Commotion in the corridors : नारायण त्रिपाठी के जन्मदिन पर उमड़ा जनसैलाब,भ्रष्टाचारियों के उड़े तोते, राजनीतिक गलियारों में हड़कंप

मैहर।
कहते हैं कि शेर जब कदम पीछे खींचता है, तो वो डरता नहीं, बल्कि एक बड़ी छलांग की तैयारी कर रहा होता है। मैहर के ‘जननायक’ और पूर्व विधायक पं. नारायण त्रिपाठी के जन्मदिन पर उमड़े जन-आक्रोश और जन-स्नेह के सैलाब ने यह साबित कर दिया है कि नेता सिर्फ किसी ‘सिंबल’ या ‘टिकट’ से नहीं, बल्कि जनता के दिलों पर राज करने से बनता है।
मैहर के दशहरा मैदान में कार्यक्रम की अनुमति न देना, सत्ता की गोद में बैठे नेताओं की इसी भड़भड़ाहट और छटपटाहत का पहला सबूत था। उन्हें डर था कि लाखों की भीड़ का यह ‘नारायण-उत्सव’ उनकी सियासी जमीन को एक ही दिन में लील जाएगा। लेकिन,राजनीति में पृष्ठभूमि तलाश रहे नौसिखिया खिलाड़ियों को क्या पता था कि जब जनता मन बना ले, तो मैदान छोटे पड़ जाते हैं!
नारायण त्रिपाठी के मैहर पहुंचते ही मैहर के जगह जगह स्थानों में चौराहों में जनता ने उनका जन्म दिन मनाया सभी स्थानों में पहुंच कर नारायण त्रिपाठी ने केक काट कर जनता के प्रेम और स्नेह को स्वीकारा ए नजारा वीरले ही किसी नेता के लिए देखने को मिलता है।
होटल मैहर इन बना ‘शक्ति का केंद्र’, घंटों थमा रहा चक्का जाम*
दशहरा मैदान से कार्यक्रम कैंसिल किये जाने के बाद जब कार्यक्रम ‘होटल मैहर इन’ के मैदान में शिफ्ट हुआ, तो मैहर विधानसभा के कोने-कोने से गाड़ियों का ऐसा रेला उमड़ा कि सर्विस रोड घंटों तक पूरी तरह चाम हो गई। हजारों की संख्या में * स्वाभिमानी समर्थकों के जयकारों से पूरा मैहर गूंज उठा।
जैसे ही जननायक नारायण त्रिपाठी ने मंच पर कदम रखा, पूरा इलाका
“जिसका जलवा कायम है, उसका नाम नारायण है!” और “नारायण त्रिपाठी जिंदाबाद!” के गगनभेदी नारों से दहल उठा। यह सिर्फ एक जन्मदिन की बधाई नहीं थी, बल्कि सत्ता पक्ष के अहंकार के खिलाफ जनता का ‘युद्धघोष’ था।

नारायण त्रिपाठी की इस अभूतपूर्व लोकप्रियता ने बड़े-बड़े राजनीतिक सूरमाओं की नींद हराम कर दी है। सूत्र बताते हैं कि मैहर में नारायण त्रिपाठी के ‘रुक कर बैटिंग करने’ यानी क्षेत्र में ही डटने की खबर सुनते ही *सत्ताधारी नेताओं के चेहरे का रंग उड़ गया है और दिल बैठे जा रहे हैं।
मैहर में नारायण के कदम रखने से जांचरचाएं तेज़ हो गई है कि 20 वर्षों तक विधायक रहते हुए नारायण त्रिपाठी ने जिस मैहर को कभी ‘दलाली का अड्डा’ नहीं बनने दिया, वह मैहर आज महज इस पंचवर्षीय में सत्ता के संरक्षण में भ्रष्टाचार और दलाली का गढ़ कैसे बन गया?
अब जब नारायण ने फिर से मैदान संभाल लिया है, तो भ्रष्टाचारियों और मलाई चाटने वालों को अपना धंधा बंद होने का डर सताने लगा है। यही वजह है कि उनकी इस लोकप्रियता से घबराकर सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर पहले उनके कार्यक्रम को रोकने की नाकाम कोशिश की गई।
अगला मूवमेंट होगा और आक्रामक, सत्तापक्ष को पृष्ठभूमि बचाना मुश्किल!
इस ऐतिहासिक भीड़ ने साफ कर दिया है कि बिना किसी दल के भी नारायण त्रिपाठी मैहर के असली ‘सुल्तान’ हैं। सत्ता दल के नेताओं को अब अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती साफ नजर आ रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि नारायण त्रिपाठी का अगला कदम बेहद आक्रामक और विध्वंसक होने वाला है। इस जनसैलाब ने यह संदेश दे दिया है कि मैहर की जनता अपने नायक के अपमान का बदला लेने और क्षेत्र को दलालों से मुक्त कराने के लिए पूरी तरह कमर कस चुकी है। सत्ताधारियों की भड़भड़ाहत बता रही है कि मैहर में बदलाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है!
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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