Prime Minister of Bangladesh : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूर रहेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ?

Prime Minister of Bangladesh : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूर रहेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान
Prime Minister of Bangladesh : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूर रहेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान

नई दिल्ली। भारत में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान हिस्सा नहीं लेंगे। बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने इसकी जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि तारिक रहमान को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के तौर पर आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्हें बिम्सटेक के अध्यक्ष के रूप में सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था।

भारत में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर विभिन्न देशों के नेताओं की भागीदारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री का सम्मेलन में शामिल नहीं होने का निर्णय क्षेत्रीय और कूटनीतिक दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है। बांग्लादेश की ओर से विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर के बयान के बाद यह स्थिति स्पष्ट हुई कि निमंत्रण का आधार बांग्लादेश की द्विपक्षीय भूमिका के बजाय बिम्सटेक की अध्यक्षता से जुड़ा था।

हुमायूं कबीर ने बताया कि तारिक रहमान को व्यक्तिगत क्षमता में आमंत्रित नहीं किया गया था। उन्हें बिम्सटेक अध्यक्ष के तौर पर आमंत्रण मिला था। बिम्सटेक दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण संगठन है। इसके सदस्य देशों में बांग्लादेश के साथ भारत, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं।

बांग्लादेश की भूमिका इस समय बिम्सटेक में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि वह संगठन की अध्यक्षता कर रहा है। इसी कारण भारत की ओर से बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में बांग्लादेश के नेतृत्व को ब्रिक्स सम्मेलन में आमंत्रित किया गया। हालांकि, अब प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने के निर्णय के बाद बांग्लादेश की ओर से प्रतिनिधित्व को लेकर भी ध्यान केंद्रित हो गया है।

ब्रिक्स का विस्तार होने के बाद यह समूह वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, विकास, वैश्विक वित्तीय व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा होती है। इसके अतिरिक्त सदस्य और आमंत्रित देशों के साथ संवाद के माध्यम से वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों को भी मंच मिलता है।

भारत में आयोजित होने वाला 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब विश्व राजनीति तेजी से बदल रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापारिक संबंध, क्षेत्रीय सुरक्षा और विकासशील देशों की प्राथमिकताएं अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं। ऐसे में सम्मेलन में विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी को कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बांग्लादेश और भारत के बीच लंबे समय से विभिन्न क्षेत्रों में संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, जल संसाधन और क्षेत्रीय सहयोग जैसे कई विषयों पर बातचीत होती रही है। बिम्सटेक दोनों देशों को एक व्यापक क्षेत्रीय मंच भी उपलब्ध कराता है, जहां दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की जाती है।

तारिक रहमान के सम्मेलन में शामिल नहीं होने से यह सवाल भी उठ रहा है कि बांग्लादेश की ओर से इस महत्वपूर्ण मंच पर किस स्तर का प्रतिनिधित्व किया जाएगा। हालांकि, सम्मेलन में बिम्सटेक की अध्यक्षता का प्रतिनिधित्व केवल किसी एक व्यक्ति की मौजूदगी तक सीमित नहीं है। संगठन के स्तर पर सदस्य देशों के बीच सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया जारी रहती है।

Prime Minister of Bangladesh : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूर रहेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान
Prime Minister of Bangladesh : 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दूर रहेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान

विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर का बयान इस मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने निमंत्रण की प्रकृति को स्पष्ट किया है। उनके अनुसार यह निमंत्रण बांग्लादेश के प्रधानमंत्री को व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में दिया गया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि सम्मेलन में बांग्लादेश की संभावित भागीदारी का आधार क्षेत्रीय संगठन की अध्यक्षता थी।

बिम्सटेक और ब्रिक्स अलग-अलग क्षेत्रीय एवं बहुपक्षीय मंच हैं, लेकिन दोनों के बीच सहयोग की संभावनाएं महत्वपूर्ण हैं। बिम्सटेक दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच संपर्क का माध्यम है, जबकि ब्रिक्स व्यापक वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित मंच है। ऐसे में बिम्सटेक अध्यक्ष को ब्रिक्स सम्मेलन में आमंत्रित किया जाना दोनों क्षेत्रीय व्यवस्थाओं के बीच संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।

भारत के लिए भी बिम्सटेक एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच है। भारत लंबे समय से पड़ोसी देशों के साथ संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ाने पर जोर देता रहा है। बिम्सटेक के माध्यम से भारत की दक्षिण एशिया के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व एशिया तक अपनी क्षेत्रीय भागीदारी को मजबूत करने की कोशिशों को बल मिलता है।

बांग्लादेश का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल न होना हालांकि दोनों देशों के संबंधों के संदर्भ में किसी तत्काल निष्कर्ष का आधार नहीं माना जा सकता। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री को मिला निमंत्रण बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में था और उन्होंने इसमें भाग नहीं लेने का निर्णय लिया है। इसलिए इस निर्णय को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों से जोड़कर देखना जल्दबाजी होगी।

सम्मेलन के दौरान भारत और अन्य देशों के बीच होने वाली द्विपक्षीय एवं बहुपक्षीय बातचीत पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी। ब्रिक्स के मंच पर आर्थिक सहयोग बढ़ाने, विकासशील देशों की भूमिका मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे विषय प्रमुख हो सकते हैं।

विशेषज्ञों के लिए भी यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि बिम्सटेक अध्यक्ष को आमंत्रित किया जाना भारत की क्षेत्रीय कूटनीति और ब्रिक्स के व्यापक संपर्क कार्यक्रम के बीच संबंध को दर्शाता है। बांग्लादेश की अनुपस्थिति के बावजूद बिम्सटेक के मुद्दे क्षेत्रीय सहयोग के संदर्भ में चर्चा में बने रह सकते हैं।

कुल मिलाकर, 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अनुपस्थिति अब स्पष्ट हो गई है। विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर के अनुसार निमंत्रण उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि बिम्सटेक अध्यक्ष के रूप में दिया गया था। ऐसे में बांग्लादेश की भागीदारी का प्रश्न अब उसके प्रतिनिधित्व के स्वरूप से जुड़ गया है।

भारत में होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में दुनिया की बदलती आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा होगी। ब्रिक्स के विस्तार और वैश्विक मंच पर विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका के बीच सम्मेलन का महत्व और बढ़ गया है। बांग्लादेश की अनुपस्थिति के बावजूद बिम्सटेक और उसके अध्यक्ष पद की भूमिका क्षेत्रीय सहयोग के संदर्भ में महत्वपूर्ण बनी रहेगी। सम्मेलन के दौरान होने वाली चर्चाओं और विभिन्न देशों के बीच संवाद से आने वाले समय में क्षेत्रीय एवं वैश्विक सहयोग की दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिलने की उम्मीद है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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