
जकार्ता/भारत। एशियाई खेल 2026 में भारतीय निशानेबाजी ने एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है। हरियाणा के जींद की रहने वाली भारतीय शूटर नीरू धांडा ने महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। नीरू ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 28 अंक हासिल किए और न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि एशियाई रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। उनकी इस उपलब्धि के साथ एशियाई खेलों में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।
नीरू धांडा की इस सफलता को भारतीय निशानेबाजी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। महिला ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला शूटर बन गई हैं। फाइनल में उन्होंने जिस आत्मविश्वास और सटीकता के साथ निशाने साधे, उससे भारतीय दल को एक और बड़ी सफलता मिली।
फाइनल में 28 अंक के साथ बनाया एशियाई रिकॉर्ड
महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में नीरू धांडा ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने कुल 28 अंक हासिल किए और शीर्ष स्थान पर रहते हुए स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया। उनका यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसी के साथ उन्होंने एशियाई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
निशानेबाजी जैसी स्पर्धा में एकाग्रता, मानसिक मजबूती और निशाने की सटीकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। फाइनल जैसे दबाव वाले मुकाबले में लगातार बेहतर प्रदर्शन करना खिलाड़ी की तकनीकी क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता को भी दर्शाता है। नीरू ने पूरे फाइनल में अपने प्रदर्शन का स्तर बनाए रखा और अंततः भारत के लिए स्वर्ण पदक हासिल किया।
नीरू के साथ पोडियम पर चीन की यूनोंग सन ने रजत पदक और कुवैत की हजर अब्दुलमलिक ने कांस्य पदक हासिल किया। इस तरह महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत, चीन और कुवैत की खिलाड़ियों ने पदक अपने नाम किए।
पहली भारतीय महिला बनीं नीरू
नीरू धांडा की उपलब्धि इसलिए ऐतिहासिक है क्योंकि महिला ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतने वाली वह पहली भारतीय महिला निशानेबाज बन गई हैं। इससे पहले भी भारतीय महिलाओं ने निशानेबाजी में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में यह उपलब्धि पहली बार भारत के खाते में आई है।
हरियाणा लंबे समय से भारतीय खेल प्रतिभाओं की धरती के रूप में जाना जाता रहा है। कुश्ती, मुक्केबाजी, एथलेटिक्स और निशानेबाजी सहित कई खेलों में राज्य के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया है। अब जींद की नीरू धांडा का नाम भी इस सूची में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के साथ जुड़ गया है।
नीरू की इस सफलता से उनके गृह क्षेत्र में भी खुशी का माहौल है। उनके स्वर्ण पदक जीतने की खबर सामने आने के बाद खेल प्रेमियों और उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया। सोशल मीडिया पर भी उन्हें बधाइयां दी जा रही हैं और उनकी उपलब्धि को भारतीय खेलों के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया जा रहा है।
भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं नीरू
नीरू धांडा भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। खेल और सेना दोनों से उनका जुड़ाव उनकी उपलब्धि को और विशेष बनाता है। भारतीय सेना के कई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं और नीरू ने भी अपनी प्रतिभा के दम पर इस परंपरा को आगे बढ़ाया है।
सेना से जुड़ी खिलाड़ियों के लिए अनुशासन, नियमित अभ्यास और मानसिक मजबूती खेल प्रदर्शन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। नीरू के प्रदर्शन में भी इन गुणों की झलक देखने को मिली। एशियाई खेल जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्वर्ण पदक जीतना उनके लंबे अभ्यास और प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव का परिणाम है।

लोनातो विश्व कप में भी रचा था इतिहास
नीरू धांडा की यह पहली बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं है। इससे पहले उन्होंने लोनातो विश्व कप में भी महिला ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। वह लोनातो विश्व कप में ट्रैप स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनी थीं।
विश्व स्तर की प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतने के बाद नीरू ने यह साबित किया था कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करने की क्षमता रखती हैं। अब एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने प्रदर्शन को और ऊंचे स्तर तक पहुंचाया है।
लोनातो में मिली सफलता ने उनके आत्मविश्वास को मजबूत किया होगा और एशियाई खेलों में उसका असर उनके प्रदर्शन में भी दिखाई दिया। हालांकि एशियाई खेलों का दबाव अलग होता है, क्योंकि यहां खिलाड़ी अपने देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरते हैं। ऐसे में फाइनल में 28 अंक हासिल करना नीरू की निरंतरता और तैयारी को दर्शाता है।
टीम स्पर्धा में भी जीता था रजत
नीरू धांडा ने एशियाई खेलों में केवल व्यक्तिगत स्पर्धा में ही शानदार प्रदर्शन नहीं किया, बल्कि टीम स्पर्धा में भी भारत के लिए पदक जीता। नीरू ने आशीमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ मिलकर महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया था।
टीम स्पर्धा में तीनों भारतीय निशानेबाजों के प्रदर्शन ने भारत को पदक दिलाया। इसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा में नीरू का स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए दोहरी उपलब्धि बन गया। एक ही एशियाई खेल में टीम स्पर्धा का रजत और व्यक्तिगत स्पर्धा का स्वर्ण हासिल करना उनके अभियान को यादगार बना देता है।
टीम स्पर्धा में मिली सफलता ने भारतीय निशानेबाजी दल के मजबूत प्रदर्शन को भी सामने रखा। इसके बाद व्यक्तिगत फाइनल में नीरू का प्रदर्शन भारतीय दल के लिए एक और बड़ी उपलब्धि बन गया।
भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या पांच
नीरू धांडा के स्वर्ण पदक के साथ एशियाई खेल 2026 में भारत के स्वर्ण पदकों की संख्या पांच हो गई है। भारतीय दल के लिए निशानेबाजी लगातार पदक दिलाने वाले खेलों में शामिल रही है और नीरू की सफलता ने पदक तालिका में भारत की स्थिति को और मजबूत किया है।
खेलों के दौरान किसी भी देश के लिए स्वर्ण पदक हासिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन व्यक्तिगत स्पर्धा में रिकॉर्ड प्रदर्शन के साथ स्वर्ण जीतना खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि को और बड़ा बना देता है। नीरू ने फाइनल में 28 अंक हासिल करके एशियाई रिकॉर्ड तोड़ा, इसलिए उनका स्वर्ण केवल पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि रिकॉर्ड के साथ दर्ज हुआ है।
छोटे शहर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
नीरू धांडा की सफलता उन युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा का विषय बन सकती है जो छोटे शहरों और कस्बों से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना चाहते हैं। हरियाणा के जींद से निकलकर भारतीय सेना से जुड़ने और फिर निशानेबाजी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल करने तक का उनका सफर खेल प्रतिभा, प्रशिक्षण और निरंतर मेहनत का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
भारतीय खेल जगत में अब महिला खिलाड़ियों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। निशानेबाजी जैसे खेल में भी भारतीय महिला खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज करा रही हैं। नीरू धांडा का स्वर्ण इस दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है।
एशियाई खेलों में भारत के लिए पांचवें स्वर्ण पदक के रूप में आई नीरू धांडा की यह जीत आने वाले मुकाबलों के लिए भी भारतीय दल का मनोबल बढ़ाने वाली उपलब्धि है। व्यक्तिगत स्वर्ण, एशियाई रिकॉर्ड और टीम स्पर्धा में रजत—इन तीन उपलब्धियों के साथ नीरू ने एशियाई खेल 2026 में भारतीय निशानेबाजी के अभियान को यादगार बना दिया है। उनके प्रदर्शन ने एक बार फिर दिखाया है कि भारतीय महिला निशानेबाज अब एशिया ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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