
हापुड़।
पिलखुवा में माननीय उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी के कार्यक्रम की कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकार साथियों को करीब तीन घंटे तक सड़क पर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल के संबंध में स्पष्ट जानकारी और कवरेज के लिए उचित व्यवस्था का इंतजार करना पड़ा। पत्रकारों के सामने आई इस स्थिति को लेकर पत्रकार संगठनों और मीडिया साथियों के बीच चर्चा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
कार्यक्रम की कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों का उद्देश्य जनप्रतिनिधि के कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी और गतिविधियों को आम जनता तक पहुंचाना था। लेकिन लंबे समय तक सड़क पर इंतजार करने के कारण उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा। इस दौरान कार्यक्रम स्थल और कवरेज की व्यवस्था को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी। जब पत्रकारों ने संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया, तो बताया गया कि यह व्यवस्था “ऊपर से मिले आदेश” के अनुसार की गई है।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि वीआईपी अथवा जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रमों में मीडिया प्रतिनिधियों के लिए किस तरह की व्यवस्था होनी चाहिए। क्या कवरेज के लिए पहुंचे पत्रकारों को घंटों सड़क पर खड़े होकर इंतजार करना चाहिए, या आयोजकों और प्रशासन की ओर से पहले से ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे पत्रकार समय पर कार्यक्रम स्थल तक पहुंच सकें और अपना काम सुचारु रूप से कर सकें?
पत्रकारों की भूमिका और कवरेज की व्यवस्था
पत्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनहित से जुड़े विषयों, सरकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक गतिविधियों की जानकारी जनता तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रमों की कवरेज के दौरान पत्रकारों की मौजूदगी का उद्देश्य कार्यक्रम से संबंधित तथ्यों, घोषणाओं और गतिविधियों को लोगों तक पहुंचाना होता है। इसके लिए आवश्यक है कि उन्हें समय पर और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में सुरक्षा और प्रशासनिक प्रबंध महत्वपूर्ण होते हैं। वीआईपी कार्यक्रमों में सुरक्षा कारणों से प्रवेश, आवागमन और कवरेज संबंधी व्यवस्थाएं निर्धारित की जा सकती हैं। लेकिन इन व्यवस्थाओं की जानकारी पत्रकारों को पहले से उपलब्ध कराना भी उतना ही जरूरी है, ताकि उन्हें अनावश्यक असमंजस या लंबे इंतजार का सामना न करना पड़े।
पत्रकारों के लिए बैठने, प्रवेश, कवरेज और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की उचित व्यवस्था होने से कार्यक्रम की रिपोर्टिंग व्यवस्थित ढंग से हो सकती है। यदि कार्यक्रम स्थल में बदलाव हो, प्रवेश के लिए कोई निर्धारित मार्ग हो या कवरेज के लिए विशेष निर्देश हों, तो उनकी सूचना समय रहते संबंधित पत्रकारों और मीडिया संगठनों तक पहुंचाई जानी चाहिए।
तीन घंटे इंतजार के बाद भी स्पष्टता का अभाव
पिलखुवा में सामने आए घटनाक्रम के अनुसार, पत्रकारों को करीब तीन घंटे तक सड़क पर इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उन्हें कार्यक्रम स्थल और कवरेज की व्यवस्था के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलने का इंतजार रहा। संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने की कोशिश किए जाने पर “ऊपर से मिले आदेश” का हवाला दिए जाने की बात कही गई।
ऐसी स्थिति में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि आदेश किस स्तर से जारी हुए थे और पत्रकारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। यदि सुरक्षा या अन्य प्रशासनिक कारणों से पत्रकारों को किसी निर्धारित स्थान पर रोका गया था, तो उन्हें इसकी स्पष्ट जानकारी, अनुमानित प्रतीक्षा अवधि और आगे की प्रक्रिया के बारे में बताया जाना चाहिए था।
हालांकि, उपलब्ध विवरण में यह स्पष्ट नहीं है कि पत्रकारों को रोकने का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया, कार्यक्रम स्थल पर मीडिया के लिए क्या व्यवस्था निर्धारित थी या इंतजार के दौरान प्रशासन की ओर से कोई वैकल्पिक सुविधा दी गई थी या नहीं। इसलिए इन पहलुओं पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।

