Trapped for minutes : सतना जिला अस्पताल गेट पर भीषण जाम, मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस 15 मिनट तक फंसी ?

Trapped for minutes : सतना जिला अस्पताल गेट पर भीषण जाम, मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस 15 मिनट तक फंसी
Trapped for minutes : सतना जिला अस्पताल गेट पर भीषण जाम, मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस 15 मिनट तक फंसी

सतना। जिला अस्पताल के मुख्य गेट के सामने अव्यवस्थित यातायात और सड़क किनारे किए गए अतिक्रमण के कारण एक बार फिर गंभीर जाम की स्थिति सामने आई। अस्पताल में मरीज लेकर पहुंची एक एंबुलेंस करीब 15 मिनट तक जाम में फंसी रही। एंबुलेंस के जाम में फंसने के दौरान मरीज और उसके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल के मुख्य प्रवेश मार्ग पर ठेले-गुमटी, ऑटो और अन्य वाहनों की मौजूदगी के कारण रास्ता संकरा हो गया, जिससे यातायात व्यवस्था बिगड़ गई।

जिला अस्पताल शहर का प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार और जांच के लिए पहुंचते हैं। गंभीर मरीजों को लेकर एंबुलेंस भी लगातार अस्पताल आती-जाती रहती हैं। ऐसे में अस्पताल के मुख्य गेट के सामने यातायात व्यवस्था का सुचारु रहना बेहद जरूरी है। लेकिन स्थानीय स्तर पर बार-बार सामने आ रही अव्यवस्था के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचने में भी परेशानी उठानी पड़ रही है। ताजा घटना ने अस्पताल के सामने यातायात व्यवस्था और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल के गेट के आसपास सड़क किनारे बड़ी संख्या में ठेले और गुमटियां लगने के साथ ऑटो और अन्य वाहन खड़े रहते हैं। अस्पताल आने वाले मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ के बीच जब इन वाहनों और अस्थायी दुकानों के कारण सड़क की चौड़ाई कम हो जाती है तो जाम की स्थिति बन जाती है। सामान्य वाहनों के साथ एंबुलेंस को भी इसी रास्ते से अस्पताल परिसर में प्रवेश करना पड़ता है। ऐसे में थोड़ी सी अव्यवस्था भी गंभीर मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।

ताजा मामले में मरीज को लेकर अस्पताल पहुंची एंबुलेंस जाम में फंस गई। करीब 15 मिनट तक एंबुलेंस को रास्ता मिलने का इंतजार करना पड़ा। एंबुलेंस में मरीज होने के कारण परिजन और चालक जल्द से जल्द अस्पताल के भीतर पहुंचने का प्रयास करते रहे, लेकिन रास्ते में खड़े वाहनों और आसपास मौजूद ठेले-गुमटियों के कारण एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी। इस दौरान आसपास मौजूद लोगों का ध्यान भी एंबुलेंस की ओर गया, लेकिन जाम पूरी तरह खुलने में समय लगा।

अस्पताल के मुख्य गेट पर एंबुलेंस का इस तरह फंसना यातायात व्यवस्था की गंभीरता को दर्शाता है। अस्पताल परिसर में पहुंचने वाली एंबुलेंस के लिए अलग और सुगम रास्ता होना जरूरी माना जाता है, ताकि किसी गंभीर मरीज को उपचार मिलने में अनावश्यक देरी न हो। सड़क पर अतिक्रमण या गलत तरीके से खड़े वाहनों के कारण यदि एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिलता है तो इससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ सकती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार जिला अस्पताल के आसपास अतिक्रमण की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। समय-समय पर नगर प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से कार्रवाई करते हुए सड़क किनारे लगे ठेले और गुमटियां हटाई जाती हैं। वाहनों को व्यवस्थित करने के निर्देश भी दिए जाते हैं। कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए स्थिति में सुधार दिखाई देता है, लेकिन कुछ दिनों या समय के बाद दोबारा उसी स्थान पर ठेले-गुमटियां लगने लगती हैं और ऑटो तथा अन्य वाहन सड़क किनारे खड़े होने लगते हैं।

यही कारण है कि स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई के बाद दोबारा अतिक्रमण कैसे हो जाता है। यदि किसी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है तो वहां लगातार निगरानी की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती। लोगों का कहना है कि केवल अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाना पर्याप्त नहीं है। कार्रवाई के बाद यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि दोबारा उसी स्थान पर कब्जा न हो।

