Demand raised : संसद में गूंजा ‘चढ़ावा चोरी’ का मुद्दा, सांसद डिंपल यादव ने उठाई आवाज़, पारदर्शिता और जवाबदेही की उठी मांग

नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान मंदिरों में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे के कथित दुरुपयोग और अनियमितताओं का मुद्दा जोरदार ढंग से सदन में उठा। समाजवादी पार्टी की सांसद श्रीमती डिंपल यादव ने इस विषय को लोकसभा में प्रमुखता से रखते हुए सरकार से मंदिरों में प्राप्त चढ़ावे के रखरखाव, लेखा-जोखा और उपयोग की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह केवल धन से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था और विश्वास से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। यदि कहीं भी चढ़ावे के दुरुपयोग, चोरी या भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
संसद में अपनी बात रखते हुए डिंपल यादव ने कहा कि देशभर के लाखों श्रद्धालु मंदिरों में अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान एवं चढ़ावा अर्पित करते हैं। श्रद्धालुओं की यह अपेक्षा होती है कि उनके द्वारा अर्पित धनराशि और अन्य सामग्री का उपयोग धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों में पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। यदि इस प्रक्रिया में कहीं भी गड़बड़ी होती है तो इससे केवल आर्थिक नुकसान नहीं होता, बल्कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि देश के प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे के संग्रहण, सुरक्षित रखरखाव, लेखा परीक्षण और खर्च की स्पष्ट एवं आधुनिक व्यवस्था लागू की जाए। साथ ही समय-समय पर स्वतंत्र ऑडिट कराए जाएं ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना समाप्त हो सके। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी और नियमित सार्वजनिक रिपोर्टिंग जैसी व्यवस्थाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
डिंपल यादव ने यह भी कहा कि यदि किसी मंदिर या धार्मिक संस्था में चढ़ावे के दुरुपयोग अथवा चोरी की शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए। जांच पूरी होने के बाद यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जवाबदेही तय करना आवश्यक है।
सांसद ने सदन में यह भी कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीति के नजरिए से नहीं बल्कि जनभावनाओं और धार्मिक आस्था से जुड़े विषय के रूप में उठा रहा है। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां ऐसे विषयों पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। इस प्रकार के मामलों को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय सरकार को पारदर्शी तरीके से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

संसद में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने भी जवाबदेही और पारदर्शिता की आवश्यकता पर बल दिया। विपक्ष का कहना था कि देश के विभिन्न हिस्सों से समय-समय पर मंदिरों में चढ़ावे से संबंधित अनियमितताओं की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में स्पष्ट व्यवस्था और प्रभावी निगरानी प्रणाली विकसित करना आवश्यक है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
चर्चा के दौरान यह भी कहा गया कि देश में अनेक बड़े मंदिरों में प्रतिदिन लाखों रुपये का चढ़ावा प्राप्त होता है। ऐसे में धनराशि के सुरक्षित प्रबंधन, सही लेखांकन और निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप उपयोग के लिए मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था बेहद जरूरी है। यदि कहीं भी वित्तीय अनियमितता होती है तो उसका प्रभाव सीधे धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता पर पड़ता है।
डिंपल यादव ने सरकार से यह भी आग्रह किया कि मंदिरों में प्राप्त चढ़ावे के उपयोग संबंधी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाया जाए ताकि आम श्रद्धालु भी यह जान सकें कि उनके द्वारा अर्पित धन का उपयोग किन कार्यों में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता बढ़ने से अफवाहों और विवादों पर भी रोक लगेगी तथा लोगों का विश्वास और मजबूत होगा।
विपक्षी दलों ने सरकार से इस पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की। उनका कहना था कि यदि कहीं भी शिकायतें प्राप्त हुई हैं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी सदन में दी जानी चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस नीति और प्रभावी निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए।
संसद में उठे इस मुद्दे ने धार्मिक संस्थानों के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और सार्वजनिक जवाबदेही पर एक नई बहस को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता और सुशासन सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। आधुनिक तकनीक और नियमित ऑडिट व्यवस्था के माध्यम से चढ़ावे के प्रबंधन को अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है।
फिलहाल संसद के मानसून सत्र में उठे इस मुद्दे ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्ष लगातार इस विषय पर सरकार से जवाब मांग रहा है, जबकि सरकार की ओर से इस संबंध में दिए जाने वाले आधिकारिक जवाब और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सार्वजनिक विमर्श दोनों में महत्वपूर्ण बना रह सकता है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
सभी समाचार देखें सिर्फ अनदेखी खबर सबसे पहले सच के सिवा कुछ नहीं ब्यूरो रिपोर्टर :- अनदेखी खबर ।
YouTube Official Channel Link:
https://youtube.com/@atozcrimenews?si=_4uXQacRQ9FrwN7q
YouTube Official Channel Link:
https://www.youtube.com/@AndekhiKhabarNews
Facebook Official Page Link:
https://www.facebook.com/share/1AaUFqCbZ4/
Whatsapp Group Join Link:
https://chat.whatsapp.com/KuOsD1zOkG94Qn5T7Tus5E?mode=r_c
अनदेखी खबर न्यूज़ पेपर भारत का सर्वश्रेष्ठ पेपर और चैनल है न्यूज चैनल राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, व्यापार और खेल में नवीनतम समाचारों को शामिल करता है। अनदेखी खबर न्यूज चैनल की लाइव खबरें एवं ब्रेकिंग न्यूज के लिए हमारे चैनल को Subscribe, like, share करे।
आवश्यकता :- विशेष सूचना
(प्रदेश प्रभारी)
(मंडल प्रभारी)
(जिला ब्यूरो प्रमुख)
(जिला संवाददाता)
(जिला क्राइम रिपोर्टर)
(जिला मीडिया प्रभारी जिला)
(विज्ञापन प्रतिनिधि)
(तहसील ब्यूरो)
(प्रमुख तहसील संवाददाता