Announcement of a sit-in protest : मेरठ दलित युवती हत्या मामले पर कांग्रेस का विरोध, पुलिस ने नेताओं को रोका, जंतर-मंतर धरने का ऐलान

हापुड़/मेरठ। मेरठ के ग्राम थरोटा में दलित समाज की एक युवती की हत्या के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। पीड़ित परिवार से मुलाकात करने पहुंचे उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को पुलिस प्रशासन ने काशी टोल टैक्स पर रोक दिया। इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेताओं और पुलिस प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस ने इस कदम को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की और मामले को लेकर आंदोलन तेज करने की घोषणा की।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम पीड़ित परिवार को सांत्वना देने और घटना की जानकारी लेने के उद्देश्य से मेरठ पहुंचे थे। उनके साथ कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता, सांसद, पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद थे। लेकिन मेरठ सीमा में प्रवेश करने से पहले ही पुलिस प्रशासन ने उन्हें काशी टोल टैक्स पर रोक दिया। कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन से पीड़ित परिवार से मिलने की अनुमति देने का आग्रह किया, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी।
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद मौके पर कुछ देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इसे सरकार के दबाव में की गई कार्रवाई बताया। नेताओं का कहना था कि किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक दल को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
राजेंद्र पाल गौतम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दलित समाज पर लगातार बढ़ रहे अत्याचार बेहद चिंता का विषय हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में दलितों और कमजोर वर्गों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हमेशा पीड़ितों के साथ खड़ी रही है और आगे भी न्याय की लड़ाई लड़ती रहेगी।
उन्होंने घोषणा की कि 27 जुलाई को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में दलित समाज के खिलाफ हो रहे अपराधों, हत्याओं और अत्याचारों के विरोध में एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस प्रदर्शन में प्रदेशभर से कांग्रेस कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन और विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन केवल एक घटना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दलित समाज की सुरक्षा और न्याय की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश त्यागी ने भी पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार विपक्षी नेताओं को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोककर अपनी संवेदनहीनता का परिचय दे रही है। उनका आरोप था कि पुलिस प्रशासन सरकार के निर्देश पर कार्य कर रहा है और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता इस रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करता है और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगा।

पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे कांग्रेस नेताओं में अमेठी से सांसद किशोरी लाल शर्मा, बाराबंकी से सांसद तनुज पुनिया, सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं उत्तर प्रदेश के सह प्रभारी प्रदीप नरवाल सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। सभी नेताओं ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि जनप्रतिनिधियों को भी पीड़ित परिवार से मिलने नहीं दिया जाएगा तो लोकतंत्र की मूल भावना कमजोर होगी।
मौके पर कांग्रेस के अनेक स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। इनमें नोएडा कोऑर्डिनेटर नरेश भाटी, जिला महासचिव गौरव गर्ग, गोपाल भारती, महबूब अली सहित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करना चाहते थे, लेकिन उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। कांग्रेस का कहना है कि वह इस मुद्दे को प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक उठाएगी और दलित समाज को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई थी।
मेरठ की इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश में कानून-व्यवस्था, दलित सुरक्षा और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर 27 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन पर रहेगी, जहां पार्टी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना का असर आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है, क्योंकि विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था और सामाजिक न्याय के मुद्दे से जोड़कर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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