Kilometre-long track proposed : दिल्ली से ऋषिकेश तक नमो भारत परियोजना का सर्वे शुरू, उत्तराखंड में 78 किलोमीटर ट्रैक प्रस्तावित ?

Kilometre-long track proposed : दिल्ली से ऋषिकेश तक नमो भारत परियोजना का सर्वे शुरू, उत्तराखंड में 78 किलोमीटर ट्रैक प्रस्तावित ?
Kilometre-long track proposed : दिल्ली से ऋषिकेश तक नमो भारत परियोजना का सर्वे शुरू, उत्तराखंड में 78 किलोमीटर ट्रैक प्रस्तावित ?

देहरादून/हरिद्वार।

उत्तराखंड की कनेक्टिविटी को नई दिशा और गति देने वाली प्रस्तावित दिल्ली-मेरठ-हरिद्वार-ऋषिकेश नमो भारत परियोजना अब प्रारंभिक सर्वे के चरण में आगे बढ़ रही है। लंबे समय से चर्चा में रही इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना के उत्तराखंड हिस्से में फील्ड सर्वे का काम शुरू हो गया है। परियोजना के तहत उत्तराखंड में प्रस्तावित लगभग 78 किलोमीटर रेल ट्रैक के लिए विभिन्न स्तरों पर जरूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

इस परियोजना को उत्तराखंड के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से हरिद्वार तथा ऋषिकेश जैसे धार्मिक एवं पर्यटन केंद्रों को तेज रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने की संभावना है। परियोजना के प्रस्तावित स्वरूप के पूरा होने पर यात्रियों को आधुनिक और तेज परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।

जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड में प्रस्तावित रेल ट्रैक के सर्वे के लिए राज्य सरकार की ओर से लगभग 7.5 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। इसमें से पहली किस्त के रूप में लगभग 2.28 करोड़ रुपये राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को जारी किए जा चुके हैं। राशि जारी होने के बाद परियोजना से जुड़े प्रारंभिक तकनीकी और मैदानी कार्यों को गति मिली है।

सर्वे के दौरान केवल रेल लाइन के संभावित मार्ग का निरीक्षण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि परियोजना से संबंधित कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। इसके अंतर्गत फील्ड निरीक्षण, मृदा परीक्षण, भूमि से संबंधित जानकारी, मौजूदा यूटिलिटी और संभावित निर्माण क्षेत्र की स्थिति का अध्ययन किया जाएगा। सर्वे से प्राप्त जानकारी परियोजना की विस्तृत योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 150 किलोमीटर बताई गई है। इसमें लगभग 72 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश और करीब 78 किलोमीटर हिस्सा उत्तराखंड में प्रस्तावित है। इस तरह परियोजना दोनों राज्यों के बीच आधुनिक रेल कनेक्टिविटी का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

प्रस्तावित मार्ग के अनुसार नमो भारत कॉरिडोर मेरठ से सकौती, खतौली, मुजफ्फरनगर, पुरकाजी, रुड़की, भगवानपुर, हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश तक पहुंचाने की योजना है। ऋषिकेश में अंतिम स्टेशन को लक्ष्मण झूला के आसपास प्रस्तावित किया गया है। हालांकि, अभी परियोजना सर्वे और प्रस्तावित योजना के चरण में है, इसलिए अंतिम रूट और स्टेशन की स्थिति आगे की स्वीकृतियों तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।

परियोजना का सबसे बड़ा संभावित लाभ दिल्ली-एनसीआर और उत्तराखंड के बीच यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना हो सकता है। वर्तमान में दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों से हरिद्वार तथा ऋषिकेश जाने वाले यात्रियों को सड़क और मौजूदा रेल सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के कारण यात्रा के दौरान समय और यातायात का दबाव भी देखने को मिलता है।

यदि प्रस्तावित परियोजना अपने निर्धारित स्वरूप में आगे बढ़ती है तो यात्रियों को तेज और आधुनिक रेल सेवा का विकल्प मिल सकता है। इससे धार्मिक यात्राओं के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

हरिद्वार देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है, जबकि ऋषिकेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर योग, आध्यात्मिकता और पर्यटन के लिए जाना जाता है। इन दोनों शहरों तक बेहतर कनेक्टिविटी होने से उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यात्रा अधिक सुगम हो सकती है।

Kilometre-long track proposed : दिल्ली से ऋषिकेश तक नमो भारत परियोजना का सर्वे शुरू, उत्तराखंड में 78 किलोमीटर ट्रैक प्रस्तावित ?
Kilometre-long track proposed : दिल्ली से ऋषिकेश तक नमो भारत परियोजना का सर्वे शुरू, उत्तराखंड में 78 किलोमीटर ट्रैक प्रस्तावित ?

