Demand for return : वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल पर दर्ज एफआईआर से पत्रकारों में रोष, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई वापसी की मांग

शाहजहांपुर। जिले के वरिष्ठ पत्रकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार से मान्यता प्राप्त पत्रकार सुरेंद्र सिंघल के विरुद्ध जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) की शिकायत पर थाना सदर बाजार में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद जिले के पत्रकारों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। विभिन्न पत्रकार संगठनों ने इस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई और उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो संगठन जिलेभर में आंदोलन शुरू करेगा।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आलोक तनेजा ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन इस मामले को पत्रकारों के अधिकारों और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा विषय मानता है। उन्होंने कहा कि किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई कानून के दायरे में होनी चाहिए, लेकिन यदि किसी मामले में विवाद की स्थिति हो तो निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक है।
एसोसिएशन के अनुसार, यह मामला वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल और जिला पूर्ति अधिकारी के बीच हुई एक कथित टेलीफोनिक बातचीत के बाद सामने आया। संगठन का कहना है कि बातचीत की परिस्थितियों और वास्तविक तथ्यों को सामने लाए बिना केवल एक पक्ष के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण संगठन ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
पत्रकार संगठन ने मांग की है कि पत्रकार और जिला पूर्ति अधिकारी के बीच हुई कथित ऑडियो बातचीत की जांच किसी राजपत्रित अधिकारी से कराई जाए, ताकि पूरे घटनाक्रम के तथ्य निष्पक्ष रूप से सामने आ सकें। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी भी पक्ष की गलती सामने आती है तो उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
जिलाध्यक्ष आलोक तनेजा ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पत्रकारिता की गरिमा और निष्पक्ष कार्य वातावरण से जुड़ा विषय है। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित पत्रकार स्थायी समिति की बैठक में इस मामले को प्रमुखता से उठाया जाएगा। संगठन की ओर से यह अपेक्षा की जा रही है कि प्रशासन इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगा और सभी पक्षों को सुनने के बाद उचित निर्णय लिया जाएगा।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने अपनी दो प्रमुख मांगें प्रशासन के समक्ष रखी हैं। पहली, दर्ज एफआईआर को वापस लेने पर विचार किया जाए अथवा कानून के अनुसार उसकी निष्पक्ष समीक्षा की जाए। दूसरी, कथित टेलीफोनिक बातचीत की स्वतंत्र जांच कराई जाए ताकि वास्तविक तथ्य स्पष्ट हो सकें। संगठन का कहना है कि पारदर्शी जांच से ही किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान संभव है।

पत्रकारों का कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। समाचार संकलन और जनहित के मुद्दों को उठाने के दौरान पत्रकारों और अधिकारियों के बीच संवाद होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। यदि किसी संवाद को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो उसका समाधान कानूनी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए।
इस बीच पत्रकार समुदाय के अनेक सदस्यों ने भी इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि पत्रकारों और प्रशासन के बीच स्वस्थ संवाद लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। किसी भी प्रकार के विवाद का समाधान तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होना चाहिए ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो संगठन जिले की सभी तहसीलों और ब्लॉकों में शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेगा। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं बल्कि निष्पक्ष जांच और न्यायसंगत प्रक्रिया सुनिश्चित कराना होगा।
उधर, इस पूरे मामले में प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की ओर से जो भी आधिकारिक पक्ष सामने आएगा, वह जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। कानूनी मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित होता है। इसलिए मामले के सभी तथ्यों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही हो सकेगी।
पत्रकार संगठनों का मानना है कि प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण आधार है, वहीं प्रशासनिक संस्थाओं का सम्मान और कानून का पालन भी समान रूप से आवश्यक है। इसलिए ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और कानून के अनुरूप कार्रवाई ही सभी पक्षों के हित में मानी जाती है।
फिलहाल यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्रकार संगठनों ने प्रशासन से संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। वहीं, प्रशासन की ओर से जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद ही इस मामले में अगला निर्णय सामने आने की संभावना है। पत्रकार समुदाय का कहना है कि वे कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन साथ ही निष्पक्ष जांच और न्यायपूर्ण प्रक्रिया की भी अपेक्षा रखते हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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