Free facility : उत्तर प्रदेश में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र शुल्क बढ़ा, नई व्यवस्था लागू, 21 दिन तक रहेगी निशुल्क सुविधा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने की शुल्क व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए प्रमाणपत्र जारी करने की फीस में बढ़ोतरी कर दी है। शासन द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब निर्धारित अवधि के बाद जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। नई व्यवस्था के तहत पहले जहां प्रमाणपत्र बनवाने के लिए 20 रुपये शुल्क लिया जाता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण की निर्धारित प्रारंभिक अवधि के भीतर प्रमाणपत्र बनवाने पर पहले की तरह कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार जन्म अथवा मृत्यु की घटना के 21 दिनों के भीतर पंजीकरण और प्रमाणपत्र जारी कराने पर नागरिकों को कोई शुल्क नहीं देना होगा। सरकार ने इस व्यवस्था को यथावत रखा है ताकि लोग समय पर पंजीकरण कराएं और उन्हें किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े। अधिकारियों का कहना है कि समय पर पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह छूट जारी रखी गई है।
नई शुल्क व्यवस्था के तहत यदि निर्धारित समय सीमा के बाद प्रमाणपत्र बनवाया जाता है तो अब पहले की तुलना में अधिक शुल्क देना होगा। पहले ऐसे मामलों में 20 रुपये का शुल्क निर्धारित था, जिसे अब बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है। वहीं, यदि जन्म या मृत्यु की घटना के एक वर्ष से अधिक समय बाद प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया पूरी की जाती है, तो इसके लिए 100 रुपये का शुल्क देय होगा। इस प्रकार देर से आवेदन करने वालों पर पहले की अपेक्षा अधिक शुल्क लागू होगा।
यह संशोधित शुल्क व्यवस्था 19 जून को जारी शासनादेश के आधार पर लागू की गई है। शासन ने संबंधित अधिकारियों को आदेश जारी कर नई व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था के तहत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) संबंधित जिले में पंजीयक की भूमिका निभाते हैं। शासन की ओर से जारी आदेश पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को भेजा गया, जिसके बाद उन्होंने संबंधित नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत तथा अन्य स्थानीय निकायों को नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश जारी किए।
अधिकारियों के अनुसार जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र नागरिकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं। जन्म प्रमाणपत्र का उपयोग विद्यालय में प्रवेश, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र तथा अन्य सरकारी दस्तावेजों के निर्माण में किया जाता है। वहीं मृत्यु प्रमाणपत्र संपत्ति संबंधी मामलों, बीमा दावों, बैंक खातों के निस्तारण, पेंशन तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक दस्तावेज माना जाता है। ऐसे में नागरिकों को समय पर पंजीकरण कराने की सलाह दी जा रही है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि नई शुल्क व्यवस्था का उद्देश्य पंजीकरण प्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाना और लोगों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन करने के लिए प्रेरित करना है। यदि लोग जन्म या मृत्यु की घटना के तुरंत बाद पंजीकरण कराते हैं, तो उन्हें न केवल निशुल्क प्रमाणपत्र की सुविधा मिलेगी बल्कि भविष्य में दस्तावेजों से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण किसी भी देश की नागरिक पंजीकरण प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे जनसंख्या संबंधी आंकड़े तैयार करने, सरकारी योजनाओं की योजना बनाने तथा विभिन्न सामाजिक और प्रशासनिक सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिलती है। इसलिए समय पर पंजीकरण नागरिकों और प्रशासन दोनों के लिए लाभदायक माना जाता है।
अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे जन्म या मृत्यु की घटना होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन करें। यदि किसी कारणवश समय सीमा बीत जाती है, तो उन्हें संशोधित शुल्क के अनुसार आवेदन करना होगा। संबंधित स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य विभाग के कार्यालयों में नई शुल्क सूची लागू कर दी गई है।
प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवेदन करते समय सही जानकारी और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यदि आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि या अपूर्ण जानकारी पाई जाती है तो प्रमाणपत्र जारी होने में विलंब हो सकता है। इसलिए नागरिकों को आवेदन भरते समय पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
नई शुल्क व्यवस्था लागू होने के बाद स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आम जनता को संशोधित नियमों और शुल्क के बारे में जागरूक करें। इसके लिए सूचना पट्ट, कार्यालयों और अन्य माध्यमों से जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है ताकि लोगों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सरकार का कहना है कि समय पर पंजीकरण को बढ़ावा देना इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। यदि नागरिक 21 दिनों के भीतर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण करा लेते हैं, तो उन्हें प्रमाणपत्र पूरी तरह निशुल्क मिलेगा। वहीं निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन करने पर संशोधित शुल्क लागू होगा। प्रशासन ने लोगों से समयबद्ध पंजीकरण कराने की अपील करते हुए कहा है कि इससे न केवल अतिरिक्त शुल्क से बचा जा सकेगा, बल्कि भविष्य में विभिन्न सरकारी और कानूनी कार्यों के लिए आवश्यक दस्तावेज भी समय पर उपलब्ध हो सकेंगे।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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