A crowd of worshippers gathered : जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर नमाजियों की भीड़ उमड़ी ?

A crowd of worshippers gathered : जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर नमाजियों की भीड़ उमड़ी

A crowd of worshippers gathered : जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर नमाजियों की भीड़ उमड़ी
A crowd of worshippers gathered : जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर नमाजियों की भीड़ उमड़ी

जौनपुर।

शहर में शुक्रवार को रमजान के अलविदा जुमे की नमाज के मौके पर मुस्लिम समाज में खासा उत्साह देखा गया। शुक्रवार का दिन मुस्लिमों के लिए विशेष धार्मिक महत्ता रखता है और अलविदा जुमे की नमाज इसका और भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है। शहर के प्रमुख मस्जिदों में इस अवसर पर भारी संख्या में नमाजी एकत्र हुए और रमजान की फजीलत के साथ अलविदा जुमे की नमाज अदा की।

नगर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं शाही अटाला मस्जिद, शाही जामा मस्जिद (बड़ी मस्जिद), मदरसा हनफिया नवाब युसूफ रोड मदीना मस्जिद और कई अन्य मस्जिदें। इन मस्जिदों में मौलानाओं और इमामों ने न केवल नमाज अदा कराई, बल्कि रमजान की महत्ता और इस माह में किए जाने वाले इबादतों के फजीलत पर विस्तार से प्रकाश डाला।

शाही अटाला मस्जिद में अलविदा जुमे की नमाज का नेतृत्व मौलाना अहमद नवाज ने किया। उन्होंने नमाजियों को नमाज अदा करने की तरकीब और इस नमाज की विशेषता के बारे में बताया। मौलाना आफ़ाक़ ने रमजान के फजीलती पहलुओं पर विशेष जोर देते हुए कहा कि रमजान का महीना इबादत और बरकतों का महीना होता है। उन्होंने कहा कि रमजान में मुस्लिम लोग विशेष तरह की नमाज, जैसे कि तरावीह, अदा करते हैं। यह नमाज केवल रमजान के महीने में ही पढ़ी जाती है और इसमें विशेष रूप से अल्लाह की इबादत और उसकी रहमत की दुआ की जाती है।

मौलाना आफ़ाक़ ने कहा कि रमजान केवल रोज़ा रखने का महीना नहीं है, बल्कि यह आत्मा की सफाई, गुनाहों से बचने और नेक इरादों के साथ ईश्वर की ओर लौटने का महीना भी है। उन्होंने नमाजियों को नसीहत दी कि रमजान के महीने में पढ़ी गई नमाजों और की गई दुआओं को साल भर के लिए अपने जीवन में उतारने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रमजान का हर एक दिन और हर एक रात विशेष महत्व रखती है और इस दौरान की गई इबादत का फल हमेशा बरकतों से भरा होता है।

शाही जामा मस्जिद (बड़ी मस्जिद) में मौलाना अबू हुरैरा ने नमाज का नेतृत्व किया। उन्होंने नमाजियों से मुल्क में अमन और चैन बनाए रखने, समाज में भाईचारे और सह-अस्तित्व की भावना बनाए रखने के लिए विशेष दुआ करने की अपील की। उन्होंने कहा कि रमजान का महीना केवल इबादत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूसरों के साथ अच्छे व्यवहार, दया और समाज में सहयोग की भावना का भी प्रतीक है।

मदरसा हनफिया नवाब युसूफ रोड स्थित मदीना मस्जिद में भी अलविदा जुमे का माहौल खासा उमंगपूर्ण था। यहाँ मौलाना अहमद रज़ा ज़ाफ़री ने नमाज अदा कराई। इसके बाद मौलाना कयामुद्दीन ने नमाजियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि रमजान का महीना सिर्फ रोज़ा और इबादत का ही नहीं है, बल्कि यह गुनाहों से बचने और तौबा करने का भी महीना है। उन्होंने कहा कि रमजान में किए गए नेक काम और तौबा को अल्लाह कभी नकारता नहीं है।

A crowd of worshippers gathered : जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर नमाजियों की भीड़ उमड़ी
A crowd of worshippers gathered : जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर नमाजियों की भीड़ उमड़ी

नमाजियों की भीड़ को देखते हुए यह स्पष्ट हुआ कि

जौनपुर में रमजान का माह धार्मिक और सामाजिक रूप से लोगों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शहर के निवासी इस अवसर पर अपने परिवार और समाज के सदस्यों के साथ मस्जिदों में उपस्थित होते हैं और एकजुटता का संदेश देते हैं। इस मौके पर न केवल इबादत की जाती है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और सहयोग की भावना को भी मजबूत किया जाता है।

रमजान के अलविदा जुमे के मौके पर मस्जिदों में इबादत के साथ-साथ दुआओं का सिलसिला चलता रहा। नमाजियों ने अपने जीवन में खुशहाली, अमन और शांति की दुआ की। मौलानाओं ने भी नमाजियों को समझाया कि इस माह की हर एक इबादत का फल उनके जीवन में स्थायी बरकतें लाएगा।

विशेष रूप से शाही अटाला मस्जिद और शाही जामा मस्जिद में नमाजियों की उपस्थिति भारी रही। युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी मस्जिदों में एक साथ आए और रमजान के आखिरी जुमे की नमाज में शरीक हुए। उन्होंने इस अवसर पर न केवल इबादत की, बल्कि रमजान के दौरान की गई नेकियों और दान-पुण्य को याद करते हुए उन्हें आगे बढ़ाने की ठानी।

मौलाना अहमद नवाज और मौलाना आफ़ाक़ ने नमाजियों को यह भी बताया कि रमजान का माह सिर्फ शरीरिक रूप से रोज़ा रखने का ही नहीं है, बल्कि यह आत्मिक और मानसिक सफाई का भी महीना है। उन्होंने कहा कि इंसान को अपने गुनाहों पर पछतावा करना चाहिए और तौबा के जरिए अपने जीवन को सुधारने का प्रयास करना चाहिए। इसी तरह मौलाना कयामुद्दीन ने जोर देकर कहा कि रमजान के दौरान की गई दुआओं और नेक कार्यों को हमेशा याद रखना चाहिए और उन्हें अपने दैनिक जीवन में उतारना चाहिए।

इस तरह, जौनपुर में रमजान के अलविदा जुमे पर शहर के सभी प्रमुख मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ ने रमजान के महत्व को दर्शाया। नमाजियों ने न केवल अल्लाह के प्रति अपने इबादत भाव को व्यक्त किया, बल्कि समाज में अमन, भाईचारे और सहयोग की भावना को भी मजबूती दी। यह आयोजन शहर में धार्मिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक बनकर उभरा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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