
फतेहपुर।
पुलिस अधीक्षक श्री अभिमन्यु मांगलिक के मार्गदर्शन में सोमवार 14 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे पुलिस लाइन्स में सीपीआर प्रशिक्षण एवं रक्तदान जागरूकता अभियान चलाया गया। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, आरोग्य भारती और भारत विकास परिषद (ब्रह्मावर्त प्रांत) की विवेकानंद शाखा के तत्वावधान तथा डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन के संयोजकत्व में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को आकस्मिक परिस्थितियों में प्राथमिक जीवनरक्षक सहायता के प्रति जागरूक करना और समाज में स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देना रहा।
अभियान का संचालन इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी के चेयरमैन फतेहपुर एवं उत्तर प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य तथा आरोग्य भारती के जिला सचिव डॉ. अनुराग श्रीवास्तव द्वारा किया गया। उन्होंने पुलिस लाइन्स में आकस्मिक सेवा 112 में कार्यरत पुलिसकर्मियों को सीपीआर के संबंध में प्रशिक्षण दिया। प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को बताया गया कि किसी व्यक्ति के हृदय की कार्यप्रणाली अचानक रुक जाने जैसी आपात स्थिति में समय पर दी गई प्राथमिक सहायता बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे समय में आसपास मौजूद व्यक्ति द्वारा तत्काल उचित सहायता उपलब्ध कराने से चिकित्सा सहायता मिलने तक महत्वपूर्ण समय बचाया जा सकता है।
डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने सीपीआर प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग आयु वर्ग के लिए बताए गए तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक वर्ष तक के बच्चे में हृदय संबंधी आपात स्थिति होने पर 15 बार दबाव और दो बार सांस देने की प्रक्रिया बताई जाती है, जबकि एक वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति के लिए 30 बार दबाव और दो बार सांस देने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक किया जाता है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को समझाया कि आपातकालीन स्थिति में घबराने के बजाय प्रशिक्षित तरीके से तत्काल सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है और साथ ही चिकित्सा सहायता के लिए आपातकालीन सेवा को सक्रिय करना चाहिए।
पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देते हुए डॉ. अनुराग ने कहा कि पुलिस की ड्यूटी के दौरान कर्मचारी अक्सर दुर्घटना, बीमारी या अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले लोगों में शामिल होते हैं। ऐसे में उन्हें प्राथमिक जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी होना उपयोगी है। उन्होंने कहा कि सीपीआर का प्रशिक्षण केवल चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आम नागरिकों को भी बुनियादी जीवनरक्षक उपायों की जानकारी होनी चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान रक्तदान को लेकर भी पुलिसकर्मियों को जागरूक किया गया। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ व्यक्तियों को रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि उनके अनुसार 18 से 65 वर्ष की आयु के स्वस्थ व्यक्ति प्रत्येक तीन माह में रक्तदान कर सकते हैं। हालांकि, रक्तदान से पहले संबंधित स्वास्थ्य मानकों और चिकित्सकीय पात्रता की जांच आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से पहले हीमोग्लोबिन, रक्तचाप सहित आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण किए जाते हैं, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि रक्तदाता के लिए रक्तदान सुरक्षित है।

उन्होंने बताया कि एक बार में लगभग 350 मिलीलीटर रक्त लिया जाता है। रक्तदान के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त से अलग-अलग रक्त घटकों के माध्यम से कई जरूरतमंद मरीजों की मदद की जा सकती है। इसी वजह से स्वैच्छिक रक्तदान को मानव सेवा का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। उन्होंने पुलिसकर्मियों से स्वयं रक्तदान करने के साथ-साथ अपने परिवार, मित्रों और परिचितों को भी रक्तदान के प्रति जागरूक करने की अपील की।
