College website : मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट महीनों से अपडेट नहीं, पूर्व प्राचार्य की जानकारी अब भी प्रदर्शित होने पर सवाल ?

College website : मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट महीनों से अपडेट नहीं, पूर्व प्राचार्य की जानकारी अब भी प्रदर्शित होने पर सवाल ?
College website : मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट महीनों से अपडेट नहीं, पूर्व प्राचार्य की जानकारी अब भी प्रदर्शित होने पर सवाल ?

सुलतानपुर।

डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस के दौर में सरकारी संस्थानों की वेबसाइट आम नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना माध्यम बन चुकी हैं। लोगों को उम्मीद रहती है कि किसी सरकारी विभाग या संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी वर्तमान स्थिति के अनुरूप, प्रमाणिक और नियमित रूप से अपडेट की जाती होगी। लेकिन सुलतानपुर स्थित स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।

आरोप है कि मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर कई महत्वपूर्ण जानकारियां लंबे समय से अपडेट नहीं की गई हैं। वेबसाइट के “Principal’s Message” अनुभाग में आज भी पूर्व प्राचार्य डॉ. सलिल कुमार श्रीवास्तव का नाम, फोटो और संदेश प्रदर्शित हो रहा है, जबकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे फरवरी-मार्च 2026 से प्राचार्य पद पर कार्यरत नहीं हैं। वेबसाइट पर पुरानी जानकारी का बने रहना संस्थान की डिजिटल व्यवस्था और वेबसाइट की निगरानी को लेकर सवाल खड़े करता है।

वेबसाइट पर केवल प्राचार्य से संबंधित जानकारी ही सवालों के घेरे में नहीं है। विभिन्न विभागों की फैकल्टी सूची भी वर्तमान स्थिति के अनुरूप अपडेट नहीं होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में वेबसाइट देखने वाले विद्यार्थियों, अभिभावकों, मरीजों और आम नागरिकों को संस्थान की वर्तमान प्रशासनिक एवं शैक्षणिक व्यवस्था के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने में कठिनाई हो सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण सवाल सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 से जुड़ी जानकारी को लेकर उठाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि वेबसाइट पर नामित जन सूचना अधिकारी यानी पीआईओ और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी से संबंधित आवश्यक विवरण स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं हैं। आरटीआई व्यवस्था के तहत नागरिकों को संबंधित अधिकारियों की जानकारी मिलना जरूरी है, ताकि वे कानून के तहत अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकें।

यदि किसी सरकारी संस्थान की वेबसाइट पर जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी की जानकारी उपलब्ध नहीं है या पुरानी जानकारी प्रदर्शित हो रही है, तो इससे सूचना प्राप्त करने के इच्छुक नागरिकों को परेशानी हो सकती है। विशेष रूप से वे लोग जो संस्थान से संबंधित प्रशासनिक, वित्तीय, शैक्षणिक या अन्य विषयों पर सूचना मांगना चाहते हैं, उनके सामने सही अधिकारी तक पहुंचने की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

सरकारी संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट को आमतौर पर सूचनाओं का विश्वसनीय और प्रमाणिक स्रोत माना जाता है। संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था, अधिकारियों के नाम, संपर्क नंबर, ई-मेल, विभागवार जानकारी, फैकल्टी विवरण, महत्वपूर्ण सूचनाएं और आरटीआई से संबंधित विवरण आम नागरिकों के लिए उपयोगी होते हैं। इसलिए इन जानकारियों का समय-समय पर अद्यतन होना जरूरी है।

मेडिकल कॉलेज जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षण संस्थान की वेबसाइट का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। यहां विद्यार्थी प्रवेश और शैक्षणिक जानकारी के लिए वेबसाइट का उपयोग करते हैं, वहीं मरीज और उनके परिजन विभिन्न विभागों, चिकित्सकों तथा संपर्क माध्यमों की जानकारी प्राप्त करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि वेबसाइट पर पुरानी जानकारी बनी रहे तो लोगों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि वेबसाइट की वर्तमान स्थिति का तत्काल परीक्षण कराया जाना चाहिए। उनका कहना है कि वेबसाइट पर प्रदर्शित प्रत्येक जानकारी का वास्तविक प्रशासनिक व्यवस्था से मिलान किया जाना चाहिए। यदि किसी अधिकारी का स्थानांतरण हो चुका है या किसी पद पर नया अधिकारी नियुक्त हो चुका है, तो वेबसाइट पर पुराने अधिकारी का नाम और फोटो हटाकर वर्तमान अधिकारी की जानकारी प्रदर्शित की जानी चाहिए।

College website : मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट महीनों से अपडेट नहीं, पूर्व प्राचार्य की जानकारी अब भी प्रदर्शित होने पर सवाल ?
College website : मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट महीनों से अपडेट नहीं, पूर्व प्राचार्य की जानकारी अब भी प्रदर्शित होने पर सवाल ?

