
लखनऊ/रायबरेली।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी ने अपने राजनीतिक अभियान को तेज कर दिया है। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को रायबरेली से PDA रथयात्रा की शुरुआत की। इस यात्रा को पार्टी के पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी PDA (Pichhda, Dalit, Alpsankhyak) सामाजिक गठजोड़ के संदेश को प्रदेशभर में ले जाने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। यात्रा की शुरुआत ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश में विभिन्न दल विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं और सपा-कांग्रेस के बीच संभावित चुनावी तालमेल को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं।
रायबरेली से रथयात्रा की शुरुआत को लेकर राजनीतिक बहस इसलिए भी तेज हुई है क्योंकि यह लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस नेता राहुल गांधी का निर्वाचन क्षेत्र है। अखिलेश यादव के इस कदम को लेकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की टिप्पणी भी सामने आई है। सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि यदि अखिलेश यादव रायबरेली से यात्रा शुरू कर रहे हैं तो इसके राजनीतिक संदेश को समझना चाहिए। उन्होंने कहा, “जब राहुल जी का हाथ उनके हाथ में है तो किसी भी चीज की चिंता कहां रह गई।” उनका यह बयान सपा और कांग्रेस के बीच संबंधों को लेकर चल रही चर्चा के संदर्भ में देखा जा रहा है।
रायबरेली को शुरुआत के लिए चुना जाना चर्चा में
अखिलेश यादव की PDA रथयात्रा के लिए रायबरेली का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रायबरेली को कांग्रेस के पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में गिना जाता है और 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां से राहुल गांधी निर्वाचित हुए थे। ऐसे में सपा अध्यक्ष का इसी लोकसभा क्षेत्र से अपने विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करना दोनों दलों के बीच संबंधों को चर्चा के केंद्र में ले आया है। हालांकि यात्रा शुरू करने के पीछे सपा की आधिकारिक रणनीति और राजनीतिक विश्लेषकों की व्याख्याओं को अलग-अलग देखा जाना चाहिए।
रायबरेली जिले में कुल पांच विधानसभा सीटें हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार इनमें तीन सीटों पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं, जबकि रायबरेली और ऊंचाहार विधानसभा सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। इस क्षेत्र में सपा की मौजूदगी और कांग्रेस के साथ उसके संबंधों को देखते हुए रथयात्रा की शुरुआत ने राजनीतिक गतिविधियों को और अधिक चर्चा में ला दिया है।
PDA के जरिए सामाजिक गठजोड़ पर जोर
समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति का मुख्य आधार पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से जोड़ने का प्रयास है। पार्टी लंबे समय से इस सामाजिक गठजोड़ को अपनी राजनीतिक रणनीति के प्रमुख हिस्से के रूप में प्रस्तुत करती रही है। अब रथयात्रा के माध्यम से इस संदेश को अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी की ओर से तैयार किए गए विशेष रथ के जरिए अखिलेश यादव कार्यकर्ताओं और आम लोगों से संवाद कर रहे हैं। रथयात्रा को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संगठनात्मक स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के अभियान के तौर पर भी देखा जा रहा है। यात्रा के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं से मुलाकात, जनसभाएं और लोगों से संवाद जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी अपने राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाने की तैयारी में है।
भाजपा ने उठाए सवाल
PDA रथयात्रा शुरू होने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी की ओर से भी सपा के अभियान पर सवाल उठाए गए। भाजपा की ओर से यात्रा के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे मार्ग और सड़क निर्माण को लेकर राजनीतिक सवाल उठाया गया। रायबरेली में यात्रा से पहले पोस्टर और राजनीतिक संदेशों के जरिए भी इस मुद्दे को उठाए जाने की खबरें सामने आईं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सपा के रथ के लिए इस्तेमाल हो रहे मार्ग को लेकर सवाल किया गया कि जिस सड़क पर यात्रा की जा रही है, उसे किसने बनवाया।
इस तरह रथयात्रा केवल सपा के संगठनात्मक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके साथ ही विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। चुनावी अभियानों में विकास कार्यों और उनके श्रेय को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस आम तौर पर देखने को मिलती है। इस मामले में भी भाजपा की ओर से उठाए गए सवाल और सपा की ओर से दिए जाने वाले जवाब आगे की राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