परियोजना का प्रभाव केवल हरिद्वार और ऋषिकेश तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। प्रस्तावित मार्ग में मेरठ, सकौती, खतौली, मुजफ्फरनगर, पुरकाजी, रुड़की और भगवानपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र भी शामिल हैं। इन क्षेत्रों के बीच तेज परिवहन संपर्क मजबूत होने से व्यापारिक गतिविधियों और लोगों की आवाजाही को लाभ मिल सकता है।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में पर्यटन और धार्मिक यात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक हरिद्वार, ऋषिकेश तथा राज्य के अन्य हिस्सों में पहुंचते हैं। बेहतर परिवहन व्यवस्था से पर्यटकों के लिए यात्रा की सुविधा बढ़ सकती है और पर्यटन आधारित व्यवसायों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

चारधाम यात्रा के संदर्भ में भी बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि प्रस्तावित नमो भारत कॉरिडोर सीधे चारधाम मार्ग का विकल्प नहीं होगा, लेकिन दिल्ली-एनसीआर और हरिद्वार-ऋषिकेश के बीच तेज संपर्क यात्रियों के लिए शुरुआती यात्रा को अधिक सुविधाजनक बना सकता है। इससे आगे सड़क मार्ग से पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोगों को भी लाभ मिल सकता है।

परियोजना के सर्वे चरण में भूमि और यूटिलिटी से जुड़ी जानकारी जुटाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। किसी भी बड़ी रेल परियोजना के लिए भूमि की उपलब्धता, मौजूदा सड़क और रेल नेटवर्क, बिजली एवं पानी की लाइनें तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं की स्थिति का अध्ययन जरूरी होता है। सर्वे के दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर आगे की तकनीकी योजना तैयार की जाएगी।

मृदा परीक्षण भी परियोजना की दृष्टि से महत्वपूर्ण चरण है। इससे संभावित रेल निर्माण क्षेत्रों की भौगोलिक और तकनीकी स्थिति को समझने में मदद मिलेगी। सर्वे और तकनीकी अध्ययन पूरा होने के बाद परियोजना के निर्माण से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकेंगे।

फिलहाल परियोजना को लेकर अंतिम निर्माण समयसीमा तय नहीं हुई है। अंतिम रूट, स्टेशन, निर्माण की लागत, चरणबद्ध विकास और निर्माण कार्यक्रम जैसी जानकारियां आगे की स्वीकृतियों तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होंगी। इसलिए वर्तमान में इसे प्रस्तावित और सर्वे चरण की परियोजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

फिर भी उत्तराखंड के लिए इस परियोजना की शुरुआत को महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। सर्वे कार्य शुरू होने से प्रस्तावित कॉरिडोर की व्यवहारिकता और तकनीकी संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन किया जा सकेगा। इसके बाद परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया निर्धारित होगी।

कल्पना कीजिए कि भविष्य में दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार और ऋषिकेश तक यात्रा तेज, आधुनिक और सुविधाजनक रेल सेवा के माध्यम से की जा सके। इससे यात्रियों का समय बच सकता है और उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक तथा पर्यटन केंद्रों तक पहुंच और आसान हो सकती है।

यह परियोजना केवल रेल लाइन बिछाने की योजना नहीं, बल्कि उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने की संभावित पहल है। इसके माध्यम से यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है।

हालांकि, परियोजना अभी सर्वे और प्रस्तावित चरण में है। इसलिए अंतिम रूट, स्टेशन और निर्माण की समयसीमा को लेकर किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और आवश्यक स्वीकृतियों के बाद इसकी वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

फिलहाल उत्तराखंड में प्रस्तावित 78 किलोमीटर हिस्से के फील्ड सर्वे की शुरुआत को परियोजना की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यदि योजना आगे बढ़ती है और प्रस्तावित कॉरिडोर वास्तविकता में बदलता है, तो दिल्ली-एनसीआर से हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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