
लखनऊ।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मोहित बेनीवाल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट कर मुजफ्फरनगर का नाम बदलकर “लक्ष्मीनगर” किए जाने की मांग एक बार फिर उनके समक्ष रखी। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री को एक पत्र भी सौंपा, जिसमें मुजफ्फरनगर का नाम बदलने के पक्ष में सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक आधार प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कहा कि यह केवल नाम परिवर्तन का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के दौरान मोहित बेनीवाल ने कहा कि मुजफ्फरनगर का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रहा है। उनका मानना है कि क्षेत्र का नया नाम उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को और अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र में इस विषय पर विस्तार से अपने विचार रखे और अनुरोध किया कि इस मांग पर सकारात्मक विचार किया जाए।
मोहित बेनीवाल ने कहा कि महाभारत काल से जुड़े पवित्र शुक्रताल की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता पूरे देश में प्रसिद्ध है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उनका कहना था कि यदि जिले का नाम “लक्ष्मीनगर” रखा जाता है तो यह क्षेत्र की प्राचीन पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान देने का कार्य करेगा।
उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया कि मुजफ्फरनगर केवल ऐतिहासिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि कृषि और व्यापार के क्षेत्र में भी प्रदेश के प्रमुख जिलों में शामिल है। गन्ना उत्पादन, कृषि आधारित उद्योग, मंडी व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों के कारण यह जिला आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उनके अनुसार “लक्ष्मीनगर” नाम क्षेत्र की समृद्धि, विकास और आर्थिक प्रगति का भी प्रतीक बन सकता है।
एमएलसी मोहित बेनीवाल ने कहा कि भारत के विभिन्न राज्यों में समय-समय पर अनेक शहरों और जिलों के नाम उनकी ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप बदले गए हैं। उनका मानना है कि ऐसे निर्णय स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होते हैं। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर के संदर्भ में भी इसी दृष्टिकोण से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि “लक्ष्मीनगर” नाम केवल एक प्रशासनिक परिवर्तन नहीं होगा, बल्कि यह क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता, धार्मिक महत्व और सांस्कृतिक गौरव को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। उनके अनुसार यह नाम क्षेत्र के इतिहास, आध्यात्मिक परंपरा और विकास यात्रा को एक नई पहचान प्रदान करेगा।

मुलाकात के दौरान मोहित बेनीवाल ने मुख्यमंत्री को यह भी अवगत कराया कि इस मांग को लेकर पहले भी विभिन्न स्तरों पर विचार-विमर्श किया जा चुका है और अब इसे पुनः प्रमुखता से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव का अध्ययन कर उचित निर्णय लेगी।
शुक्रताल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह स्थान भारतीय धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है। अनेक श्रद्धालु यहां प्रतिवर्ष दर्शन और धार्मिक आयोजनों में भाग लेने आते हैं। उनका मानना है कि जिले की पहचान इस ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहर से भी जुड़ी हुई है, जिसे नाम परिवर्तन के माध्यम से और अधिक व्यापक रूप से स्थापित किया जा सकता है।
एमएलसी ने कहा कि मुजफ्फरनगर की पहचान केवल एक प्रशासनिक इकाई के रूप में नहीं, बल्कि एक समृद्ध सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में भी है। यहां की कृषि, व्यापार, सामाजिक समरसता और ऐतिहासिक महत्व प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। ऐसे में “लक्ष्मीनगर” नाम क्षेत्र की सकारात्मक छवि और गौरवशाली परंपरा को नई दिशा देगा।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र के विकास और पहचान को मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण आवश्यक है। यदि किसी स्थान का नाम उसके इतिहास और परंपरा के अनुरूप हो, तो आने वाली पीढ़ियों को भी अपने क्षेत्र की विरासत के बारे में जानकारी प्राप्त होती है और उनमें सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना विकसित होती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई इस शिष्टाचार भेंट के दौरान विभिन्न जनहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई। हालांकि नाम परिवर्तन के संबंध में सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक घोषणा या निर्णय सामने नहीं आया है।
राज्य में किसी जिले या शहर का नाम बदलने की प्रक्रिया निर्धारित प्रशासनिक और विधिक प्रक्रियाओं के तहत पूरी की जाती है। ऐसे प्रस्तावों पर संबंधित विभागों द्वारा विचार, आवश्यक औपचारिकताएं और केंद्र सरकार सहित अन्य सक्षम प्राधिकारियों की स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं लागू होती हैं। इसलिए इस संबंध में अंतिम निर्णय सरकार द्वारा सभी आवश्यक प्रक्रियाओं के बाद ही लिया जाता है।
फिलहाल एमएलसी मोहित बेनीवाल द्वारा मुख्यमंत्री को सौंपे गए पत्र के माध्यम से मुजफ्फरनगर का नाम “लक्ष्मीनगर” किए जाने की मांग एक बार फिर चर्चा में आ गई है। अब इस प्रस्ताव पर आगे क्या निर्णय होता है, यह सरकार की आधिकारिक प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं इस विषय को लेकर विभिन्न सामाजिक, ऐतिहासिक और स्थानीय स्तर पर भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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