Cabinet approval : उत्तराखंड को 1320 मेगावाट बिजली देगा छत्तीसगढ़ का अडानी पावर प्लांट, 25 साल के करार को कैबिनेट की मंजूरी ?

Cabinet approval : उत्तराखंड को 1320 मेगावाट बिजली देगा छत्तीसगढ़ का अडानी पावर प्लांट, 25 साल के करार को कैबिनेट की मंजूरी ?
Cabinet approval : उत्तराखंड को 1320 मेगावाट बिजली देगा छत्तीसगढ़ का अडानी पावर प्लांट, 25 साल के करार को कैबिनेट की मंजूरी ?

देहरादून।

उत्तराखंड सरकार ने राज्य की दीर्घकालिक बिजली जरूरतों को पूरा करने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए छत्तीसगढ़ में स्थापित किए जा रहे कोयला आधारित बिजली संयंत्र से बिजली खरीदने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में अडानी पावर लिमिटेड से 1320 मेगावाट बिजली खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह बिजली 25 वर्षों तक उत्तराखंड को उपलब्ध कराई जाएगी।

कैबिनेट के फैसले के अनुसार उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी UPCL को अडानी पावर के साथ पावर सप्लाई एग्रीमेंट करने की अनुमति दी गई है। बिजली की दर ₹5.746 प्रति यूनिट तय की गई है। यह दर टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली यानी Tariff-Based Competitive Bidding के माध्यम से तय हुई, जिसमें अडानी पावर को सबसे कम बोली लगाने वाला यानी Lowest Bidder (L-1) बताया गया है।

छत्तीसगढ़ में बनेगा 1320 मेगावाट का प्लांट

उत्तराखंड सरकार के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से राज्य को छत्तीसगढ़ में एक कोल ब्लॉक आवंटित किया गया था। इसी संसाधन का उपयोग करते हुए छत्तीसगढ़ के रायगढ़ क्षेत्र में 1320 मेगावाट क्षमता का कोयला आधारित बिजली संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इस संयंत्र से उत्पादित बिजली उत्तराखंड को उपलब्ध कराई जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य उत्तराखंड की भविष्य की बिजली जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लंबे समय के लिए बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। राज्य सरकार के मुताबिक उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन हाइड्रो पावर उत्पादन मौसम और जल उपलब्धता पर निर्भर करता है। ऐसे में थर्मल पावर से मिलने वाली अतिरिक्त बिजली राज्य की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकती है।

25 साल तक मिलेगी बिजली

सरकार द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव के तहत उत्तराखंड को इस परियोजना से वित्तीय वर्ष 2029-30 से 1320 मेगावाट बिजली मिलने की उम्मीद है। बिजली खरीद का करार 25 वर्षों के लिए होगा। इस अवधि में तय व्यवस्था के अनुसार उत्तराखंड को बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

₹5.746 प्रति यूनिट की दर पर लंबे समय का बिजली खरीद समझौता राज्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से दर निर्धारित किए जाने का उद्देश्य बिजली खरीद में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।

सरकार ने UPCL को पावर सप्लाई एग्रीमेंट पूरा करने और इसके लिए आवश्यक नियामकीय प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति भी दी है। इसके लिए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग यानी UERC से आवश्यक वैधानिक मंजूरियां प्राप्त करनी होंगी।

अडानी पावर सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी

इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि परियोजना के लिए बिजली की दर प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से तय की गई। सरकार के अनुसार अडानी पावर इस प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही। इसी आधार पर उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने कंपनी से बिजली खरीदने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा, जिसे कैबिनेट ने मंजूरी दी।

इसका अर्थ यह है कि उपलब्ध बोली प्रक्रिया में अडानी पावर की पेशकश को सबसे कम टैरिफ वाला प्रस्ताव माना गया। हालांकि अंतिम बिजली खरीद समझौते और नियामकीय स्वीकृतियों के बाद ही पूरी प्रक्रिया औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी।

