
हापुड़।
किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें पारंपरिक खेती के साथ-साथ लाभकारी शाकभाजी एवं बागवानी फसलों की ओर प्रोत्साहित करने के लिए जिला उद्यान विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत किसानों को खेती की नई तकनीकों, उन्नत फसलों और आवश्यक बीजों की जानकारी एवं सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इसी योजना से लाभान्वित हुए गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के ग्राम रहरवा किरावली निवासी किसान उदयवीर सिंह ने तोरई की खेती कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
किसान उदयवीर सिंह पुत्र सूखा सिंह ने बताया कि वह ग्राम रहरवा किरावली, विकासखंड गढ़मुक्तेश्वर, जनपद हापुड़ के निवासी हैं। उनके पास कुल 1.20 हेक्टेयर भूमि है। पहले वह अपनी जमीन पर मुख्य रूप से धान, गन्ना, गेहूं, ज्वार, मक्का और ग्वार आदि पारंपरिक फसलों की खेती करते थे। इन फसलों से उन्हें अपेक्षाकृत कम उत्पादन और लाभ प्राप्त होता था। खेती से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
उदयवीर सिंह के अनुसार खेती में मेहनत और लागत के बावजूद अपेक्षित लाभ नहीं मिलने के कारण वह आर्थिक रूप से परेशान रहते थे। इसी दौरान उनके गांव में जिला उद्यान विभाग के कर्मचारियों द्वारा खुली बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में किसानों को एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। विभागीय कर्मचारियों ने किसानों को बताया कि पारंपरिक फसलों के साथ-साथ शाकभाजी उत्पादन को अपनाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं।
खुली बैठक के दौरान किसानों को लौकी, करेला, तोरई, भिंडी सहित विभिन्न शाकभाजी फसलों के उत्पादन के संबंध में जानकारी दी गई। किसानों को इन फसलों की खेती, बीज की उपलब्धता और विभागीय योजना के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी बताया गया। उद्यान विभाग के कर्मचारियों ने किसानों को अपनी भूमि और परिस्थितियों के अनुसार लाभकारी फसल का चयन करने के लिए मार्गदर्शन दिया।
उदयवीर सिंह ने बताया कि विभागीय कर्मचारियों द्वारा दी गई जानकारी से उन्हें भी शाकभाजी की खेती करने की प्रेरणा मिली। उन्होंने कर्मचारियों के मार्गदर्शन के अनुसार तोरई की खेती करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में तोरई की खेती के लिए बीज निःशुल्क प्राप्त किया।
निःशुल्क बीज प्राप्त होने के बाद किसान ने विभागीय कर्मचारियों के मार्गदर्शन के अनुसार अपने खेत में तोरई की फसल लगाई। उदयवीर सिंह के लिए यह पारंपरिक खेती से अलग अनुभव था। उन्होंने बताया कि फसल की देखभाल के दौरान उन्हें उद्यान विभाग के कर्मचारियों से आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन मिलता रहा। इसके चलते उन्होंने फसल का बेहतर प्रबंधन किया और तोरई की खेती से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया।
किसान के अनुसार धान, गन्ना, गेहूं और ज्वार जैसी फसलों की तुलना में तोरई की खेती से उन्हें लगभग दो गुना अधिक लाभ प्राप्त हुआ। बेहतर आमदनी होने से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया। उदयवीर सिंह ने बताया कि खेती से प्राप्त अतिरिक्त आय ने उनके परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद की और अब वह अपने परिवार का जीवन-यापन पहले की तुलना में बेहतर तरीके से कर पा रहे हैं।
उदयवीर सिंह की सफलता यह दर्शाती है कि यदि किसानों को खेती से संबंधित सही जानकारी, उपयुक्त फसल का चयन, गुणवत्तापूर्ण बीज और समय पर तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाए तो कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे कम क्षेत्रफल में भी बेहतर आर्थिक लाभ प्राप्त हो सके।

उदयवीर सिंह ने बताया कि पहले वह मुख्य रूप से पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे। हालांकि इन फसलों का अपना महत्व है, लेकिन उन्हें अपनी जमीन से अपेक्षित आमदनी नहीं हो पाती थी। उद्यान विभाग के कर्मचारियों द्वारा गांव में आयोजित खुली बैठक उनके लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। वहां मिली जानकारी के बाद उन्होंने नई फसल अपनाने का निर्णय लिया और तोरई की खेती उनके लिए लाभकारी साबित हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग द्वारा किसानों को योजनाओं की जानकारी गांव स्तर तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। यदि किसानों को समय पर योजनाओं की जानकारी मिले और विभागीय कर्मचारी खेती के संबंध में मार्गदर्शन करते रहें तो अधिक से अधिक किसान नई और लाभकारी फसलों को अपना सकते हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
