Landing Day is magnificent : छत्रपति शिवाजी महाराज का अवतरण दिवस भव्य रूप से मनाया गया

श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में महाराजाधिराज छत्रपति शिवाजी महाराज का अवतरण दिवस अत्यंत भव्य एवं गरिमामय वातावरण में मनाया गया। यह आयोजन अयोध्या धाम, जनपद उन्नाव के बैनर तले आयोजित एक विराट कवि सम्मेलन के रूप में संपन्न हुआ, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 20 वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकारों ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदू संस्कृति के गौरव, “हिंदवी स्वराज” के प्रणेता और मां भवानी के परम उपासक छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्वितीय योगदान को साहित्यिक अभिव्यक्ति के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाना था। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति, संस्कृति और स्वाभिमान की भावना स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।
अध्यक्षता एवं विशिष्ट अतिथि
कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के जाने-माने वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार, संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष कवि अशोक गोयल “चक्रवर्ती” ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा—
“मस्तक पर तिलक लगाकर जिसने भगवा लहराया, वही था शिवाजी जिसने हिंदवी स्वराज का दीप जलाया।”
उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक शासक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे। आज के समय में उनके आदर्शों को आत्मसात करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवयित्री डॉ. सुमन महरोत्रा (मुजफ्फरपुर, बिहार) उपस्थित रहीं। मुख्य अतिथि के रूप में कवयित्री मंजू दलाल तथा संस्था की राष्ट्रीय प्रभारी कवयित्री बीना गोयल ने मंच की शोभा बढ़ाई। सभी अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत और सम्मान किया गया।
मंगलाचरण से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ अत्यंत आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। कवयित्री संपति चौरे “स्वाति” ने मां सरस्वती एवं गणपति वंदना के साथ कार्यक्रम का प्रारंभ किया। इसके पश्चात आ. कवि दिनेश कुमार चौबे ने मंच से गणपति का आवाहन कर पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन कवि अरविंद कुमार “अनोखे” ने अत्यंत कुशलता और प्रभावशाली शैली में किया। उनकी ओजस्वी और रोचक प्रस्तुति ने पूरे आयोजन को सजीव बनाए रखा।
कवि सम्मेलन की गरिमा
करीब साढ़े तीन घंटे तक अनवरत चले इस विराट कवि सम्मेलन में देश के कोने-कोने से आए कवियों और कवयित्रियों ने शिवाजी महाराज के जीवन, शौर्य, राष्ट्रभक्ति और त्याग पर आधारित रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति दी।
कार्यक्रम में सुमन महरोत्रा (मुजफ्फरपुर), दिनेश कुमार दुबे (छत्तीसगढ़), कवयित्री संपति चौरे, मंजू दलाल (दिल्ली), डॉ. अयोध्या प्रसाद लोधी “सुमन” (उन्नाव), डॉ. शशी जायसवाल (प्रयागराज), बीना गोयल, कवि अरविंद कुमार “अनोखे”, ओज कवि मनोज मंजुल (कासगंज), आत्म प्रकाश कुमार (गांधीनगर, गुजरात), ईश्वर चंद्र विद्या वाचस्पति (संत कबीर नगर), इंजीनियर नानक चंद खंडेलवाल, अवधेश कुमार श्रीवास्तव, श्वेता कुमारी चौबे (बेतिया, पश्चिमी चंपारण, बिहार) सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने भाग लिया।
सभी कवियों ने शिवाजी महाराज के पराक्रम, दूरदर्शिता और धर्मनिष्ठ शासन को अपनी कविताओं के माध्यम से जीवंत कर दिया। ओज, श्रृंगार, वीर रस और राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
शिवाजी के आदर्शों पर जोर
संस्था के संरक्षक आ. अवधेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि आज के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में ऐसे आयोजनों की अत्यंत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने पराधीन जनता में स्वतंत्रता की अलख जगाकर हिंदवी स्वराज की स्थापना की थी। उनके आदर्श आज भी प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिवाजी के साहस, नेतृत्व और राष्ट्रप्रेम को अपने जीवन में उतारें।

सांस्कृतिक एकता का संदेश
यह कार्यक्रम केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बनकर उभरा। विभिन्न राज्यों से आए कवियों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व क्षेत्रीय सीमाओं से परे है। वे सम्पूर्ण भारत के गौरव हैं।
कार्यक्रम के दौरान श्रोताओं ने भी पूरे उत्साह के साथ कवियों का स्वागत किया और देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों पर तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गुंजायमान रहा।
आभार एवं समापन
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अशोक गोयल “चक्रवर्ती” ने सभी अतिथियों, कवियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है और ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं।
उन्होंने संस्था की ओर से आश्वासन दिया कि भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रवादी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा।
निष्कर्ष
श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्या धाम द्वारा आयोजित यह विराट कवि सम्मेलन छत्रपति शिवाजी महाराज के अवतरण दिवस को ऐतिहासिक बना गया। साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का यह संगम न केवल शिवाजी के आदर्शों को पुनर्जीवित करने का प्रयास था, बल्कि समाज में स्वाभिमान और एकता का संदेश भी दे गया।
इस भव्य आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि जब साहित्य और संस्कृति का संगम होता है, तब राष्ट्र चेतना और भी प्रखर हो उठती है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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