
नई दिल्ली।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) की ओर से विभिन्न मांगों को लेकर जंतर-मंतर पर प्रस्तावित शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं की हिरासत का मामला सामने आया है। संगठन का आरोप है कि कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जंतर-मंतर पहुंचने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पहले से तैनात दिल्ली पुलिस ने कई पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर नरेला थाना भेज दिया। संगठन ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सवाल उठाया है कि क्या अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना भी अपराध है।
महासभा के अनुसार, प्रदर्शन के प्रमुख मुद्दों में यूजीसी से संबंधित नीतियों को वापस लेने की मांग, जातिगत आरक्षण व्यवस्था में सुधार तथा एससी-एसटी एक्ट में संशोधन सहित विभिन्न विषय शामिल थे। संगठन का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर पदाधिकारी और कार्यकर्ता अपनी मांगों को सरकार और संबंधित अधिकारियों के समक्ष शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते थे।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) की ओर से कहा गया कि कार्यकर्ता किसी हिंसक गतिविधि के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से रखने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे थे। संगठन का दावा है कि प्रदर्शन से पहले ही पुलिस की कार्रवाई शुरू हो गई और कई पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया गया। इसके बाद संगठन ने इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई और इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत बताया।
संगठन के अनुसार, हिरासत में लिए गए पदाधिकारियों में पश्चिमी प्रदेश अध्यक्ष पं. ब्रिजेन्द्र शर्मा, दिनेश शर्मा, सुशीला शर्मा, पश्चिम प्रदेश अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ पंडित राहुल शर्मा, प्रभारी पश्चिम उत्तर प्रदेश, जिला अध्यक्ष गाजियाबाद पंडित रामकृष्ण शर्मा, जिला अध्यक्ष गौतम बुद्ध नगर पंडित अरविंद शुक्ला, पंडित राजेंद्र तिवारी, पंडित महेश गौड़, जिला महासचिव श्रीमती मनोज कुमारी, जिला महासचिव अनीता शर्मा, जिला उपाध्यक्ष गाजियाबाद पंडित महेश शर्मा, जिला सचिव पंडित प्रभात शर्मा, जिला उपाध्यक्ष हापुड़ पंडित करण शर्मा, मंडलीय सचिव पंडित गौरव शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष गढ़मुक्तेश्वर पंडित मांगू शर्मा, डॉ. हर्षवर्धन शर्मा, जिला संरक्षक पंडित मनोहर लाल शर्मा, जिला सचिव हापुड़ श्री भगवान शर्मा सहित अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे।
महासभा का कहना है कि बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर धरने पर डटे रहे। संगठन ने दावा किया कि कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का प्रयास किया और किसी प्रकार की अव्यवस्था पैदा करने का उद्देश्य नहीं था।
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दिन सुबह से ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दिल्ली, फिरोजाबाद, शामली, हापुड़ और मेरठ सहित कई क्षेत्रों में जिला अध्यक्षों एवं नगर अध्यक्षों को उनके घरों पर ही हाउस अरेस्ट कर दिया गया। महासभा के अनुसार, इस कार्रवाई के कारण कई पदाधिकारी प्रदर्शन स्थल तक नहीं पहुंच सके।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई संगठन अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने रखना चाहता है तो उसे अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों के अधिकारों से जोड़ते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अपनी मांगों को सामने रखना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
महासभा ने कहा कि उसके कार्यकर्ताओं की मांगों को केवल संगठनात्मक मुद्दे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि संबंधित नीतियों और कानूनों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। संगठन की ओर से यूजीसी से संबंधित मुद्दों, आरक्षण व्यवस्था में सुधार और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग उठाई गई है। संगठन का कहना है कि इन विषयों पर सरकार और संबंधित संस्थाओं को सभी पक्षों की बात सुनकर संवाद के माध्यम से समाधान तलाशना चाहिए।
संगठन ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग को भी प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा बताया। महासभा का कहना है कि आरक्षण से जुड़े विषय पर व्यापक सामाजिक और संवैधानिक विमर्श आवश्यक है। संगठन अपने विचारों को सरकार के सामने रखने के लिए लोकतांत्रिक माध्यमों का इस्तेमाल करना चाहता है।

इसी तरह एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर भी संगठन ने अपनी बात रखी। महासभा का कहना है कि किसी भी कानून के प्रभाव और उसके क्रियान्वयन को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं पर चर्चा होनी चाहिए। संगठन ने मांग की कि इन विषयों पर सरकार और संबंधित संस्थाएं प्रतिनिधियों के साथ संवाद करें।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) ने कहा कि वह अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाली नहीं है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने और निर्धारित लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत अपनी बात रखने की अपील की।
संगठन की ओर से यह सवाल भी उठाया गया कि यदि प्रदर्शनकारियों को पहले ही हिरासत में ले लिया जाए या पदाधिकारियों को घरों में नजरबंद कर दिया जाए तो वे अपनी बात किस मंच पर रखेंगे। महासभा ने कहा कि असहमति लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विभिन्न विचारों को सामने रखने की व्यवस्था लोकतांत्रिक समाज की पहचान है।
महासभा के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि अपनी मांगों को सरकार और समाज के सामने रखना है। उन्होंने कहा कि संगठन अपने विचारों को शांतिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करता रहेगा और संबंधित अधिकारियों से संवाद की मांग करेगा।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली पुलिस की ओर से हिरासत और कथित हाउस अरेस्ट की कार्रवाई के कारणों को लेकर आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और किसी भी प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों एवं अनुमति की प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। ऐसे में कार्रवाई किन परिस्थितियों में की गई, यह संबंधित अधिकारियों के स्पष्टीकरण से स्पष्ट हो सकेगा।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) ने अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि संगठन अपने मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष करता रहेगा। महासभा ने कहा कि कार्यकर्ता न तो डरेंगे और न ही अपनी मांगों को लेकर पीछे हटेंगे। संगठन का कहना है कि वह लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी आवाज उठाता रहेगा।
महासभा ने समाज के लोगों से भी अपने मुद्दों पर शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से चर्चा करने की अपील की। संगठन के अनुसार, किसी भी सामाजिक या नीतिगत विषय का समाधान संवाद, विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से ही बेहतर तरीके से निकाला जा सकता है।
जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और कार्यकर्ताओं की हिरासत के बाद अब यह मामला संगठन और प्रशासन के बीच संवाद का विषय बन गया है। एक ओर संगठन अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कर रहा है, वहीं प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था और प्रदर्शन से जुड़े नियमों के आधार पर कार्रवाई की गई होगी। ऐसे में आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की बातचीत और आधिकारिक स्पष्टीकरण से स्पष्ट हो सकेगी।
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा (रा.) ने अंत में दोहराया कि वह अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी। संगठन का संदेश है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और विभिन्न मुद्दों पर संवाद की प्रक्रिया जारी रहनी चाहिए। महासभा ने कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है और यूजीसी, आरक्षण व्यवस्था तथा एससी-एसटी एक्ट से जुड़े अपने मुद्दों को लेकर आगे भी अपनी आवाज उठाती रहेगी।
“हम न डरे हैं, न डरेंगे, लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे”— संगठन ने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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