किसान उदयवीर सिंह ने जिला उद्यान विभाग के कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनसे आगामी वर्षों में भी एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत खेती की नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि खेती में समय के साथ बदलाव जरूरी है। नई तकनीक और नई फसलों के बारे में जानकारी मिलने से किसान बेहतर निर्णय ले सकते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भी उन्हें उद्यान विभाग से आवश्यक मार्गदर्शन मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को फसल के चयन से लेकर उत्पादन और बाजार से संबंधित जानकारी समय-समय पर उपलब्ध होती रहे तो उनकी आर्थिक स्थिति में और सुधार हो सकता है।
उदयवीर सिंह ने गांव के अन्य किसानों से भी सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने और कृषि क्षेत्र में उपलब्ध नए अवसरों का लाभ उठाने की अपील की। उनका कहना है कि किसान केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी भूमि और परिस्थितियों के अनुसार अन्य लाभकारी फसलों का भी उत्पादन कर सकते हैं। इससे खेती में विविधता आएगी और आमदनी बढ़ाने के अवसर मिलेंगे।
जिला उद्यान विभाग का उद्देश्य भी किसानों को बागवानी और शाकभाजी उत्पादन से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि करना है। इसके लिए विभागीय कर्मचारियों द्वारा गांवों में बैठकें आयोजित कर किसानों को योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। किसानों को फसल चयन, बीज उपलब्धता और उत्पादन संबंधी आवश्यक जानकारी देने का प्रयास किया जा रहा है।
एकीकृत बागवानी विकास मिशन के माध्यम से किसानों को विभिन्न शाकभाजी एवं बागवानी फसलों के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग की ओर से किसानों को उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के साथ किसानों की आय और आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है।
किसान उदयवीर सिंह की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही समय पर मिली जानकारी और मार्गदर्शन किसान के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है। पारंपरिक खेती से कम लाभ मिलने के बाद उन्होंने उद्यान विभाग की सलाह पर तोरई की खेती अपनाई और उन्हें लगभग दोगुना लाभ प्राप्त हुआ। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ, बल्कि परिवार का जीवन-यापन भी बेहतर तरीके से हो सका।
उदयवीर सिंह ने कहा कि वह जिला उद्यान विभाग के आभारी हैं, जिसने उन्हें नई फसल अपनाने के लिए प्रेरित किया और योजना के अंतर्गत निःशुल्क बीज उपलब्ध कराया। उन्होंने विभाग से भविष्य में भी इसी प्रकार मार्गदर्शन जारी रखने की अपेक्षा जताई, ताकि वह अपनी खेती को और बेहतर बना सकें।
उन्होंने कहा कि गांव के अन्य किसान भी यदि एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना की जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ उठाएं तो उनकी आमदनी में भी वृद्धि हो सकती है। इसके लिए किसानों को योजनाओं की जानकारी लेने के साथ-साथ विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क बनाए रखना चाहिए।
जिला उद्यान अधिकारी, हापुड़ की ओर से किसानों से अपील की गई है कि वे विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें और अपनी कृषि भूमि के अनुसार लाभकारी फसलों का चयन करें। विभागीय स्तर पर किसानों को उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी देने और उन्हें योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
इस प्रकार गढ़मुक्तेश्वर के ग्राम रहरवा किरावली निवासी किसान उदयवीर सिंह की तोरई की खेती की सफलता ने यह साबित किया है कि कृषि में नई संभावनाओं को अपनाकर किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत मिले निःशुल्क बीज और विभागीय मार्गदर्शन से किसान को पारंपरिक फसलों की अपेक्षा बेहतर लाभ मिला। उदयवीर सिंह अब अपनी खेती को और बेहतर बनाने के लिए नई जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक हैं और अन्य किसानों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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