
हापुड़। जनपद हापुड़ में पुराने डीजल और पेट्रोल वाहनों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को लेकर वाहन स्वामियों, किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों में बढ़ती चिंता के बीच भारतीय किसान यूनियन लोकहित ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर वाहनों को जबरन जब्त किए जाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि केवल वाहन की उम्र के आधार पर किसी वाहन को प्रदूषणकारी मान लेना उचित नहीं है, बल्कि प्रत्येक वाहन की फिटनेस, प्रदूषण जांच और अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए।
ज्ञापन में जिलाधिकारी महोदय, जनपद हापुड़ के समक्ष कहा गया कि एनजीटी और प्रदूषण संबंधी नियमों का हवाला देते हुए 10 वर्ष पुराने डीजल तथा 15 वर्ष पुराने पेट्रोल वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। इस कार्रवाई को लेकर वाहन स्वामियों में आर्थिक नुकसान और अपने वाहनों के भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है।
उम्र के आधार पर कार्रवाई का विरोध
भारतीय किसान यूनियन लोकहित की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि किसी वाहन का पुराना होना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि वह प्रदूषण मानकों का उल्लंघन कर रहा है। संगठन के अनुसार, ऐसे अनेक वाहन हैं जो पुरानी श्रेणी में आते हैं, लेकिन उनकी नियमित रूप से प्रदूषण जांच कराई जाती है, फिटनेस संबंधी आवश्यकताएं पूरी होती हैं और उनके पास जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।
संगठन ने मांग की कि यदि किसी वाहन के प्रदूषण को लेकर कार्रवाई की जानी है तो उसके वास्तविक प्रदूषण स्तर की जांच की जाए। वाहन की स्थिति, फिटनेस प्रमाणपत्र, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) और अन्य वैधानिक दस्तावेजों को भी कार्रवाई का आधार बनाया जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि बिना उचित प्रक्रिया, व्यक्तिगत सुनवाई और वैधानिक जांच के किसी वाहन को जब्त करने की कार्रवाई वाहन मालिक के लिए गंभीर आर्थिक परेशानी पैदा कर सकती है। खासकर ऐसे समय में जब वाहन किसी व्यक्ति की निजी सुविधा के बजाय उसकी रोजी-रोटी का साधन हो।
किसानों और छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाले असर का मुद्दा
भाकियू लोकहित ने अपने ज्ञापन में किसानों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। संगठन के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में किसान ट्रैक्टर, पिकअप और अन्य वाहनों का उपयोग कृषि कार्यों के साथ-साथ उपज को मंडी तक पहुंचाने तथा आवश्यक सामान लाने-ले जाने के लिए करते हैं।
इसी तरह छोटे व्यापारी, मजदूर और स्वरोजगार से जुड़े लोग छोटे मालवाहक वाहनों पर निर्भर रहते हैं। यदि ऐसे वाहनों को अचानक जब्त कर लिया जाता है तो संबंधित व्यक्ति की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
ज्ञापन में कहा गया कि किसान और छोटे कारोबारी अक्सर सीमित संसाधनों में अपना काम संचालित करते हैं। ऐसे में वाहन की जब्ती उनके लिए केवल परिवहन की समस्या नहीं बल्कि सीधे तौर पर आय प्रभावित होने का कारण बन सकती है।
संगठन ने रखी प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई की मांग
भाकियू लोकहित ने प्रशासन से मांग की कि पुराने वाहनों के मामले में एक स्पष्ट और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। संगठन का कहना है कि कार्रवाई से पहले वाहन की जांच की जानी चाहिए और यदि वाहन प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करता है तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन में यह भी मांग रखी गई कि जिन वाहन स्वामियों के पास वैध फिटनेस, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज हैं, उनके मामलों पर अलग से विचार किया जाए। संगठन ने कहा कि नियमों का पालन कराने के साथ-साथ वाहन मालिकों को अपनी बात रखने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।

प्रदूषण नियंत्रण के लिए औद्योगिक इकाइयों पर भी कार्रवाई की मांग
भाकियू लोकहित ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर प्रशासन के सामने एक अन्य महत्वपूर्ण मांग भी रखी। संगठन ने कहा कि यदि जनपद में प्रदूषण कम करना उद्देश्य है तो केवल पुराने वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय रेड जोन में आने वाली औद्योगिक इकाइयों की भी जांच की जानी चाहिए।
संगठन ने मांग की कि जो औद्योगिक इकाइयां प्रदूषण नियंत्रण संबंधी निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रही हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। ज्ञापन में ऐसी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग भी उठाई गई है।
भाकियू लोकहित का तर्क है कि प्रदूषण नियंत्रण की व्यवस्था में सभी संभावित स्रोतों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। वाहनों के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों से होने वाले प्रदूषण की भी नियमित निगरानी और जांच की जानी चाहिए।
अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी
ज्ञापन में संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि पुराने वाहनों की जब्ती की कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई तो भारतीय किसान यूनियन लोकहित की ओर से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। संगठन ने इसके लिए जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी है।
संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का विरोध करना नहीं है, बल्कि वाहन स्वामियों के साथ उचित प्रक्रिया और न्यायसंगत व्यवहार सुनिश्चित कराना है। भाकियू लोकहित ने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए वाहन मालिकों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
पुराने वाहनों को लेकर उठे इस विवाद में प्रशासन के सामने एक ओर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का पालन कराने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों की आजीविका प्रभावित न हो, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है।
वाहन मालिकों का पक्ष है कि केवल वाहन की उम्र को आधार बनाकर कार्रवाई करने के बजाय उसके प्रदूषण स्तर और फिटनेस की वास्तविक स्थिति को भी देखा जाना चाहिए। वहीं प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े नियमों का उद्देश्य वायु गुणवत्ता में सुधार करना है। ऐसे में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ प्रभावित वाहन स्वामियों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और शिकायत निवारण की व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है।
भाकियू लोकहित ने जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले में संबंधित विभागों के अधिकारियों की बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की जाए और वाहन स्वामियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। संगठन ने कहा कि जब तक इस मामले में समाधान नहीं निकलता, तब तक वाहन स्वामियों और किसानों के बीच असंतोष बढ़ सकता है।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई करते हुए पुराने वाहनों की जब्ती पर रोक, वैधानिक जांच के बाद कार्रवाई और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के विरुद्ध प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।
News Editor- (Jyoti Parjapati)
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