
पटना। लगातार मिल रही कथित धमकियों के बीच जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। तेजप्रताप यादव का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से उनके मोबाइल फोन पर बार-बार धमकी भरे कॉल आ रहे हैं। लगातार आ रही इन कथित धमकियों के कारण उन्होंने अपनी जान को गंभीर खतरा होने की आशंका जताई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए तेजप्रताप यादव ने 9 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) और बिहार के गृह सचिव को पत्र भेजकर पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने पटना के सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने की बात भी कही है।
लगातार धमकी भरे फोन आने का दावा
तेजप्रताप यादव के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से उनके मोबाइल पर लगातार ऐसे फोन कॉल आ रहे हैं, जिनमें उन्हें कथित तौर पर धमकी दी जा रही है। उनका कहना है कि बार-बार इस तरह के कॉल आने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने और धमकी देने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। तेजप्रताप का कहना है कि किसी व्यक्ति को लगातार धमकी मिलना केवल व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी है।
उनकी मांग है कि मामले की जांच कर यह पता लगाया जाए कि धमकी भरे फोन किस व्यक्ति या समूह की ओर से किए जा रहे हैं और इसके पीछे उनकी मंशा क्या है।
अमित शाह समेत तीन स्तरों पर भेजा पत्र
तेजप्रताप यादव ने सुरक्षा की मांग को लेकर 9 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलावा बिहार के DGP और गृह सचिव को पत्र भेजा है। इस तरह उन्होंने मामले को केंद्र और राज्य, दोनों स्तरों पर अधिकारियों के सामने रखा है।
केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र भेजे जाने के साथ ही बिहार पुलिस के शीर्ष अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है। इससे यह स्पष्ट है कि तेजप्रताप यादव मामले को गंभीर सुरक्षा चिंता के रूप में देख रहे हैं और चाहते हैं कि संबंधित एजेंसियां तत्काल आवश्यक कदम उठाएं।
सुरक्षा को लेकर किसी सार्वजनिक व्यक्ति की ओर से इस तरह की शिकायत सामने आने के बाद संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। मामले की जांच के साथ-साथ शिकायतकर्ता की सुरक्षा संबंधी आवश्यकता का आकलन करना भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
सचिवालय थाना में FIR की बात
तेजप्रताप यादव ने इस मामले को लेकर पटना के सचिवालय थाना में FIR दर्ज कराने की भी बात कही है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस के पास कथित धमकी भरे कॉल की जांच करने और संबंधित तथ्यों को जुटाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने का आधार होगा।
जांच के दौरान पुलिस कथित फोन कॉल से संबंधित उपलब्ध जानकारी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पड़ताल कर सकती है। इसके माध्यम से यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि कॉल कहां से किए गए और उनके पीछे कौन लोग हो सकते हैं।
हालांकि, धमकी के मामले में वास्तविक जिम्मेदारी और आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल तेजप्रताप यादव की ओर से लगाए गए आरोपों को शिकायत और दावा के तौर पर देखा जा रहा है।

सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार कथित धमकी भरे कॉल मिलने के बाद तेजप्रताप यादव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है। उनका कहना है कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसी संभावित खतरे से बचाव किया जा सके।
सार्वजनिक जीवन में सक्रिय नेताओं और राजनीतिक पदाधिकारियों की सुरक्षा का आकलन सामान्यतः संबंधित सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन द्वारा किया जाता है। खतरे की प्रकृति और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था तय की जाती है।
तेजप्रताप की मांग भी इसी दिशा में है कि सरकार मामले को गंभीरता से लेते हुए उनकी सुरक्षा की समीक्षा करे और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए।
धमकी देने वालों की पहचान की मांग
तेजप्रताप यादव ने केवल सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग नहीं की है, बल्कि कथित धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है। उनका कहना है कि यदि उन्हें लगातार धमकी भरे फोन आ रहे हैं तो इसके पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान की जानी चाहिए।
ऐसे मामलों में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती शिकायत में बताए गए तथ्यों की पुष्टि करना होती है। इसके लिए उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांच की जाती है। यदि जांच में धमकी की पुष्टि होती है तो संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
तेजप्रताप का कहना है कि उन्हें मिल रही कथित धमकियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए।
केंद्र और राज्य दोनों से कार्रवाई की उम्मीद
मामले में तेजप्रताप यादव ने केंद्र और बिहार सरकार दोनों से हस्तक्षेप की मांग की है। केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र भेजने के साथ बिहार के DGP और गृह सचिव को भी पत्र भेजा गया है।
इससे मामले का दायरा केवल स्थानीय पुलिस तक सीमित नहीं रह गया है। अब संबंधित राज्य और केंद्रीय स्तर के अधिकारी भी शिकायत की जानकारी से अवगत हैं। ऐसे में आगे की कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
तेजप्रताप यादव की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि वह मामले को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं चाहते। उनकी मांग है कि उनकी सुरक्षा को लेकर तत्काल आवश्यक निर्णय लिया जाए और कथित धमकियों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक जीवन के बीच सुरक्षा का मुद्दा
तेजप्रताप यादव बिहार की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और पूर्व मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। ऐसे में सुरक्षा को लेकर उनके द्वारा उठाया गया मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
हालांकि, इस मामले को लेकर आगे की स्थिति पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर करेगी। यदि शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज होती है तो जांच के दौरान कथित कॉल और धमकियों से संबंधित तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।
जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल तेजप्रताप यादव की ओर से लगातार धमकी भरे फोन आने का दावा किया गया है। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर केंद्र और बिहार सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। साथ ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, बिहार के DGP और गृह सचिव को पत्र भेजकर मामले की गंभीरता से जांच कराने की अपील की है।
उन्होंने सचिवालय थाना, पटना में FIR दर्ज कराने की बात भी कही है। अब पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदम महत्वपूर्ण होंगे।
सबसे अहम बात यह होगी कि कथित धमकी भरे कॉल की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इन कॉल के पीछे मौजूद लोगों की पहचान हो पाती है। यदि किसी प्रकार की आपराधिक धमकी की पुष्टि होती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल तेजप्रताप यादव ने सरकार से स्पष्ट रूप से पर्याप्त सुरक्षा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। मामले की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही यह पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित धमकियों का स्रोत क्या था और सुरक्षा को लेकर आगे किस प्रकार के कदम उठाए जाते हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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