जिला अस्पताल के गेट के सामने सबसे अधिक परेशानी मरीजों और उनके साथ आने वाले परिजनों को होती है। कई मरीज चलने की स्थिति में नहीं होते और उन्हें वाहन या एंबुलेंस से अस्पताल के भीतर ले जाना पड़ता है। बुजुर्ग, बच्चे और गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए अस्पताल के गेट तक आसानी से पहुंचना जरूरी है। यदि प्रवेश मार्ग पर जाम लगा हो तो मरीजों को वाहन से उतारने और अस्पताल तक ले जाने में भी दिक्कत हो सकती है।

इसके अलावा अस्पताल आने वाले लोगों में बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है। एंबुलेंस में आने वाले मरीजों की स्थिति कई बार गंभीर होती है। ऐसे में अस्पताल के गेट के आसपास कुछ मिनट की देरी भी परिजनों के लिए चिंता का कारण बन जाती है। इसलिए अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान के सामने यातायात को सामान्य बाजार की तरह नहीं छोड़ा जा सकता।

Trapped for minutes : सतना जिला अस्पताल गेट पर भीषण जाम, मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस 15 मिनट तक फंसी
Trapped for minutes : सतना जिला अस्पताल गेट पर भीषण जाम, मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस 15 मिनट तक फंसी

स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेले और गुमटियां लगाने वाले छोटे कारोबारी भी अपनी रोजी-रोटी के लिए इन स्थानों पर निर्भर हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ उनके लिए व्यवस्थित स्थान उपलब्ध कराने की चुनौती भी है। यदि वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है तो सड़क किनारे अव्यवस्थित तरीके से कारोबार करने की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। इसी तरह ऑटो के लिए निर्धारित स्टैंड या पार्किंग व्यवस्था होने से अस्पताल के गेट के आसपास अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सकता है।

अस्पताल के सामने यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए स्थानीय स्तर पर कई कदम उठाए जा सकते हैं। अस्पताल के मुख्य गेट के सामने नो-पार्किंग क्षेत्र को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जा सकता है। एंबुलेंस के लिए प्रवेश मार्ग को हमेशा खाली रखने की व्यवस्था की जा सकती है। ऑटो और निजी वाहनों के लिए अलग पार्किंग या स्टैंड तय किया जा सकता है। ठेले और गुमटियों को मुख्य सड़क तथा अस्पताल के प्रवेश मार्ग से पर्याप्त दूरी पर व्यवस्थित किया जा सकता है।

इसके साथ ही अस्पताल के मुख्य गेट पर नियमित यातायात निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है। यदि किसी वाहन को अस्पताल के प्रवेश मार्ग पर खड़ा किया जाता है तो उसे तत्काल हटाया जाए। अतिक्रमण हटाने के बाद दोबारा कब्जा करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इससे सड़क पर बार-बार पैदा होने वाली समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल के सामने जाम की समस्या केवल यातायात से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि यह सीधे स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़ती है। अस्पताल तक मरीजों की सुरक्षित और समय पर पहुंच स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि एंबुलेंस को अस्पताल के गेट तक पहुंचने में ही परेशानी हो रही है तो आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

मरीजों के परिजनों ने मांग की है कि जिला अस्पताल के मुख्य गेट के आसपास स्थायी रूप से यातायात व्यवस्था लागू की जाए। ठेले-गुमटियों को निर्धारित स्थान पर शिफ्ट कराया जाए और ऑटो को भी व्यवस्थित तरीके से खड़ा करने की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा अस्पताल परिसर के सामने अनावश्यक वाहन खड़े करने पर रोक लगाई जाए। लोगों का कहना है कि नियमित निगरानी के बिना अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का स्थायी असर नहीं हो सकता।

इस घटना के बाद एक बार फिर जिला अस्पताल के मुख्य गेट की व्यवस्था चर्चा में आ गई है। कार्रवाई के बावजूद यदि दोबारा ठेले-गुमटियां और वाहन सड़क पर कब्जा कर लेते हैं तो इससे साफ है कि केवल एक बार की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रशासन और संबंधित विभागों को मिलकर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है जिससे अस्पताल का प्रवेश मार्ग हर समय खुला रहे।

फिलहाल मरीज लेकर पहुंची एंबुलेंस के करीब 15 मिनट तक जाम में फंसे रहने की घटना ने अस्पताल के सामने यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों की मांग है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ उसकी दोबारा वापसी रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए। जिला अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य गेट को जाम और अतिक्रमण से मुक्त रखना मरीजों की सुविधा और आपातकालीन सेवाओं के सुचारु संचालन के लिए बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस घटना के बाद क्या कदम उठाते हैं और अस्पताल के गेट पर बार-बार सामने आ रही जाम की समस्या का स्थायी समाधान कब तक हो पाता है।

News Editor- (Jyoti Parjapati)

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