Committee active : विजय दिवस पर दरियाव सिंह को राष्ट्रीय सम्मान दिलाने की मांग तेज, बुंदेलखंड समिति सक्रिय

खागा। 1857 की प्रथम स्वतंत्रता संग्राम क्रांति के महान सेनानी अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह के विजय दिवस के अवसर पर बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने उनके ऐतिहासिक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित सम्मान दिलाने की जोरदार मांग उठाई है। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडेय ने केंद्र एवं उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि शहीद के संघर्ष, बलिदान और नेतृत्व को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सके।
समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में प्रवीण पांडेय ने कहा कि 8 जून 1857 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसी दिन ठाकुर दरियाव सिंह ने खागा क्षेत्र में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ निर्णायक मोर्चा संभालते हुए उन्हें क्षेत्र से खदेड़ दिया था। उनके नेतृत्व में उस समय 32 दिनों तक स्वतंत्र शासन व्यवस्था भी संचालित हुई थी, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक अद्भुत और प्रेरणादायक घटना है। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश आज भी इस ऐतिहासिक योगदान को वह स्थान नहीं मिल सका है, जिसकी यह वास्तविक रूप से हकदार है।
प्रवीण पांडेय ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अनेक ऐसे वीर सेनानी हुए हैं जिनके योगदान को समय के साथ अपेक्षित पहचान नहीं मिली। ठाकुर दरियाव सिंह उन्हीं महान योद्धाओं में से एक हैं, जिन्होंने अपने साहस, रणनीति और नेतृत्व क्षमता के बल पर अंग्रेजी शासन को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास को स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, ताकि छात्र-छात्राएं अपने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय इतिहास को सही रूप में समझ सकें।
समिति ने इस अवसर पर केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष रूप से अपील की है कि अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह के जीवन, संघर्ष और बलिदान को शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बनाया जाए। प्रवीण पांडेय ने कहा कि यह कदम न केवल इतिहास के प्रति न्याय होगा बल्कि नई पीढ़ी में देशभक्ति और प्रेरणा का संचार भी करेगा।
इसके साथ ही समिति ने एक और महत्वपूर्ण मांग उठाई है कि किशनपुर-रामपुर क्षेत्र में यमुना नदी के तट के निकट “अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह कृषि महाविद्यालय” की स्थापना की जाए। प्रवीण पांडेय ने कहा कि यह महाविद्यालय क्षेत्र के किसानों और युवाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। इससे कृषि शिक्षा, आधुनिक तकनीक, शोध कार्य और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र पहले से ही कृषि और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना करता रहा है, ऐसे में एक कृषि महाविद्यालय क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस प्रस्ताव को सरकार स्वीकार करती है तो यह न केवल शिक्षा और कृषि क्षेत्र में एक बड़ा कदम होगा, बल्कि यह शहीद दरियाव सिंह के सम्मान में एक स्थायी और सार्थक श्रद्धांजलि भी होगी। इससे आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को केवल इतिहास की किताबों में नहीं बल्कि एक जीवंत प्रेरणा के रूप में देख सकेंगी।

समिति ने तीसरी महत्वपूर्ण मांग के रूप में खागा क्षेत्र को “अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह जिला” के रूप में नामित करने की अपील की है। प्रवीण पांडेय ने कहा कि यह मांग केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के ऐतिहासिक गौरव को सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि यदि किसी क्षेत्र का नाम किसी महान स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर रखा जाता है तो वह आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता है।
उन्होंने आगे कहा कि खागा क्षेत्र का इतिहास गौरवशाली रहा है और यहां के लोगों ने स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में इस क्षेत्र को शहीद के नाम से जोड़ना एक ऐतिहासिक और सम्मानजनक निर्णय होगा। इससे क्षेत्र के विकास और पहचान दोनों को नई दिशा मिलेगी।
कार्यक्रम के दौरान प्रवीण पांडेय ने यह भी कहा कि शहीदों के बलिदान को केवल स्मरण करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके आदर्शों को समाज में जीवित रखना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि अपने स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को समझेगी तो वह अधिक जिम्मेदार और राष्ट्रहित में कार्य करने वाली बनेगी।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे कई नायक हैं जिनका योगदान स्थानीय स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षित पहचान नहीं मिली। इसलिए सरकार को चाहिए कि ऐसे सभी ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान को उचित स्थान दिया जाए और उन्हें पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।
बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के इस अभियान को स्थानीय स्तर पर भी समर्थन मिल रहा है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और इतिहास प्रेमियों ने भी इस मांग को उचित और समयानुकूल बताया है। उनका कहना है कि यदि शहीद दरियाव सिंह के योगदान को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाता है तो यह न केवल इतिहास को समृद्ध करेगा बल्कि क्षेत्रीय गौरव को भी बढ़ाएगा।
अंत में प्रवीण पांडेय ने कहा कि यह मांग केवल एक संगठन की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की भावना का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सरकार इस ऐतिहासिक योगदान को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेगी और शहीद दरियाव सिंह को वह सम्मान मिलेगा जिसके वे वास्तविक हकदार हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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