इमरान मसूद के बयान ने बढ़ाई चर्चा
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद की टिप्पणी ने इस पूरे घटनाक्रम में एक अलग राजनीतिक पहलू जोड़ दिया है। उन्होंने रायबरेली से अखिलेश यादव की यात्रा शुरू होने को राहुल गांधी से जोड़ते हुए कहा कि जब राहुल गांधी का हाथ उनके हाथ में है तो चिंता की कोई बात नहीं है। उनके बयान को सपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक समन्वय के संदर्भ में देखा जा रहा है।
हालांकि, इमरान मसूद का बयान कांग्रेस की आधिकारिक चुनावी रणनीति का प्रतिनिधित्व करता है या नहीं, इसे अलग से देखना होगा। किसी एक नेता के बयान को पूरी पार्टी की नीति मानने के बजाय उसे संबंधित नेता की टिप्पणी के रूप में देखना अधिक उचित है। इसी तरह सपा की ओर से गठबंधन को लेकर सामने आए बयानों और पार्टी की चुनावी रणनीति को भी आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर समझना होगा।

सपा-कांग्रेस गठबंधन पर निगाहें
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और कांग्रेस के बीच संबंधों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। दोनों दलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। अब 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दलों के बीच सीटों के बंटवारे और चुनावी तालमेल पर नजर बनी हुई है। हालिया रिपोर्टों में अखिलेश यादव के बयानों के आधार पर भी यह सामने आया है कि सपा कांग्रेस के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत जारी रखने की बात कर रही है।
रायबरेली से PDA रथयात्रा शुरू होने के कारण गठबंधन की चर्चा को और बल मिला है। राजनीतिक विश्लेषणों में इसे दोनों दलों के बीच संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है, लेकिन सीटों का वास्तविक बंटवारा और अंतिम चुनावी समझौता संबंधित दलों के आधिकारिक निर्णयों के बाद ही स्पष्ट होगा।
चुनावी अभियान को जमीन पर ले जाने की तैयारी
PDA रथयात्रा के माध्यम से सपा का प्रयास अपने सामाजिक और राजनीतिक संदेश को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का है। रथयात्रा जैसे कार्यक्रम राजनीतिक दलों के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने, स्थानीय संगठनों के साथ संवाद बढ़ाने और जनता के बीच पार्टी की नीतियों को रखने का माध्यम होते हैं।
रायबरेली से शुरू हुई यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच पहुंचकर संवाद किया। रिपोर्टों के अनुसार यात्रा के दौरान उन्होंने भाजपा के खिलाफ राजनीतिक मुकाबले को लेकर भी अपनी बात रखी।
इस बीच यात्रा को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। बसपा प्रमुख मायावती ने भी PDA रथ के रंग और उसके राजनीतिक संदेश को लेकर टिप्पणी की है। इससे स्पष्ट है कि यात्रा के शुरू होते ही उत्तर प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टियों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
आगे बढ़ेगा सियासी अभियान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी आगे हैं, लेकिन प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने संगठन और जनसंपर्क अभियान को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। सपा की PDA रथयात्रा इसी व्यापक चुनावी तैयारी का हिस्सा है। रायबरेली से शुरुआत ने इसे अतिरिक्त राजनीतिक चर्चा दी है, क्योंकि यह क्षेत्र कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण रहा है और वर्तमान में राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है।
इमरान मसूद का बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि कांग्रेस के भीतर भी इस यात्रा को सपा-कांग्रेस संबंधों के संदर्भ में देखा जा रहा है। वहीं भाजपा की प्रतिक्रिया इस अभियान को लेकर अलग राजनीतिक दृष्टिकोण सामने रखती है। आने वाले महीनों में इन दलों के बीच गठबंधन, सीट बंटवारे, सामाजिक समीकरण और चुनावी मुद्दों को लेकर और अधिक सार्वजनिक बयान सामने आने की संभावना है।
फिलहाल PDA रथयात्रा के जरिए अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के अभियान को जमीन पर उतार दिया है। रायबरेली से इसकी शुरुआत ने सपा के PDA संदेश के साथ-साथ सपा-कांग्रेस संबंधों को भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इमरान मसूद का राहुल गांधी के संदर्भ वाला बयान और भाजपा की ओर से उठाए गए सवाल इस यात्रा के इर्द-गिर्द चल रही राजनीतिक बहस के अलग-अलग पक्ष सामने रखते हैं। आगे की तस्वीर पार्टियों की आधिकारिक घोषणाओं, गठबंधन संबंधी निर्णयों और चुनावी कार्यक्रम के साथ और स्पष्ट होगी।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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