सड़क पर पत्रकारों और उपमुख्यमंत्री की मुलाकात का दृश्य
इस संदेश के साथ पत्रकारों का एक चित्र भी साझा किया गया है, जिसमें पत्रकार धूप में सड़क पर खड़े दिखाई दे रहे हैं और उपमुख्यमंत्री जी उनसे वहीं रूबरू हो रहे हैं। यह दृश्य कार्यक्रमों में मीडिया कवरेज की व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन सकता है।
पत्रकारों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों के कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका को ध्यान में रखते हुए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें पत्रकारों को अनिश्चित समय तक सड़क पर खड़े होकर इंतजार न करना पड़े। यदि किसी कारणवश कार्यक्रम स्थल पर तत्काल प्रवेश संभव न हो, तो कम से कम उन्हें छाया, बैठने की जगह और स्पष्ट निर्देश उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
मीडिया प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित स्थान और समन्वय अधिकारी की व्यवस्था होने से ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सकता है। कार्यक्रम की कवरेज से संबंधित जानकारी एक ही अधिकृत माध्यम से साझा की जाए, तो अलग-अलग अधिकारियों से बार-बार संपर्क करने की जरूरत भी कम हो सकती है।
पत्रकार संगठनों से सुझाव और मार्गदर्शन की अपील
इस पूरे मामले को लेकर सभी पत्रकार संगठनों के माननीय पदाधिकारियों और पत्रकार साथियों से सुझाव एवं मार्गदर्शन आमंत्रित किए गए हैं। उद्देश्य यह है कि भविष्य में किसी भी वीआईपी अथवा जनप्रतिनिधि के कार्यक्रम में पत्रकारों को ऐसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
पत्रकार साथी अपने अनुभव के आधार पर सुझाव दे सकते हैं कि कार्यक्रमों में मीडिया के लिए किस प्रकार की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, कार्यक्रम से पहले मीडिया पास और प्रवेश संबंधी जानकारी उपलब्ध कराना, मीडिया के लिए निर्धारित स्थान बनाना, एक समन्वय अधिकारी नियुक्त करना और कार्यक्रम में किसी बदलाव की सूचना समय पर देना जैसे उपाय विचार के लिए सामने आ सकते हैं।
इसके साथ ही यह भी सुझाव दिया जा सकता है कि पत्रकार संगठनों और प्रशासन के बीच नियमित संवाद की व्यवस्था हो। बड़े कार्यक्रमों से पहले मीडिया प्रतिनिधियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं और कवरेज से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एक संपर्क बिंदु तय किया जाए। इससे प्रशासनिक व्यवस्थाओं और पत्रकारों की जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकता है।
उपमुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजने पर विचार
प्राप्त सुझावों के आधार पर माननीय उपमुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी तथा संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजने पर विचार किया जाएगा। पत्र के माध्यम से पत्रकारों को हुई असुविधा से अवगत कराने और भविष्य में उचित कवरेज व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी जा सकती है।
पत्रकार साथियों से अपेक्षा की गई है कि वे इस विषय पर अपने विचार साझा करें और ऐसी पहल सुझाएं, जिससे भविष्य में पत्रकारों को लंबे समय तक सड़क पर इंतजार न करना पड़े। सुझावों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि कार्यक्रमों में मीडिया के लिए व्यवस्थित, सम्मानजनक और व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के उपाय तलाशना है।
पिलखुवा में हुई घटना ने मीडिया कवरेज की व्यवस्थाओं पर चर्चा का अवसर दिया है। पत्रकारों के लिए प्रवेश, बैठने, सूचना और कवरेज की स्पष्ट व्यवस्था होने से न केवल उन्हें सुविधा मिलेगी, बल्कि कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग भी अधिक सुचारु ढंग से हो सकेगी। अब पत्रकार संगठनों और मीडिया साथियों के सुझावों के आधार पर आगे की पहल किए जाने की अपेक्षा है।
पत्रकार साथियों से अपील है कि वे अपने सुझाव, अनुभव और मार्गदर्शन साझा करें, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सामूहिक रूप से उचित कदम उठाए जा सकें।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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