Ganga Restoration : हापुड़ में पर्यावरण, गंगा पुनरुद्धार और वृक्षारोपण योजनाओं पर समीक्षा बैठक आयोजित हुई

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद में पर्यावरण संरक्षण, गंगा स्वच्छता और वृक्षारोपण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। यह बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ और संबंधित प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक का उद्देश्य जिले में पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान, प्रदूषण नियंत्रण, नदियों के पुनरुद्धार और वृक्षारोपण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से लागू करना था। इसमें जिला पर्यावरण समिति, जिला गंगा समिति और जिला वृक्षारोपण समिति के अंतर्गत विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु गौतम, प्रभागीय वनाधिकारी सुश्री अर्शी मलिक, जिला विकास अधिकारी अनवर शेख, अपर सांख्यिकी अधिकारी विरेन्द्र कुमार, पर्यावरणविद भारत भूषण गर्ग और मूलचन्द आर्य सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने अपने-अपने विभागों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आगामी कार्ययोजनाओं पर विचार-विमर्श किया।
जिला पर्यावरण समिति के अंतर्गत जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। विशेष रूप से प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट पर जोर देते हुए कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, पुनर्चक्रण और निस्तारण की व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाएं।
मुख्य विकास अधिकारी ने इस दौरान सभी अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद में कूड़े-कचरे का निस्तारण व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से किया जाए। उन्होंने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रणाली को मजबूत करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि कचरे का प्रबंधन निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाए, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।

जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण और पुनरुद्धार पर विशेष ध्यान दिया गया। बैठक में निर्णय लिया गया कि प्रदेश में छोटी और सहायक नदियों के पुनर्जीवन के लिए काली नदी का चयन किया जाए। इसके लिए सिंचाई विभाग, ग्राम विकास विभाग, जिला पंचायती राज विभाग और वन विभाग को मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा, जनपद में बहने वाली गंगा नदी में गिरने वाले 11 नालों का सर्वेक्षण कर उनकी स्थिति की रिपोर्ट तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए। इन नालों के माध्यम से प्रदूषण का स्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। साथ ही डासना ड्रेन की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी संबंधित अधिकारियों से मांगी गई, ताकि उसके सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
बैठक में जिला वृक्षारोपण समिति के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा भी की गई। मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में किए गए वृक्षारोपण कार्यों की थर्ड पार्टी मॉनिटरिंग के लिए आवश्यक अभिलेख और जानकारी समयबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाए। इससे इन कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सकेगी।
समिति अध्यक्ष ने यह भी निर्देश दिया कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में किए गए वृक्षारोपण कार्यों का सत्यापन एक सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि सभी विभाग अपने-अपने क्षेत्र में लगाए गए पौधों की स्थिति का सही आंकलन करें और उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
आगामी वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित वृक्षारोपण कार्यक्रमों पर भी चर्चा की गई। सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि उन्हें आवंटित लक्ष्यों के अनुसार शत-प्रतिशत भूमि का चिन्हांकन किया जाए। चिन्हित भूमि की जानकारी प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय में समय पर भेजने के निर्देश दिए गए, ताकि समय रहते योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
इस बैठक में पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे आम जनता को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न अभियान चलाएं, जिसमें प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, पेड़ लगाने और जल स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया जाए।
बैठक के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा, ताकि योजनाओं का लाभ अधिकतम स्तर तक पहुंच सके। जिलाधिकारी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी भी आवश्यक है।
अंततः, यह बैठक जनपद में पर्यावरण संरक्षण, गंगा स्वच्छता और वृक्षारोपण योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के अनुसार यदि कार्य समयबद्ध और गंभीरता से किए जाते हैं, तो निश्चित रूप से जिले में पर्यावरणीय स्थिति में सुधार देखा जा सकेगा।
इस प्रकार, हापुड़ प्रशासन द्वारा आयोजित यह बैठक न केवल योजनाओं की समीक्षा के लिए महत्वपूर्ण रही, बल्कि यह भविष्य की कार्ययोजनाओं को दिशा देने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का भी एक सशक्त माध्यम बनी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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