
80s स्टाइल ट्रेंड सोशल मीडिया पर बहुत चल रहा है, और भारत में भी बड़े बड़े सेलेब्स व नेता शामिल हो रहे हैं।अब इन्हे कोई इनोवेशन तो करना नहीं तो ये समय समय पर ऐसी भेंड़चाल में शामिल होकर गदगद होते रहते है लेक़िन जोखिम का इन्हें पता नहीं है.. साइबर एक्सपर्ट्स खासकर भारत मे ये चेतावनी दे रहे हैं कि यह ट्रेंड बायोमेट्रिक्स फ्री में देने जैसा है अपील: साइबर अपरधियों, डेटा चोरी और फ्रॉड से बचने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग साबधानी से करें- मुसरफ ख़ान, सामाजिक चिंतक
उत्तरप्रदेश, संजय सिंह। सोशल मीडिया पर चल रहे 1980s स्टाइल ट्रेंड के जोखिम से साबधानी बरतने कि अपील करते हुए राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक मुसरफ ख़ान ने कहा कि मुफ्त की चीज महंगी पड़ती है ये बड़े बुजुर्ग हमें बतला गए थे। 80s ट्रेंड (ChatGPT) चैट जीपीटी का एक वायरल फोटो ट्रेंड है, जिस में बड़ी संख्या में लोग अपनी सेल्फी अपलोड करके (AI) ऐआई से 1980s स्टाइल (बड़े बाल, रेटरो कपड़े, फिल्म ग्रेन, स्टूडियो लाइटिंग आदि) में पोर्ट्रेट बनवा रहे हैं। यह सोशल मीडिया (फेसबुक, व्हाट्सअप, इंस्टाग्राम,एक्स X आदि) पर बहुत चल रहा है, और भारत में भी बड़े बड़े सेलेब्स व नेता शामिल हो रहे हैं। अब इन्हे कोई इनोवेशन तो करना नहीं हैं, ना ग़रीब जनता के हित में कोई काम करना हैं। तो ये समय-समय पर ऐसी भेंड़चाल में शामिल होकर गदगद होते रहते है। लेक़िन जोखिम का इन्हें पता नहीं है।
सामाजिक चिंतक मुसरफ ख़ान ने आगे कहा कि साइबर एक्सपर्ट्स खासकर भारत मे ये चेतावनी दे रहे हैं कि यह ट्रेंड बायोमेट्रिक्स फ्री में देने जैसा है। लीक या मिसयूज़ होने पर डीपफेक, इम्पर्सनेशन, फ्रॉड या सर्विलांस में इस्तेमाल हो सकता है। चोरी हुए फेस डेटा से फेक वीडियो/ऑडियो बनाकर बैंक, KYC या अन्य सिस्टम को धोखा दिया जा सकता है और इनमें फोटो अपलोड + फोन नंबर/OTP/कार्ड डिटेल्स मांगी जाती है, जिससे अकाउंट हैक या बैंक फ्रॉड हो सकता है। ऐसे मामलों की रिपोर्ट पहले भी AI ऐआई ट्रेंड्स (जैसे artbook ट्रेंड) में आई हैं।

साथ ही उन्होंने बताया कि दूसरा बड़ा जोखिम डेटा लंबे समय तक रिटेन हो सकता है, थर्ड पार्टी से शेयर हो सकता है, या मॉडल ट्रेनिंग में इस्तेमाल हो सकता है। असली जोखिम प्राइवेसी और बायोमेट्रिक डेटा से जुड़ा है। फेस डेटा / बायोमेट्रिक्स से आपकी फोटो में चेहरे की ज्यामिति, स्किन टोन, आंखों की दूरी आदि यूनिक फीचर्स होते हैं। अपलोड करने पर ये डेटा ऐआई कंपनी के सर्वर पर जाता है। असली चैट जीपीटी (ChatGPT) तो सुरक्षित है, क्योंकि वहां आपकी बैंक डिटेल्स नहीं मांगी जाती लेकिन स्कैमर्स 80s फोटो जनरेटर या चैट जीपीटी जैसा फ्री टूल के नाम पर फेक ऐप/साइट बना सकते हैं।
आखिर में राष्ट्रवादी सामाजिक चिंतक मुसरफ ख़ान ने कहा कि लेकिन यहां लूटने पिटने के बाद सबको होश आता है, तो ये ट्रेंड अभी थोड़ी देर और चलेगा और फिर कोई और ट्रेंड चलवा के बाकी जरूरी जानकारियां भी ये हासिल करते रहेंगे और साइबर अपरधियों का सहारा लेकर आसानी से डेटा चोरी करते रहेगे। फ्रॉड करते रहेंगे कोई रोकने वाला नहीं उनको। कोई समाजिक कार्यकता राजनीतिक पार्ट इसकी आवाज नही उठाएगी। ये इस देश का आज सबसे बडा क्राइम होगा, जहाँ खुद ये अनजाने में शोक से साइबर अपरधियों का काम आसान कर रहे है। सभी से अपील हैं कि साइबर अपरधियों, डेटा चोरी और फ्रॉड से बचने के लिए सोशल मीडिया का प्रयोग साबधानी से करें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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