्मा हाउस अरेस्ट, यूजीसी कानून विरोध में ज्ञापन देने से पहले पुलिस कार्रवाई

मेरठ में प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रस्तावित आगमन से पहले राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियां तेज हो गई थीं। इसी क्रम में Akhil Bharatiya Brahmin Mahasabha (रा) संगठन के प्रदेश प्रभारी प्रदीप शर्मा को पुलिस द्वारा हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला सामने आया है। संगठन का आरोप है कि उन्हें यूजीसी से जुड़े एक नए कानून के विरोध में प्रधानमंत्री को ज्ञापन सौंपने के लिए मेरठ जाने से रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, पश्चिम प्रदेश इकाई द्वारा पूर्व में घोषणा की गई थी कि 21 फरवरी को प्रधानमंत्री के मेरठ आगमन के अवसर पर यूजीसी से संबंधित कानून के विरोध में एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस संबंध में संगठन के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को मेरठ पहुंचने का आह्वान किया गया था। बताया जा रहा है कि 21 फरवरी की रात्रि लगभग 2:00 बजे थाना वेव सिटी की पुलिस प्रदीप शर्मा के निवास पर पहुंची और उन्हें घर से बाहर न निकलने के निर्देश दिए। संगठन का कहना है कि यह कदम उन्हें अपनी लोकतांत्रिक आवाज उठाने से रोकने के लिए उठाया गया।
प्रदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश के घर में नजरबंद किया गया। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रधानमंत्री तक पहुंचाना चाहते थे और ज्ञापन के माध्यम से यूजीसी कानून के विरोध में अपनी आपत्ति दर्ज कराना चाहते थे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी बात रखना प्रत्येक नागरिक और संगठन का अधिकार है, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोका गया। उनके अनुसार, यह कार्रवाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने का प्रयास है।
संगठन के अन्य पदाधिकारियों ने भी इस कदम की आलोचना की है। उनका कहना है कि वे किसी प्रकार की अव्यवस्था या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने का इरादा नहीं रखते थे, बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रस्तुत करना चाहते थे। संगठन के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार आलोचनात्मक आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि लोकतांत्रिक तरीके से ज्ञापन देना भी अपराध माना जाएगा, तो यह चिंताजनक स्थिति है।
हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही थी। उच्च स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ऐसे व्यक्तियों या समूहों पर नजर रखी जाती है, जिनकी गतिविधियों से कार्यक्रम स्थल पर भीड़ या विरोध प्रदर्शन की संभावना हो सकती है। प्रशासन का तर्क यह हो सकता है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए एहतियाती कदम उठाए गए।
इस घटना ने स्थानीय राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। विभिन्न सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की ओर से भी इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है, जबकि कुछ ने सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्रशासन की कार्रवाई को उचित ठहराया है। यह मुद्दा अब केवल एक संगठन तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि व्यापक बहस का विषय बन गया है।

प्रदीप शर्मा ने कहा कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूजीसी कानून के विरोध में संगठन का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और वे संवैधानिक दायरे में रहकर अपनी बात उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि यदि उन्हें ज्ञापन देने से रोका गया, तो वे अन्य वैधानिक माध्यमों का सहारा लेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से शांतिपूर्ण और संयमित रहने की अपील भी की।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सुरक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। प्रधानमंत्री जैसे उच्च पदस्थ नेता के दौरे के समय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, लेकिन साथ ही नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार भी लोकतंत्र की आधारशिला है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती यह होती है कि वह कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करे।
मेरठ में प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर पहले से ही व्यापक तैयारियां चल रही थीं। सुरक्षा एजेंसियां सतर्क थीं और किसी भी संभावित विरोध प्रदर्शन या अव्यवस्था को रोकने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे। इसी परिप्रेक्ष्य में प्रदीप शर्मा को हाउस अरेस्ट किए जाने की घटना सामने आई, जिसने इस दौरे को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और संगठन किस प्रकार अपनी आगे की रणनीति तय करता है। फिलहाल, यह घटना लोकतांत्रिक अधिकारों, सुरक्षा व्यवस्थाओं और राजनीतिक असहमति के बीच संतुलन पर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म दे रही है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह पीछे हटने वाला नहीं है और अपनी आवाज संवैधानिक दायरे में रहकर उठाता रहेगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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