Grand opening : हापुड़ में शहीद मेले का भव्य उद्घाटन, तांत्याटोपे को नमन कर स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को किया जीवंत

हापुड़। स्वाधीनता संग्राम शहीद स्मारक समिति हापुड़ के तत्वावधान में प्रत्येक वर्ष आयोजित होने वाले ऐतिहासिक शहीद मेले एवं प्रदर्शनी का इस वर्ष भी भव्य उद्घाटन किया गया। यह आयोजन शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोए रखने तथा स्वतंत्रता संग्राम के वीर शहीदों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाता है। मेले का उद्घाटन सदर विधायक विजयपाल आढ़ती एवं स्वाधीनता शहीद स्मारक समिति के पदाधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से अमर शहीद तांत्याटोपे की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं फीता काटकर किया गया।
उद्घाटन समारोह में पूरे क्षेत्र का वातावरण देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत दिखाई दिया। “भारत माता की जय” और “शहीदों अमर रहें” के नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम के महान नायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बलिदान को याद किया।
कार्यक्रम में सदर विधायक विजयपाल आढ़ती ने कहा कि शहीद मेले जैसे आयोजन हमें हमारे इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग की याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि तांत्याटोपे जैसे वीरों ने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया और उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में देशभक्ति की भावना मजबूत होती है और उन्हें अपने इतिहास को जानने का अवसर मिलता है।
स्वाधीनता संग्राम शहीद स्मारक समिति के अध्यक्ष ललित कुमार छावनी वाले ने कहा कि शहीद मेला केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को जीवंत रखने का एक प्रयास है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य है कि नई पीढ़ी अपने शहीदों के बलिदान को समझे और उनके आदर्शों पर चलकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे।
महामंत्री एडवोकेट मुकुल कुमार त्यागी ने कहा कि आज का युग भले ही आधुनिकता का युग है, लेकिन हमें अपने इतिहास और संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानी के कारण ही हमें आज स्वतंत्र भारत में सांस लेने का अवसर मिला है। इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनके सम्मान में ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखें।
कोषाध्यक्ष आशुतोष आजाद ने कहा कि मेले का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि शिक्षा और जागरूकता भी है। यहां लगाई जाने वाली प्रदर्शनी में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं, दस्तावेजों और चित्रों को प्रदर्शित किया जाता है, जिससे लोग अपने देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें।
राष्ट्रीय सैनिक संस्था के जिला अध्यक्ष एवं मेला मीडिया प्रभारी ज्ञानेन्द्र त्यागी ने कहा कि सैनिक और शहीद दोनों ही राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में एकता, देशभक्ति और त्याग की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शहीदों के जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में कार्य करें।

मेला संरक्षक धर्मेन्द्र शर्मा ने कहा कि शहीद मेले का उद्देश्य केवल आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष बढ़ती भीड़ यह साबित करती है कि लोगों में अपने इतिहास और शहीदों के प्रति सम्मान लगातार बढ़ रहा है।
फसीह चौधरी, मेला संयोजक सोनू बंसल, सहसंयोजक मनीष कंसल, गुलशन त्यागी, राजीव गर्ग, संजय गर्ग, मंत्री वीरेन्द्र गर्ग, प्रचार मंत्री अतुल अग्रवाल, विशाल गुप्ता, प्रभात अग्रवाल, सतबीर प्रधान, श्याम वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, व्यापारी, विद्यार्थी और युवा शामिल हुए। पूरे परिसर में देशभक्ति से जुड़े गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी रही। विभिन्न स्टॉलों पर स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी वस्तुओं, पुस्तकों और चित्रों का प्रदर्शन किया गया, जिसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
बच्चों और युवाओं में मेले को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। कई स्कूलों के छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों के साथ मेले में पहुंचे और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। शिक्षकों ने बच्चों को शहीदों के जीवन और उनके संघर्ष के बारे में विस्तार से बताया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि इस प्रकार के मेले न केवल मनोरंजन का माध्यम होते हैं, बल्कि यह इतिहास को समझने और समाज में एकता की भावना को मजबूत करने का कार्य भी करते हैं। लोगों ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन हर वर्ष और अधिक भव्य रूप में होने चाहिए।
मेले के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन की टीम लगातार निगरानी कर रही थी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और आयोजकों ने मिलकर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन में देशभक्ति, एकता और सांस्कृतिक धरोहर की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
शहीद मेला न केवल हापुड़ की ऐतिहासिक पहचान है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को देश के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। यह आयोजन हर वर्ष लोगों में देशभक्ति की भावना को और अधिक मजबूत करता है और स्वतंत्रता संग्राम के वीरों की स्मृति को जीवंत बनाए रखता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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