Cabinet approval : उत्तराखंड को 1320 मेगावाट बिजली देगा छत्तीसगढ़ का अडानी पावर प्लांट, 25 साल के करार को कैबिनेट की मंजूरी ?
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उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों पर सरकार का जोर

उत्तराखंड में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। औद्योगिक गतिविधियों, शहरीकरण, पर्यटन और घरेलू बिजली खपत में वृद्धि के कारण आने वाले वर्षों में राज्य को अधिक बिजली की आवश्यकता होगी। सरकार का मानना है कि केवल मौजूदा बिजली स्रोतों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। इसलिए दीर्घकालिक बिजली खरीद समझौते के माध्यम से भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

राज्य की बिजली व्यवस्था में जलविद्युत का बड़ा योगदान है। हालांकि बारिश और जल प्रवाह में मौसमी बदलाव के कारण हाइड्रो पावर उत्पादन में उतार-चढ़ाव हो सकता है। ऐसे में कोयला आधारित बिजली की अतिरिक्त उपलब्धता बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद कर सकती है।

कोल ब्लॉक के उपयोग को लेकर महत्वपूर्ण फैसला

केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को कोयला आधारित ताप विद्युत परियोजना के लिए कोयला लिंक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी। 2025 में केंद्रीय स्तर पर उत्तराखंड के लिए 1320 मेगावाट के कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट के लिए दीर्घकालिक कोयला लिंक और टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली की योजना का उल्लेख किया गया था।

अब राज्य सरकार ने इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अडानी पावर के साथ बिजली खरीद का रास्ता साफ किया है। इस व्यवस्था में संयंत्र छत्तीसगढ़ में होगा, जबकि बिजली का लाभ उत्तराखंड को मिलेगा।

राज्य को क्या फायदा होगा?

सरकार के मुताबिक इस समझौते से उत्तराखंड को लंबे समय तक एक निश्चित क्षमता की बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। 1320 मेगावाट की बिजली खरीद राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

इसके अलावा लंबे समय के करार से बिजली खरीद की योजना पहले से तय की जा सकेगी। इससे राज्य को भविष्य की बिजली मांग के अनुसार अपने ऊर्जा संसाधनों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलेगी।

सरकार का यह भी मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होने से राज्य के औद्योगिक और आर्थिक विकास को समर्थन मिलेगा। पर्याप्त बिजली उपलब्ध होने से उद्योगों, व्यवसायों और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।

परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया

कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब UPCL को अडानी पावर के साथ पावर सप्लाई एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके साथ ही उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग से आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी।

सरकार के फैसले के अनुसार लक्ष्य है कि वित्तीय वर्ष 2029-30 से उत्तराखंड को इस परियोजना से बिजली मिलनी शुरू हो। इसके लिए संयंत्र निर्माण, बिजली उत्पादन और ट्रांसमिशन से जुड़ी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।

लंबे समय के लिए ऊर्जा सुरक्षा की तैयारी

उत्तराखंड सरकार का यह फैसला राज्य की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। राज्य में जलविद्युत क्षमता के साथ-साथ अन्य स्रोतों से बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।

हालांकि कोयला आधारित बिजली परियोजनाओं को पर्यावरणीय प्रभावों के संदर्भ में भी देखा जाता है। इसलिए परियोजना के संचालन के दौरान पर्यावरणीय मानकों और संबंधित नियमों का पालन महत्वपूर्ण रहेगा।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड कैबिनेट ने अडानी पावर से 1320 मेगावाट कोयला आधारित बिजली खरीदने के 25 वर्षीय समझौते को मंजूरी देकर राज्य की भविष्य की बिजली जरूरतों के लिए एक दीर्घकालिक व्यवस्था की है। ₹5.746 प्रति यूनिट की दर प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से तय हुई है और सरकार के अनुसार अडानी पावर इस प्रक्रिया में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही। छत्तीसगढ़ में स्थापित होने वाले संयंत्र से 2029-30 से उत्तराखंड को बिजली मिलने की योजना है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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