कार्यक्रम में रक्तदान को लेकर समाज में फैली कई भ्रांतियों को दूर करने पर भी जोर दिया गया। डॉ. अनुराग ने कहा कि रक्तदान से पहले स्वास्थ्य की जांच की जाती है और योग्य व्यक्ति ही रक्तदान कर सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रक्तदान को लेकर अनावश्यक भय या भ्रम न रखें और चिकित्सकीय पात्रता पूरी होने पर जरूरतमंदों की सहायता के लिए स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा दें।
अभियान के दौरान डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने रक्तदाताओं के स्वास्थ्य से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि नियमित एवं निर्धारित अंतराल पर रक्तदान करने वाले स्वस्थ व्यक्तियों में रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। उन्होंने रक्तदान को मानव सेवा से जोड़ते हुए कहा कि किसी जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर रक्त उपलब्ध होना कई बार उपचार की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीपीआर प्रशिक्षण के दौरान पुलिसकर्मियों को यह संदेश भी दिया गया कि आपात स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट महत्वपूर्ण हो सकते हैं। किसी व्यक्ति को अचानक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ने पर मौके पर मौजूद व्यक्ति द्वारा तत्काल आपातकालीन सेवा को सूचना देने और उपलब्ध प्रशिक्षित सहायता प्रदान करने से चिकित्सा टीम के पहुंचने तक मदद मिल सकती है। पुलिसकर्मियों के लिए इस तरह का प्रशिक्षण उनके कार्यक्षेत्र को देखते हुए विशेष रूप से उपयोगी बताया गया।
पुलिस लाइन्स में आयोजित इस अभियान में इंस्पेक्टर रमेश पटेल सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिसकर्मियों ने सीपीआर प्रशिक्षण को ध्यानपूर्वक समझा और रक्तदान से संबंधित जानकारी प्राप्त की। अभियान के माध्यम से पुलिस विभाग से जुड़े कर्मचारियों को यह संदेश दिया गया कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ आपात परिस्थितियों में लोगों की सहायता करने के लिए प्राथमिक जीवनरक्षक जानकारी भी उपयोगी हो सकती है।
आयोजकों ने कहा कि सीपीआर प्रशिक्षण और रक्तदान जागरूकता जैसे अभियान समाज में स्वास्थ्य एवं मानव सेवा की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी, आरोग्य भारती, भारत विकास परिषद और डॉ. सत्यनारायण सेवा फाउंडेशन द्वारा विभिन्न स्तरों पर जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां देने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान पुलिसकर्मियों को यह भी समझाया गया कि रक्तदान केवल अस्पतालों या रक्त बैंकों की आवश्यकता के समय की जाने वाली गतिविधि नहीं है, बल्कि समाज में निरंतर स्वैच्छिक भागीदारी की जरूरत होती है। दुर्घटनाओं, ऑपरेशन, प्रसव, गंभीर बीमारियों और अन्य चिकित्सकीय परिस्थितियों में मरीजों को रक्त की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे में पर्याप्त रक्त उपलब्ध कराने के लिए नियमित स्वैच्छिक रक्तदान महत्वपूर्ण है।
पुलिस लाइन्स में आयोजित कार्यक्रम ने पुलिसकर्मियों को एक ओर सीपीआर जैसी जीवनरक्षक प्राथमिक सहायता के बारे में जानकारी दी, वहीं दूसरी ओर रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया। डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने उपस्थित पुलिसकर्मियों से अपील की कि वे प्रशिक्षण में मिली जानकारी को जरूरत के समय सही तरीके से उपयोग करें और अपने आसपास के लोगों को भी सीपीआर तथा स्वैच्छिक रक्तदान के महत्व के बारे में जागरूक करें।
आयोजकों के अनुसार, इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि आपात परिस्थितियों में लोगों की सहायता करने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों को तैयार करना है। पुलिसकर्मी अपने कार्य के दौरान अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली आकस्मिक घटनाओं के संपर्क में आते हैं। इसलिए उन्हें प्राथमिक जीवनरक्षक उपायों का प्रशिक्षण देना जनहित की दिशा में उपयोगी कदम माना जा रहा है। अभियान के समापन पर उपस्थित पुलिसकर्मियों और आयोजकों ने सीपीआर प्रशिक्षण तथा स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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