Pond Beautification : धनगवा तालाब सौंदर्यकरण में लाखों के घोटाले के आरोप, जांच और कार्रवाई की मांग तेज

दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले की जनपद पंचायत पटेरा अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत धनगवा एक बार फिर विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है। ग्रामीणों ने पंचायत में तालाब सौंदर्यकरण के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में जहां तालाब को पूरी तरह विकसित और सौंदर्यीकृत दिखाया गया है, वहीं जमीनी स्तर पर स्थिति बिल्कुल विपरीत है और मौके पर किसी भी प्रकार का निर्माण या विकास कार्य दिखाई नहीं देता।
ग्रामीणों के अनुसार यह पूरा मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और योजनाओं में भारी अनियमितताओं की ओर संकेत करता है। उनका आरोप है कि तालाब सौंदर्यकरण के नाम पर बड़ी राशि आहरित कर ली गई, लेकिन वास्तविक कार्य न के बराबर हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थल निरीक्षण किया जाए तो सच्चाई स्वयं सामने आ जाएगी कि विकास कार्य केवल कागजों में ही पूरा दिखाया गया है।
इस पूरे प्रकरण में ग्रामीणों ने जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ हलदार मिश्रा, संबंधित उपयंत्री तथा ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता संभव नहीं है। उनका कहना है कि पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता का अभाव है और कई विकास कार्य केवल रिकॉर्ड में ही पूरे दिखाए जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस मामले में विधायक निधि से स्वीकृत राशि का भी सही उपयोग नहीं किया गया। उनका कहना है कि महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए प्राप्त धन को भी निजी हितों के अनुसार खर्च कर दिया गया, जिससे सरकारी योजनाओं का उद्देश्य प्रभावित हुआ है।
ग्राम पंचायत धनगवा निवासी जय सिंह लोधी ने इस पूरे मामले को लेकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने सरपंच और पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तालाब निर्माण और सौंदर्यकरण के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। उनके अनुसार जब उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पंचायत से संबंधित जानकारी मांगी, तो उन्हें पूरी और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने इस कथित अनियमितता का विरोध किया और जवाबदेही की मांग की, तो उन्हें और उनके परिवार को धमकियां मिलने लगीं। आरोप है कि सरपंच पति, पंचायत सचिव और उनके परिजनों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता के 10 से 11 सहयोगियों के घर जाकर उन्हें भी दबाव में लाने का प्रयास किया गया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि विरोध करने वालों को विभिन्न सरकारी योजनाओं से वंचित करने की धमकी दी जा रही है। आरोप के अनुसार कुछ लोगों को बीपीएल कार्ड निरस्त कराने तथा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ बंद कराने की चेतावनी दी गई है। इससे ग्रामीणों में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है।
इस पूरे मामले को लेकर शिकायतकर्ता जय सिंह लोधी ने जनपद पंचायत पटेरा के सीईओ को भी लिखित शिकायत सौंपी है। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक इस मामले में किसी प्रकार की ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे गांव में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई तो यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी मांग की है कि कथित रूप से गलत तरीके से खर्च की गई सरकारी राशि की वसूली की जाए।
इसके अलावा ग्रामीणों ने शिकायतकर्ता और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत करने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा बना हुआ है। ऐसे में प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध करानी चाहिए।
यह मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आती रहेंगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब जैसे महत्वपूर्ण जल संरचना के सौंदर्यकरण और विकास का उद्देश्य केवल कागजी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ ग्रामीणों को मिलना चाहिए। यदि योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन हो तो इससे जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ग्रामीणों की मांग है कि स्वतंत्र जांच दल गठित कर मौके का निरीक्षण कराया जाए और सभी वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका की भी समीक्षा की जाए।
धनगवा पंचायत का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस कथित घोटाले के आरोपों की जांच कितनी गंभीरता और निष्पक्षता से करता है और क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई हो पाती है या नहीं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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