नागरिकों ने यह भी मांग की है कि

मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर वर्तमान प्राचार्य का नाम, फोटो और संदेश अपडेट किया जाए। इसके साथ ही सभी विभागों की फैकल्टी सूची को भी वर्तमान स्थिति के अनुसार संशोधित किया जाए। इससे विद्यार्थियों, मरीजों और आम नागरिकों को संबंधित विभाग और वहां कार्यरत चिकित्सकों एवं शिक्षकों की सही जानकारी मिल सकेगी।

इसके अलावा वेबसाइट पर लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय प्राधिकारी का नाम, पदनाम, कार्यालय का पता और संपर्क विवरण स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने की मांग की गई है। आरटीआई से जुड़ी जानकारी को आसानी से खोजे जाने योग्य बनाने की भी जरूरत बताई गई है, ताकि सूचना का अधिकार कानून के तहत आवेदन करने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो।

नागरिकों का कहना है कि सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। वर्तमान समय में डिजिटल माध्यम प्रशासन और जनता के बीच संवाद का महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है। इसलिए सरकारी वेबसाइटों पर उपलब्ध सूचनाओं की शुद्धता और अद्यतन स्थिति भी प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा है।

यदि किसी संस्थान की वेबसाइट महीनों तक अपडेट नहीं होती, तो इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वेबसाइट की नियमित निगरानी कौन कर रहा है। वेबसाइट पर जानकारी अपडेट करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी या कर्मचारी की है और क्या इसकी समय-समय पर समीक्षा की जाती है, यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न हैं।

मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर पुरानी जानकारी बने रहने से प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासतौर पर जब संस्थान में प्राचार्य स्तर पर बदलाव हो चुका हो, तब वेबसाइट पर पुराने प्राचार्य का नाम और संदेश प्रदर्शित होना वेबसाइट अपडेट प्रक्रिया में कमी की ओर संकेत करता है।

इसी प्रकार विभागवार फैकल्टी सूची का समय पर अपडेट न होना भी विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। चिकित्सा शिक्षा से जुड़े संस्थान में फैकल्टी की जानकारी विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखती है। इसलिए ऐसी जानकारी का सटीक और वर्तमान स्थिति के अनुरूप होना आवश्यक है।

आरटीआई से संबंधित जानकारी का अभाव भी गंभीर विषय माना जा रहा है। सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी संस्थानों के कामकाज के संबंध में जानकारी प्राप्त करने का कानूनी अधिकार देता है। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की जानकारी वेबसाइट पर आसानी से उपलब्ध होना पारदर्शिता की दृष्टि से उपयोगी है।

जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि वेबसाइट की व्यापक समीक्षा कराई जाए। वेबसाइट पर उपलब्ध प्रत्येक पेज और सूचना की जांच की जाए और जहां भी पुरानी अथवा अपूर्ण जानकारी हो, उसे तत्काल संशोधित किया जाए। साथ ही भविष्य में वेबसाइट को नियमित रूप से अपडेट रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

नागरिकों का कहना है कि वेबसाइट अपडेट करने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। किसी अधिकारी के स्थानांतरण, नई नियुक्ति, विभागीय बदलाव या अन्य प्रशासनिक परिवर्तन के बाद संबंधित जानकारी को निर्धारित समयसीमा में वेबसाइट पर अपडेट किया जाना चाहिए। इससे डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक प्रशासनिक स्थिति के बीच अंतर नहीं रहेगा।

इसके अलावा वेबसाइट पर अधिकारियों के दूरभाष नंबर, ई-मेल पते और कार्यालय संबंधी संपर्क जानकारी भी सही एवं सक्रिय होनी चाहिए। इससे मरीजों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और अन्य नागरिकों को आवश्यक जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी।

डिजिटल व्यवस्था के इस दौर में सरकारी वेबसाइट केवल एक औपचारिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म नहीं रह गई है। यह संस्थान की सार्वजनिक पहचान और सूचना व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए वेबसाइट पर गलत, पुरानी या अधूरी जानकारी लंबे समय तक बनी रहना प्रशासनिक दृष्टि से गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि यदि वेबसाइट को नियमित रूप से अपडेट किया जाए तो इससे संस्थान की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। साथ ही नागरिकों को भी सही जानकारी प्राप्त करने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी।

अब देखना यह होगा कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन वेबसाइट पर प्रदर्शित पुरानी जानकारियों को लेकर क्या कदम उठाता है और इसे वर्तमान स्थिति के अनुरूप कब तक अपडेट किया जाता है। नागरिकों की मांग है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर वेबसाइट का परीक्षण कराया जाए और सभी आवश्यक प्रशासनिक एवं शैक्षणिक विवरण संशोधित किए जाएं।

फिलहाल मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर पुरानी जानकारी के बने रहने का मामला संस्थान की डिजिटल निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि वेबसाइट को तत्काल अपडेट कर वर्तमान प्राचार्य, विभागवार फैकल्टी, लोक सूचना अधिकारी, प्रथम अपीलीय प्राधिकारी, प्रशासनिक अधिकारियों के नाम, संपर्क नंबर और ई-मेल सहित सभी आवश्यक सूचनाएं प्रमाणिक रूप से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की व्यवस्था आम नागरिकों के लिए वास्तव में उपयोगी और भरोसेमंद साबित हो सके।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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