Continuous demand : मेरठ सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की अनुपस्थिति के आरोप, कार्रवाई और पारदर्शी जांच की उठी मांग लगातार ?

Continuous demand : मेरठ सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की अनुपस्थिति के आरोप, कार्रवाई और पारदर्शी जांच की उठी मांग लगातार

Continuous demand : मेरठ सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की अनुपस्थिति के आरोप, कार्रवाई और पारदर्शी जांच की उठी मांग लगातार
Continuous demand : मेरठ सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की अनुपस्थिति के आरोप, कार्रवाई और पारदर्शी जांच की उठी मांग लगातार

मेरठ। मेरठ के शताब्दी नगर स्थित सरकारी नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात एक चिकित्सक की कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अस्पताल में नियुक्त चिकित्सक डॉ. एस.पी. पाल नियमित रूप से ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते, जबकि उन्हें सरकार से प्रतिमाह वेतन प्राप्त होता है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अस्पताल में अधिकांश समय मरीजों का उपचार कंपाउंडर अथवा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के भरोसे किया जाता है, जिससे मरीजों की सुरक्षा और उपचार व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और चिकित्सक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना की है। इन केंद्रों पर योग्य एमबीबीएस चिकित्सकों की नियुक्ति इसलिए की जाती है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके। लेकिन आरोप है कि शताब्दी नगर स्थित इस स्वास्थ्य केंद्र में व्यवस्था सरकार की मंशा के अनुरूप संचालित नहीं हो रही है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि डॉ. एस.पी. पाल अक्सर निर्धारित समय पर अस्पताल नहीं पहुंचते। आरोप यह भी है कि उनकी अनुपस्थिति के बावजूद उपस्थिति रजिस्टर में उनकी मौजूदगी दर्ज कर दी जाती है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस संबंध में पहले भी कई बार उच्च अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि विभागीय स्तर पर लापरवाही और उदासीनता के कारण यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है।

क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ समय पूर्व चिकित्सक की अनुपस्थिति से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ था। दावा किया गया कि उस वीडियो में डॉक्टर के अस्पताल में मौजूद न होने के बावजूद उपस्थिति दर्ज दिखाई गई थी। हालांकि, इस वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद विभाग द्वारा कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे लोगों का भरोसा स्वास्थ्य व्यवस्था पर कमजोर हुआ है।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि अस्पताल में कई बार मरीजों को दवाइयां देने, इंजेक्शन लगाने और ड्रिप चढ़ाने जैसे कार्य कंपाउंडर या अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा किए जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी मरीज के उपचार में कोई गंभीर चिकित्सकीय निर्णय लेना हो और उस समय योग्य चिकित्सक मौजूद न हों, तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। उनका कहना है कि गरीब परिवार सरकारी अस्पतालों पर भरोसा करके इलाज के लिए आते हैं और यदि उन्हें समय पर चिकित्सक उपलब्ध नहीं होता तो यह अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।

शिकायतकर्ताओं ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेरठ डॉ. राम प्रसाद से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित चिकित्सक के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि अस्पतालों में चिकित्सकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली और सीसीटीवी निगरानी जैसी व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाया जाए।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है ताकि गरीब और जरूरतमंद नागरिकों को बेहतर उपचार मिल सके। यदि कहीं नियुक्त चिकित्सक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करते हैं तो इसका सीधा नुकसान आम जनता को उठाना पड़ता है। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए क्योंकि इसका संबंध सीधे लोगों के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा होता है।

क्षेत्रवासियों ने यह भी कहा कि यदि किसी कंपाउंडर या अन्य कर्मचारी से उपचार के दौरान कोई गंभीर त्रुटि हो जाती है और किसी मरीज की जान को नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना आवश्यक है। उनका कहना है कि प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी की अपनी निर्धारित भूमिका होती है और चिकित्सकीय निर्णय लेने का दायित्व योग्य डॉक्टर का होता है। इसलिए अस्पताल में डॉक्टर की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए।

लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए, उपस्थिति अभिलेखों की जांच की जाए, शिकायतों का सत्यापन किया जाए तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी शिकायतों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

फिलहाल इस मामले में संबंधित चिकित्सक या स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि विभाग या संबंधित पक्ष की ओर से कोई स्पष्टीकरण जारी किया जाता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए ताकि सभी पक्षों का दृष्टिकोण सामने आ सके।

अब देखना यह होगा कि समाचार और स्थानीय लोगों की शिकायतों के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेरठ इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आवश्यक विभागीय कार्रवाई कर सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में जनता का विश्वास और मजबूत किया जाएगा।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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