Skin disease : हापुड़ में लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु अलर्ट जारी, पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील ?

Skin disease : हापुड़ में लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु अलर्ट जारी, पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील

Skin disease : हापुड़ में लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु अलर्ट जारी, पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील
Skin disease : हापुड़ में लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु अलर्ट जारी, पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील

हापुड़। उत्तराखण्ड राज्य में कुछ गोवंशीय पशुओं में लम्पी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) के लक्षण मिलने के बाद हापुड़ जनपद में पशुपालन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने पशुपालकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए गोवंशीय पशुओं की खरीद-फरोख्त में सावधानी बरतने तथा बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सा विभाग को सूचना देने की अपील की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनपद में उपलब्ध सभी 48 हजार वैक्सीन डोज़ का उपयोग करते हुए निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप 48,000 गोवंशीय पशुओं का टीकाकरण पूरा कर लिया गया है।

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने बताया कि लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित (वायरल) रोग है, जो मुख्य रूप से गोवंशीय पशुओं को प्रभावित करता है। यह बीमारी पशुओं के स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। इसलिए समय रहते इसकी पहचान और रोकथाम बेहद आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी से संक्रमित पशुओं में शुरुआत में तेज बुखार आता है। इसके बाद आंख और नाक से लगातार पानी बहना, पैरों में सूजन, पूरे शरीर पर कठोर और चपटी गांठें बनना तथा त्वचा पर उभरे हुए घाव जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मामलों में सिर, गर्दन, थूथन, थनों, गुदा, अंडकोष अथवा योनिमुख के आसपास बड़ी संख्या में गांठें विकसित हो जाती हैं, जिससे पशु को अत्यधिक पीड़ा होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार गंभीर संक्रमण की स्थिति में शरीर पर नेक्रोटिक घाव बनने लगते हैं। यदि संक्रमण श्वसन तंत्र तक पहुंच जाए तो पशु को सांस लेने में भी कठिनाई होने लगती है। लगातार बीमारी के कारण पशु का वजन कम होने लगता है, शरीर कमजोर हो जाता है और समय पर उपचार न मिलने की स्थिति में उसकी मृत्यु भी हो सकती है। गर्भवती पशुओं में गर्भपात तथा दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन में भारी कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।

डॉ. मिश्रा ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य में बीमारी के कुछ मामले सामने आने के बाद हापुड़ जनपद में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और पशुपालकों को बाहरी राज्यों अथवा समीपवर्ती जनपदों से गोवंशीय पशुओं की खरीद फिलहाल टालने की सलाह दी गई है। उनका कहना है कि बिना स्वास्थ्य परीक्षण के पशुओं की खरीद संक्रमण फैलने का कारण बन सकती है।

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी ने जानकारी दी कि शासन से प्राप्त 48,000 वैक्सीन के लक्ष्य के अनुरूप जनपद के 48,000 गोवंशीय पशुओं का सफल टीकाकरण पूरा कर लिया गया है। पशुपालन विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर अभियान चलाया और पशुपालकों के सहयोग से निर्धारित लक्ष्य समय पर पूरा किया। उन्होंने इसे विभाग और पशुपालकों के संयुक्त प्रयास का परिणाम बताया।

विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी गोवंशीय पशु में तेज बुखार, शरीर पर गांठें, आंख या नाक से पानी गिरना, पैरों में सूजन, कमजोरी या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखें और तुरंत नजदीकी पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क करें। समय पर सूचना मिलने से बीमारी के प्रसार को रोका जा सकता है और संक्रमित पशु का उपचार भी शीघ्र शुरू किया जा सकता है।

Skin disease : हापुड़ में लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु अलर्ट जारी, पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील
Skin disease : हापुड़ में लम्पी स्किन डिजीज से बचाव हेतु अलर्ट जारी, पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील

पशुपालन विभाग ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। किसी भी प्रकार की सूचना या सहायता के लिए पशुपालक 0122-2980035 अथवा 9454449856 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त जनपद के आईसीसीसी (ICCC) कंट्रोल रूम के माध्यम से भी आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लम्पी स्किन डिजीज मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों और अन्य रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैल सकती है। इसलिए पशुशालाओं की नियमित सफाई, कीट नियंत्रण, स्वच्छ वातावरण और संक्रमित पशुओं को अलग रखना संक्रमण की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पशुपालकों को पशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच भी कराते रहना चाहिए।

पशुपालन विभाग ने यह भी सलाह दी है कि पशुओं को पौष्टिक आहार, पर्याप्त स्वच्छ पानी और साफ-सुथरा वातावरण उपलब्ध कराया जाए। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने से संक्रमण का प्रभाव कम किया जा सकता है। विभाग की टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने कहा कि फिलहाल जनपद में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। इसलिए प्रत्येक पशुपालक की जिम्मेदारी है कि वह विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करे और किसी भी संदिग्ध लक्षण की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दे।

पशुपालन विभाग ने भरोसा दिलाया है कि जनपद में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य गोवंशीय पशुओं को सुरक्षित रखना, बीमारी के प्रसार को रोकना और पशुपालकों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराना है। प्रशासन ने सभी पशुपालकों से सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और केवल अधिकृत चिकित्सकीय सलाह का पालन करने की अपील की है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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