Wall damaged : शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, जर्जर पेड़ गिरने से महिला घायल और मकान की दीवार क्षतिग्रस्त ?

Wall damaged : शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, जर्जर पेड़ गिरने से महिला घायल और मकान की दीवार क्षतिग्रस्त ?
Wall damaged : शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, जर्जर पेड़ गिरने से महिला घायल और मकान की दीवार क्षतिग्रस्त ?

जौनपुर।

खेतासराय थाना क्षेत्र के शाहापुर गांव में वर्षों से जर्जर हालत में खड़े पेड़ के अचानक गिरने से एक महिला घायल हो गई, जबकि उसके मकान की दीवार में दरार पड़ गई। घटना के बाद परिवार को संपत्ति का नुकसान उठाना पड़ा। हादसे ने प्रशासनिक स्तर पर पहले दी गई शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जर्जर पेड़ को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए होते तो संभव है कि यह हादसा टल सकता था।

बताया गया कि शाहापुर गांव निवासी अरुण कुमार तिवारी पुत्र जगदीश प्रसाद तिवारी ने वर्ष 2015 में ही आबादी क्षेत्र में स्थित पुराने और जर्जर पेड़ को लेकर प्रशासन से शिकायत की थी। 22 अगस्त 2015 को संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में पेड़ की जर्जर स्थिति का उल्लेख करते हुए उसे काटने अथवा हटाने की अनुमति दिए जाने की मांग की गई थी।

प्रार्थना पत्र में आशंका जताई गई थी कि पेड़ की कमजोर और जर्जर शाखाएं कभी भी टूटकर गिर सकती हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों और परिवार के सदस्यों की जान-माल को खतरा पैदा हो सकता है। आवेदनकर्ता ने अधिकारियों से मामले की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की थी।

ग्रामीणों के अनुसार शिकायत के बाद संबंधित स्तर पर टिप्पणी और आख्या भी दर्ज की गई थी। पेड़ काटने को लेकर नियमों का हवाला दिए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी मौके पर ऐसी प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे जर्जर पेड़ को हटाया जा सके। परिणामस्वरूप पेड़ वर्षों तक उसी स्थिति में खड़ा रहा।

अब वर्षों बाद वही आशंका एक हादसे के रूप में सामने आई। जर्जर पेड़ अचानक गिर गया और इसकी चपेट में आने से एक महिला घायल हो गई। पेड़ गिरने के कारण मकान की दीवार में दरार पड़ गई। घर के अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। घटना के बाद परिवार में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

गनीमत यह रही कि हादसे में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई। हालांकि महिला के घायल होने और मकान को हुए नुकसान ने परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में भी नाराजगी है। उनका कहना है कि जिस खतरे की जानकारी प्रशासन को करीब एक दशक पहले ही दे दी गई थी, उस पर समय रहते ठोस कदम उठाए जाते तो आज परिवार को इस नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता।

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि वर्ष 2015 में शिकायत मिलने के बाद संबंधित विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी। क्या मौके का स्थलीय निरीक्षण किया गया था और यदि किया गया था तो जर्जर पेड़ को हटाने के लिए आगे की प्रक्रिया क्यों पूरी नहीं हुई? ग्रामीण अब पुराने प्रार्थना पत्र और उस पर हुई कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

पीड़ित परिवार का कहना है कि हादसे में जान बच जाना राहत की बात है, लेकिन मकान की दीवार क्षतिग्रस्त होने से आर्थिक नुकसान हुआ है। परिवार के सामने घर की मरम्मत कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में प्रशासन से तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर नुकसान का आकलन कराने और नियमानुसार आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

Wall damaged : शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, जर्जर पेड़ गिरने से महिला घायल और मकान की दीवार क्षतिग्रस्त ?
Wall damaged : शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई, जर्जर पेड़ गिरने से महिला घायल और मकान की दीवार क्षतिग्रस्त ?

ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व और प्रशासनिक टीम को मौके पर भेजकर क्षति का वास्तविक आकलन कराया जाए। इसके साथ ही यह भी जांच हो कि वर्ष 2015 में दिए गए प्रार्थना पत्र पर किस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी। यदि शिकायत के बाद कोई कार्रवाई लंबित रही या लापरवाही हुई तो उसकी भी जांच की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्रों में पुराने और जर्जर पेड़ों को लेकर प्रशासन को समय-समय पर सर्वे कराना चाहिए। जिन पेड़ों से लोगों के घरों, रास्तों और सार्वजनिक स्थानों पर खतरा उत्पन्न हो सकता है, उनके संबंध में नियमानुसार समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। इससे भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सकता है।

हादसे के बाद गांव में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि यदि पेड़ पहले ही हटा दिया गया होता तो महिला के घायल होने और मकान को हुए नुकसान की स्थिति पैदा नहीं होती। हालांकि, पेड़ काटने से संबंधित नियमों और अनुमति की प्रक्रिया भी लागू होती है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि खतरे की स्थिति में संबंधित विभाग को नियमानुसार त्वरित समाधान निकालना चाहिए था।

मामले में पीड़ित परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिवार का कहना है कि घटना को केवल एक सामान्य हादसा मानकर छोड़ना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे पहले भी पेड़ की जर्जर स्थिति को लेकर लिखित रूप में शिकायत की गई थी। पुराने आवेदन और वर्तमान घटना के बीच के पूरे घटनाक्रम की जांच आवश्यक है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि गांव और आसपास के आबादी क्षेत्रों में ऐसे अन्य जर्जर पेड़ों को चिह्नित किया जाए, जो भविष्य में लोगों के लिए खतरा बन सकते हैं। यदि किसी पेड़ से मकान, सड़क, बिजली लाइन या लोगों की आवाजाही को खतरा है तो संबंधित विभागों के समन्वय से नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने घायल महिला के जल्द स्वस्थ होने की कामना की है। साथ ही परिवार को हुए नुकसान को देखते हुए प्रशासन से राहत दिलाने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पीड़ित परिवार को तत्काल सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वह मकान की मरम्मत और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं कर सके।

प्रशासनिक स्तर पर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्ष 2015 में दिए गए प्रार्थना पत्र पर क्या कार्रवाई हुई थी और उसके बाद पेड़ को लेकर कोई निरीक्षण या रिपोर्ट तैयार की गई थी या नहीं। यदि रिकॉर्ड में शिकायत और कार्रवाई के बीच कोई कमी सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग भी ग्रामीणों की ओर से की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी शिकायत को केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। विशेषकर जब शिकायत में जान-माल के खतरे की आशंका स्पष्ट रूप से व्यक्त की गई हो, तब संबंधित अधिकारियों को मौके की स्थिति का आकलन कर नियमानुसार आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

फिलहाल हादसे के बाद पीड़ित परिवार आर्थिक नुकसान और चिंता की स्थिति से गुजर रहा है। महिला के घायल होने के साथ मकान की दीवार क्षतिग्रस्त होने से परिवार की परेशानी बढ़ गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन मामले का संज्ञान लेकर जल्द मौके का निरीक्षण कराएगा और पीड़ित परिवार को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराएगा।

अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। वर्षों पहले दी गई शिकायत का रिकॉर्ड, उस पर हुई कार्रवाई और वर्तमान हादसे की परिस्थितियों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में कहीं प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही हुई थी या नहीं। फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, नुकसान का आकलन कराया जाए और भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

 

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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