DM : बरसात में गो आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़ नहीं होने दें, इसी माह शुरू हों नए वृहद गो संरक्षण केंद्र: डीएम ?

DM : बरसात में गो आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़ नहीं होने दें, इसी माह शुरू हों नए वृहद गो संरक्षण केंद्र: डीएम
DM : बरसात में गो आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़ नहीं होने दें, इसी माह शुरू हों नए वृहद गो संरक्षण केंद्र: डीएम

हापुड़, 10 सितंबर। निराश्रित गोवंशों के संरक्षण एवं भरण-पोषण की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से जनपद स्तरीय अनुश्रवण एवं मूल्यांकन समीक्षा समिति की मासिक बैठक जिलाधिकारी श्रीमती कविता मीना की अध्यक्षता में गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जनपद में संचालित गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं, गोवंशों के भरण-पोषण, हरे चारे की उपलब्धता, बरसात के दौरान जलभराव की समस्या, लम्पी बीमारी से बचाव तथा निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में जनपद हापुड़ के सभी खंड विकास अधिकारी, नगर पालिका परिषदों के अधिशासी अधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एवं पशु चिकित्साधिकारी, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत, उप कृषि निदेशक, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी तथा विभिन्न गो आश्रय स्थलों के संचालकों ने प्रतिभाग किया। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों से गो आश्रय स्थलों में उपलब्ध व्यवस्थाओं और सामने आ रही समस्याओं की जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में जिलाधिकारी ने विशेष रूप से बरसात के मौसम को देखते हुए गो आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी खंड विकास अधिकारियों और नगर पालिका परिषदों के अधिशासी अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले में संचालित किसी भी गो आश्रय स्थल में वर्षा के कारण जलभराव और कीचड़ की समस्या उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। इसके लिए समय रहते आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली जाएं।

जिलाधिकारी ने कहा कि गो आश्रय स्थलों में जलभराव होने से गोवंशों को परेशानी हो सकती है और साफ-सफाई की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऐसे स्थानों को चिन्हित कर वहां आवश्यकतानुसार मिट्टी भराव कराया जाए। साथ ही खड़ंजा लगवाकर आवागमन एवं परिसर की स्थिति को बेहतर बनाया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि बरसात के दौरान गो आश्रय स्थलों की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी प्रकार की समस्या सामने आने पर तत्काल उसका समाधान कराया जाए।

बैठक में गोवंशों के भरण-पोषण के लिए हरे चारे की उपलब्धता पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने सभी गो आश्रय स्थल संचालकों को निर्देशित किया कि गोवंशों के लिए हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किसानों से अनुबंध किया जाए। उन्होंने चारे की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि गोवंशों को खिलाए जाने वाले हरे चारे में किसी भी किसान द्वारा यूरिया अथवा कीटनाशक दवाओं का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और गो आश्रय स्थल संचालकों को चारे की व्यवस्था पर नजर रखने तथा किसानों से अनुबंध करते समय इस संबंध में आवश्यक सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उद्देश्य यह है कि गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध हो सके।

बैठक में गोवंशों को लम्पी बीमारी से बचाने के लिए किए जा रहे टीकाकरण अभियान की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने पशु चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया कि जनपद के सभी ग्रामों में गोवंशों का लम्पी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि टीकाकरण अभियान को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।

DM : बरसात में गो आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़ नहीं होने दें, इसी माह शुरू हों नए वृहद गो संरक्षण केंद्र: डीएम
DM : बरसात में गो आश्रय स्थलों पर जलभराव और कीचड़ नहीं होने दें, इसी माह शुरू हों नए वृहद गो संरक्षण केंद्र: डीएम

लम्पी बीमारी से बचाव को लेकर जिलाधिकारी ने पशु चिकित्सा विभाग को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी गांवों में जाकर टीकाकरण की स्थिति की निगरानी करें तथा गोवंशों के स्वास्थ्य की नियमित जांच भी सुनिश्चित करें। बीमारी के लक्षण मिलने पर समय से आवश्यक चिकित्सकीय कार्रवाई की जाए, ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके।

बैठक के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी हापुड़ ने जनपद में निर्माणाधीन नवीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों की प्रगति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। उन्होंने शेखपुर खिचरा द्वितीय, तृतीय, हिण्डालपुर, हिम्मतपुर एवं पारपा में निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों की स्थिति की जानकारी दी। अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्य की वर्तमान प्रगति के बारे में भी जानकारी प्रस्तुत की गई।

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि पारपा, हिण्डालपुर और हिम्मतपुर में निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी मिलने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों को शीघ्र पूरा कराया जाए।

जिलाधिकारी ने विशेष रूप से निर्देश दिया कि जिन वृहद गो संरक्षण केंद्रों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, उनका संचालन इसी माह प्रारंभ कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने और शेष कार्यों को निर्धारित समय में पूरा कराने पर जोर दिया।

समीक्षा बैठक में गो आश्रय स्थलों की मूलभूत व्यवस्थाओं के साथ-साथ वहां संरक्षित गोवंशों के लिए आवश्यक सुविधाओं को बनाए रखने पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गो आश्रय स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाए और वहां साफ-सफाई, जल निकासी, चारा तथा स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए।

उन्होंने कहा कि निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और भरण-पोषण से संबंधित कार्यों में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना चाहिए। गो आश्रय स्थलों की समस्याओं का समाधान केवल कागजी स्तर पर नहीं बल्कि मौके पर जाकर सुनिश्चित किया जाए। अधिकारियों को जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार कराने के निर्देश दिए गए।

बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतने पर जोर देते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि गो आश्रय स्थलों में जलभराव की स्थिति किसी भी दशा में उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। जहां जल निकासी की आवश्यकता है, वहां समय रहते उचित व्यवस्था की जाए। परिसर में कीचड़ की स्थिति से बचने के लिए मिट्टी भराव और खड़ंजा निर्माण जैसे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए।

बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि गोवंशों के स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में तत्परता बरती जाए। पशु चिकित्साधिकारी अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण करते हुए गोवंशों की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखें। लम्पी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान को प्रभावी बनाते हुए सभी पात्र गोवंशों तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाने के प्रयास किए जाएं।

मासिक समीक्षा बैठक के माध्यम से जिलाधिकारी ने गो आश्रय स्थलों से जुड़ी व्यवस्थाओं की स्थिति की जानकारी लेते हुए अधिकारियों की जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप निराश्रित गोवंशों को संरक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों और गो आश्रय स्थल संचालकों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने स्तर पर दिए गए निर्देशों का समयबद्ध तरीके से अनुपालन सुनिश्चित करें। विशेष रूप से बरसात के दौरान जलभराव और कीचड़ की समस्या से बचाव, गोवंशों के लिए सुरक्षित हरे चारे की व्यवस्था, लम्पी बीमारी से बचाव के लिए टीकाकरण तथा निर्माणाधीन वृहद गो संरक्षण केंद्रों को शीघ्र संचालित करने पर प्राथमिकता से कार्य करने को कहा गया। अधिकारियों ने जिलाधिकारी को निर्देशों के अनुपालन का आश्वासन दिया।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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