
बिजनौर।
जनपद बिजनौर में काफी समय से जमे थानाप्रभारी व थानाध्यक्ष एवं चौकी इंचार्जों में नये कप्तान की आमद से घबराहट शुरू हो गई है अगर सूत्रों की माने तो पैसे व राजनितिक दम पर सिफ़ारिश के जरिये चार्ज पाएं नाकाराओ पर खतरे के बादल मड़राने लगे है!लग रहा हे कि जनपद का निजाम बदलने वाला है। कप्तान के के विश्नोई के बारे में जो कहा और सुना जा रहा है उसे देखकर प्रतीत होता है कि पुलिस बल में आमूल चुल परिवर्तन जल्द होने की संभावना है।बिजनौर जनपद शुरू से ही राजनितिक एवं सत्ता के हस्तछेप से परिपूर्ण जिला माना जाता हैं सिफारिश व पैसों के दम पर चार्ज पाने की परम्परा हर तरफ फेली है लेकिन बिजनौर का हाल ज्यादा बुरा है दबंग एवं तेजतरार कप्तानों तक पर ऐसे मनोवज्ञानिक दबाव की कोशिशे हेमशा चलती रहती है ।सत्ता पक्ष से जुड़े प्रभावी नेता चाहते हे कि उनके पसन्द के थानाध्यक्ष को चार्ज पर लाया जाये ताकि वह अपने मन माफ़िक काम करा सकें!। यहा तक की विरोधियों को फसाने और उनका इलाज कराने में थानाप्रभारी व थानाध्यक्ष व चौकी इंचार्ज को सहायक माना जाता है सत्ता के बड़े नेता किसी भी कप्तान से चार्ज देने या ना देने के मसले पर अक्सर नाराज भी हो जाते है कुछ कप्तानो की भी जिले में रहने की लालसा उनको मजबूर बना देती हैं बहुत से कप्तान सब से समझोता नही कर पाते तो वह आयाराम गयाराम बनकर रेह जाते हैं।

थाना व चौकी पाने के इछुक थानेदार एवं इंस्पेक्टरों व चौकी प्रभारियों का यह हाल है कि सत्ता के गलियारों में जी हजुरी करते हुऐ देखे जा सकते हैं कुछ ने तो इंतहा ही कर रखी हैं ,नेताओ के दरबार में बैठकर चार्ज पाने की लालसा में नेताओ का गुणगान करते हुए देखे जाते हैं यदि यूँ कहें कि पुलिस का राजनीतिकरण हो रहा है तो कुछ गलत नही होगा!योग्ये अनुभवी तेज तरार के मुकाबले अक्सर ऐयोग्य चार्ज पा जाते हैं और फिर अपने राजीनीतिक आकाओं के इशारे पर खुलकर पारी खेलते हे,गलत काम भी होता हैं और फ़र्जी नामजदगी भी होती हैं जिससे अपराध बेशुमार हो जाता है जिससे उच्चाधिकारियों की फ़जीहत उच्चस्ततर पर होती हैं लेकिन इन मठाधिस थानाप्रभारी व थानाध्यक्ष्ओ एवं चौकी इंचार्जों पर कोई फर्क नही पढ़ता बल्कि इन के सरक्षण में यही सब चलता रहता हे ऐसी ही लचर पुलिस राजनेता चाहते भी हैं!अगर सूत्रों की माने तो खुले आम दिन में भी गलत काम भी चलता हैं लेकिन पुलिस सब कुछ देखकर भी आँखे बन्द कर लेती हैं सायद पुलिस का दामन भी कहि ना कहि दागदार हैं!सवाल इस बात का नही हैं कि थानाप्रभारी व थानाध्यक्ष लम्बे समय से टिके हुऐ हुए है निःसन्देह इनमे बहुत से योग्य अनुभवी भी है लेकिन कप्तान को ऐसे ही सही गलत की काट छाट करनी होंगी बढ़ते हुए अपराध पर नियंत्रण लगाने के लिए एक खाका भी त्यार करना होगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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